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बजट में यूनिवर्सल बेसिक इनकम पेश कर गरीबों को साध सकती है मोदी सरकार

Updated at : 30 Jan 2017 12:51 PM (IST)
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बजट में यूनिवर्सल बेसिक इनकम पेश कर गरीबों को साध सकती है मोदी सरकार

नयी दिल्ली : चुनावी मौसम में पेश होने वाली बजट के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार यूनिवर्सल बेसिक इनकम का तोहफा देकर देश के गरीबों को साधने का प्रयास कर सकती है. हालांकि, इसके पहले भी मोदी सरकार गरीबों को साधने कई लोकलुभावनी योजनाएं पेश कर चुकी है, लेकिन अन्य योजनाओं की तरह गरीबों के […]

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नयी दिल्ली : चुनावी मौसम में पेश होने वाली बजट के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार यूनिवर्सल बेसिक इनकम का तोहफा देकर देश के गरीबों को साधने का प्रयास कर सकती है. हालांकि, इसके पहले भी मोदी सरकार गरीबों को साधने कई लोकलुभावनी योजनाएं पेश कर चुकी है, लेकिन अन्य योजनाओं की तरह गरीबों के कल्याण के लिए सरकार की ओर से पेश की गयी योजनाएं भी समय के साथ अधर में लटकती चली गयीं. इस बार कहा यह जा रहा है कि मोदी सरकार की यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम गरीबों को साधने में पहले की योजनाओं से काफी कारगर साबित हो सकेगी.

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरह गरीबों का मसीहा बनकर उन्हें साधने के प्रयास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह योजना यदि सफल हो जाती है, तो वह खाद्य सुरक्षा कानून से भी बड़ी ही सफल योजना मानी जायेगी. अगर सरकार की यह योजना सही ढंग से लागू हो जाती है, तो सरकार की ओर से देश के गरीबों को यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम के तहत वेतन दिया जायेगा. सूत्रों का कहना है कि हालांकि, सरकार ने इस योजना को मूर्तरूप देने के लिए बजट में प्रस्ताव पेश करने का मन बनाया तो है, लेकिन गरीबों को कितनी राशि दी जायेगी, अभी यह तय नहीं किया जा सका है.

सूत्र यह भी बताते हैं कि विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पेश होने वाले बजट में सरकार इस योजना का ऐलान भी कर सकती है. यहां तक कि मंगलवार को सरकार की ओर से पेश किये जाने वाले आर्थिक सर्वे में भी इस योजना पर सरकार का खास फोकस हो सकता है. सूत्र यह भी बताते हैं कि सरकार इस योजना को आर्थिक सर्वे के मुख्य चैप्टर में भी शामिल कर सकती है.

सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से हर किसी के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ गरीबों के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम पर विचार किया जा रहा है. इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के खातों में सीधे सैलरी जायेगी. इसके अलावा, इस योजना के तहत परिवार के महिला सदस्य के खातों में पैसे डाले जायेंगे. साथ ही, आगे चलकर गरीबों के लिए चल रही कल्याणकारी योजनाओं को इस योजना में मिलाया जा सकता है.

भारत के पास नहीं है यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम के लिए माकूल राशि

सूत्रों का कहना है कि दुनिया भर में भारत समेत कुछ अन्य देश भी यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम लाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन भारत के पास इस स्कीम को सुचारू ढंग से चलाने के लिए राशि नहीं है. यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम एक तरह की समाजिक सुरक्षा है, जिसमें नागरिकों को सरकार की ओर से एक तय रकम दी जाती है. अभी यह साफ नहीं हुआ है कि सरकार गरीबों को कितना पैसा देगी और इसके लिए पैसा कहां से आयेगा. एक उच्च सरकारी अधिकारी के अनुसार, यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम के लिए अभी पैसे नहीं हैं. अगर इसके बारे में सोचा जाता है, तो इसका मतलब यह कि सरकार को जीडीपी का 12.5 फीसदी रकम का इंतजाम करना होगा.

देश में 5.3 करोड़ है गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वालों की आबादी

अभी हाल ही में पेश एक आर्थिक आकलन के अनुसार, इस समय देश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की संख्या करीब 5.3 करोड़ है. अगर सरकार इन गरीब परिवार के लोगों को हर महीने 1000 रुपये वेतन देती है, तो उस पर करीब 63,600 करोड़ रुपये का सालाना बोझ पड़ेगा. हालांकि, अगर सरकार दूसरी योजनाओं को इसमें मिलाती है, तो उस पर कम बोझ पड़ सकता हैँ.

पीडीएस पर होता है 1.35 लाख रुपये सालाना खर्च

हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये गरीबों को अनाज उपलब्ध कराने पर सालाना करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये खर्च करती है. वहीं, मनरेगा में सरकार द्वारा सालाना करीब 0.41 लाख करो़ड़ रुपये खर्च किये जाते हैं. सरकार अगर इन दोनों योजनाओं को समाप्त कर गरीबों को वेतन उपलब्ध कराती है, तो इन योजनाओं पर खर्च होने वाली राशि में बचत ही होगी.

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