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आपदा से सबक : भूकंपरोधी होने पर ही पास होगा नक्शा

Updated at : 09 May 2015 6:27 AM (IST)
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आपदा से सबक : भूकंपरोधी होने पर ही पास होगा नक्शा

अजय कुमार पटना : नेपाल-बिहार में हाल के भूकंप के बाद पटना नगर निगम नया नक्शा पास कराने की प्रक्रि या में स्ट्रक्चरल इंजीनियर को शामिल करने जा रहा है. निगम वास्तुविदों के अलावा अब स्ट्रक्चरल इंजीनियर को इंपैनल (सूचीबद्ध) करेगा. ये इंजीनियर नक्शे को सर्टिफाइ करेंगे कि प्रस्तावित बिल्डिंग की संरचना में भूकंपरोधी मानक […]

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अजय कुमार

पटना : नेपाल-बिहार में हाल के भूकंप के बाद पटना नगर निगम नया नक्शा पास कराने की प्रक्रि या में स्ट्रक्चरल इंजीनियर को शामिल करने जा रहा है. निगम वास्तुविदों के अलावा अब स्ट्रक्चरल इंजीनियर को इंपैनल (सूचीबद्ध) करेगा. ये इंजीनियर नक्शे को सर्टिफाइ करेंगे कि प्रस्तावित बिल्डिंग की संरचना में भूकंपरोधी मानक का ख्याल रखा गया है या नहीं? बिहार में पहली बार भवनों के नक्शों की मंजूरी में स्ट्रक्चरल इंजीनियर को शामिल किया जा रहा है. पटना नगर निगम ऐसे इंजीनियरों को इंपैनल करेगा. अब तक वास्तुविदों से मंजूर नक्शे के आधार पर भवनों बनाये जाते रहे हैं.

60 दिनों में नये नक्शों को मिलने लगेगी मंजूरी : निगम आयुक्त जय सिंह ने बताया कि 60 दिनों के अंदर नये नक्शों के पास होने की प्रक्रि या शुरू हो जायेगी. नये नक्शे बिल्डिंग बाइलॉज के हिसाब से पास होंगे. निगम को नये मास्टर प्लान का इंतजार है. उम्मीद की जा रही है कि चार हफ्ते में पटना का नया मास्टर प्लान आ जायेगा. नये नक्शों की मंजूरी के लिए निगम वास्तुविदों को इंपैनल करेगा. इसके लिए बड़ी तादाद में आवेदन आये हैं. वास्तुविदों के आवेदनों की छंटनी की जा रही है.

अब हर फेज के निर्माण के बाद करनी होगी खबर

ऊंची इमारतों के मामले में अब हर चरण के निर्माण की सूचना निगम को देनी होगी. यह अनिवार्य होगा. निगम ऐसे भवनों की छानबीन करेगा, ताकि यह पता चल सके कि उसका निर्माण स्ट्ररल इंजीनियर और वास्तुविदों के मंजूर किये गये नक्श के अनुसार हो रहा है या नहीं? जय सिंह ने कहा कि नये बिल्डिंग बाइलॉज को कड़ाई से लागू किया जायेगा.

मौर्या लोक कॉम्प्लेक्स को भूकंप से हुआ नुकसान

बिहार में आये हालिया भूकंप के झटकों से मौर्या लोक की बिल्डिंग को मामूली क्षति हुई है. इस बिल्डिंग को पहुंचे नुकसान के आकलन के लिए बनी जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. जय सिंह ने इस बात की पुष्टि की कि भूकंप के झटकों से बिल्डिंग को मामूली नुकसान पहुंचा है. रिपोर्ट में कई जगहों पर दरार पड़ने और सीमेंट उखड़ने का उल्लेख है. उन्होंने कहा कि यह बड़ी क्षति नहीं है.

निगम में 1.97 लाख है होल्डिंग, छुपे घरों की होगी खोज

जी हां! पटना नगर निगम के 72 वार्डो में ऐसे घर भी बड़ी संख्या में हैं जो निगम की नजरों से बचे हुए हैं. ऐसे घरों की खोज होगी और उसे होल्डिंग के दायरे में लाया जायेगा, ताकि उससे निगम को टैक्स मिले. पटना नगर निगम चार हिस्सों में बंटा है. नूतन अंचल में 80136, बांकीपुर में 34420, कंकड़बाग अंचल में 32414 और पटना सिटी अंचल में 50355 होल्डिंग हैं. इस तरह चारों अंचल मिला कर निगम के खाते में एक लाख 97 हजार 326 होल्डिंग है, जिनसे निगम टैक्स वसूल करता है. आयुक्त जय सिंह ने कहा कि बहुत सारे घर होल्डिंग के दायरे से बचे हुए हैं. अब छानबीन कर ऐसे घरों को होल्डिंग के दायरे में लाया जायेगा.

बिल्डिंग बाइलॉज में क्या है खास

नये इलाकों में 20 फुट सड़क का होना जरूरी

1. बिल्डिंग या आवासीय प्लॉट उसी स्थान पर होगा, जहां सड़क से पहुंचा जा सके.

2. पुराने इलाकों में 12 फुट से कम चौड़ी सड़क के किनारे बिल्डिंग का निर्माण नहीं होगा.

3. नये विकसित इलाकों में इसके लिए 20 फुट चौड़ी सड़क होनी जरूरी है.

4. आवासीय और व्यापारिक कामों के इतर बननेवाली इमारतों के लिए सड़क की चौड़ाई 12.2 मीटर होनी चाहिए.

5. सड़क के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने पर दोनों तरफ के जमीन मालिक सड़क के लिए जमीन छोड़ेंगे.

6.12 मीटर से ऊंची हर बिल्डिंग में लिफ्ट होगी.

7. नये प्रावधान के तहत डिजाइन तैयार करने वाले स्ट्ररल इंजीनियर प्रमाणपत्र देंगे और यह भी अभिप्रमाणति करेंगे कि इमारत का निर्माण उनकी देखरेख में होगा. किसी भी संरचनात्मक खामी के लिए वह जिम्मेदार होंगे.

9. बिल्डिंग प्लान में मुख्य और वैकल्पिक सीढ़ी की चौड़ाई की पूरी जानकारी देनी होगी.

8. गाड़ियों को पार्क करने की जगह के साथ एंबुलेंस और आग बुझानेवाली गाड़ियों को पार्क करने की जगह से संबंधित जानकारी देनी होगी.

9. फायर अलार्म सिस्टम के बारे में बताना होगा.

10. 800 वर्गमीटर से कम के भूखंड पर अपार्टमेंट नहीं बनेगा.

11. जमीन के किसी भी ऐसे टुकड़े को विकसित करने की अनुमति नहीं मिलेगी, जहां तक कम-से-कम आठ मीटर चौड़ी सड़क से पहुंचा नहीं जा सके.

12. अपार्टमेंट निर्माण के लिए कम-से-कम 12 फुट चौड़ी सड़क जरूरी है.

क्षतिग्रस्त भवनों की जांच नहीं हुई पूरी

भूकंप के बाद इमारतों-घरों को हुई क्षति के आकलन के लिए बनी चार टीमों का काम अब भी चल रहा है. इनमें से किसी भी टीम की रिपोर्ट नहीं मिली है. आयुक्त के मुताबिक ऐसा लगता है कि भवनों को बड़ा नुकसान नहीं हुआ है. ऐसा होता, तो टीम को खबर मिल जाती.

नये भवनों के निर्माण में बिल्डिंग बाइलॉज का पालन हर हाल में होगा. यह भी देखा जायेगा कि निर्माणाधीन भवन में भूकंप प्रतिरोधी मानकों को पूरा किया जा रहा है या नहीं? दो हजार इंजीनियरों की ट्रेनिंग हो चुकी है. नगर विकास विभाग की ओर से बिल्डिंग बाइलॉज आ चुका है. इसे लागू कराने की जिम्मेदारी निगम की है, क्योंकि वही क्रि यान्यवन की एजेंसी है. इन सबके अलावा आम लोगों को भूकंप या किसी भी आपदा से निबटने के लिए खुद को भी तैयार रखना होगा.

व्यासजी, प्रधान सचिव, आपदा प्रबंधन

निजी घरों में भूकंपरोधी मानकों का पालन नहीं होता. बेहतर होगा कि उन मानकों का पालन हो. जहां तक सवाल अपार्टमेंट में उन मानकों के पूरा करने का है, तो इस पर निगरानी के लिए सरकार एक रेगुलेटरी बॉडी बनाये. प्रोफेशनल बिल्डर्स पहले से ही स्ट्रक्चरल इंजीनियर के जरिये अपार्टमेंट का निर्माण कराते रहे हैं. नये बिल्डिंग बाइलॉज में यह अनिवार्य हो गया है.

मणिकांत, अध्यक्ष, बिल्डर्स एसोसिएशन

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