प्रमुख दलों में है ‘सर्वदलीय’ माहौल
Author Prabhat khabar digital desk
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आनंद मोहन रांची : झारखंड में दल-बदल की आंधी चली है. नेता खास कर टिकट के दावेदार घंटे भर में छालंग मार रहे हैं. टिकट की जुगाड़ अभी चुनावी एजेंडा बना है. वर्षो तक पार्टी के नीति-सिद्धांत कसम खाने वाले नेता कहीं भी छलांग मारने के लिए तैयार हैं. सुबह पार्टी के नेता से मिल […]
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आनंद मोहन
रांची : झारखंड में दल-बदल की आंधी चली है. नेता खास कर टिकट के दावेदार घंटे भर में छालंग मार रहे हैं. टिकट की जुगाड़ अभी चुनावी एजेंडा बना है. वर्षो तक पार्टी के नीति-सिद्धांत कसम खाने वाले नेता कहीं भी छलांग मारने के लिए तैयार हैं.
सुबह पार्टी के नेता से मिल कर भरोसा दिला रहे हैं कि कहीं नहीं जायेंगे, शाम ढलते ही विरोधी पार्टी के खेमे में होते हैं. प्रदेश अध्यक्ष को रिसीव करने एयरपोर्ट जा रहे हैं, तो बीच में ही रास्ता बदल कर दूसरी पार्टी का माला पहनने पहुंच जा रहे हैं. वर्षो के कसमे-वादे अदद एक टिकट के लिए टूट रहे हैं. हार-जीत, चुनावी समीकरण अपनी जगह पहले विधानसभा का टिकट चाहिए.
झारखंड में राजनीतिक दल बोलें, तो खिचड़ी परोस (किराना दुकान) जैसा हो गया है. एक ही छत के नीचे सभी तरह के आइटम हैं. सेक्यूलर-गैर सेक्यूलर जैसे राजनीति के तथाकथित जुमले भी नहीं रहे. राजनीति का रंग ऐसा चढ़ा है कि सब फर्क मिट गया है. भाजपा, कांग्रेस, झाविमो जैसे दलों में आज आधे दर्जन से अधिक पार्टियों के रणबाकुंरे शामिल हो गये हैं. इन पार्टियों में अब सर्वदलीय माहौल है. दावेदार का जुगाड़ अपनी पुरानी पार्टी में नहीं लगा, तो सेकेंड में इस्तीफा पटक कर चल दिये. विरोधी पार्टियों ने भी स्वागत के लिए खिड़की दरवाजा खोल रखा है.
17 विधायकों ने अब तक बदला पाला
दल-बदल की आंधी में 17 सीटिंग विधायकों ने पाला बदला है. विधायकों की पहली पसंद भाजपा है. झाविमो के पास 11 विधायक थे. आज की तारीख में पार्टी में तीन विधायक बचे हैं. आठ विधायकों ने पाला बदल लिया है. झाविमो विधायकों की पहली पसंद भाजपा रही है. वहीं झामुमो में दो विधायक शामिल हो गये. झाविमो में आजसू छोड़ कर एक विधायक आ गये. पाला बदलने की दौड़ में पूर्व विधायक भी शामिल हैं. आधा दर्जन से ज्यादा पूर्व विधायकों ने अपना घर-बार छोड़ कर दूसरा ठौर तलाश लिया है.
नेता फरार, तो बैकअप है तैयार
पार्टियों की नजर अपने-अपने दावेदारों पर है. पार्टी छोड़ कर जाने वाले नेताओं के विकल्प भी तैयार हैं. बैक -अप के लिए दूसरे दल के दावेदारों का इंतजार होता है. भाजपा से कई सीटिंग और दावेदारों की टिकट कटी, तो विरोधियों ने अपनी सूची रोक ली. झारखंड में कई पार्टियां दावेदार के इंतजार में पूरी सूची जारी नहीं कर रही हैं. चतरा से सत्यानंद भोक्ता को टिकट नहीं मिला, तो पूर्व मंत्री श्री भोक्ता को झाविमो ने झट से चतरा से उतार दिया. सिमरिया से गणोश गंझू का टिकट कटा, तो झाविमो ने उम्मीदवार बना दिया. राजमहल से सीटिंग विधायक अरुण मंडल का टिकट कट गया. झाविमो ने राजमहल की सीट अरुण मंडल के लिए रोक कर रखा है.
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