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जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, असहमति को ‘राष्ट्र-विरोधी’ कहना लोकतंत्र पर हमला

Updated at : 15 Feb 2020 10:35 PM (IST)
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जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, असहमति को ‘राष्ट्र-विरोधी’ कहना लोकतंत्र पर हमला

<figure> <img alt="जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़" src="https://c.files.bbci.co.uk/10EFB/production/_110917396_gettyimages-1168646426.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़</figcaption> </figure><p>असहमति को लोकतंत्र का ‘सुरक्षा कवच’ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि असहमति पर लेबल लगाकर उन्हें ‘राष्ट्र-विरोधी’ या ‘लोकतंत्र विरोधी’ बताना जानबूझकर लोकतंत्र की मूल भावना पर हमला है. </p><p>समाचार एजेंसी पीटीआई […]

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<figure> <img alt="जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़" src="https://c.files.bbci.co.uk/10EFB/production/_110917396_gettyimages-1168646426.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़</figcaption> </figure><p>असहमति को लोकतंत्र का ‘सुरक्षा कवच’ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि असहमति पर लेबल लगाकर उन्हें ‘राष्ट्र-विरोधी’ या ‘लोकतंत्र विरोधी’ बताना जानबूझकर लोकतंत्र की मूल भावना पर हमला है. </p><p>समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, गुजरात में भाषण देते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल कर असहमतियों पर अंकुश लगाना, डर की भावना पैदा करता है जो क़ानून के शासन का उल्लंघन करता है. </p><p>उन्होंने कहा, &quot;असहमत रहने वालों पर राष्ट्रविरोधी या लोकतंत्र विरोधी होने का लेबल लगाना हमारे संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता और लोकतंत्र की तरक़्क़ी की मूल भावना पर हमला करता है.&quot;</p><p>जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि असहमति का संरक्षण करना यह याद दिलाता है कि लोकतांत्रिक रूप से एक निर्वाचित सरकार हमें विकास एवं सामाजिक समन्वय के लिए एक न्यायोचित औज़ार प्रदान करती है, वे उन मूल्यों एवं पहचानों पर कभी एकाधिकार का दावा नहीं कर सकती जो हमारी बहुलवादी समाज को परिभाषित करती हैं.</p><figure> <img alt="प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/C0DB/production/_110917394_gettyimages-1200296300.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>देशभर में चल रहे प्रदर्शनों के बीच आई टिप्पणी</h1><p>अहमदाबाद में गुजरात हाईकोर्ट के ऑडिटोरियम में वो ये व्याख्यान दे रहे थे. 15वें न्यायमूर्ति पीडी देसाई स्मारक व्याख्यान का विषय ‘भारत को निर्मित करने वाले मतों: बहुलता से बहुलवाद तक’ था. </p><p>उन्होंने कहा, ”असहमति पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी मशीनरी को लगाना डर की भावना पैदा करता है और स्वतंत्र शांति पर एक डरावना माहौल पैदा करता है जो क़ानून के शासन का उल्लंघन करता है और बहुलवादी समाज की संवैधानिक दूरदृष्टि से भटकाता है.”</p><p>जस्टिस चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी ऐसे वक़्त पर आई है जब नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) और एनआरसी के कारण देश के कई हिस्सों में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं. </p><p>उन्होंने कहा कि सवाल करने की गुंजाइश को ख़त्म करना और असहमति को दबाना सभी तरह की प्रगति-राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक बुनियाद को नष्ट करता है, इस मायने में असहमति लोकतंत्र का एक ‘सेफ्टी वॉल्व’ है.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-51506192?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">शाहीन बाग़: कब और कैसे ख़त्म होगा विरोध-प्रदर्शन?</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-51514722?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">अमित शाह से मुलाक़ात पर क्या बोले शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारी?</a></li> </ul><figure> <img alt="जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़" src="https://c.files.bbci.co.uk/72BB/production/_110917392_gettyimages-1168646425.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>’मशीनरी से हो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा'</h1><p>जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि असहमति को ख़ामोश करने और लोगों के मन में भय पैदा होना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन और संवैधानिक मूल्य के प्रति प्रतिबद्धता से आगे तक जाता है. </p><p>गौरतलब है कि जस्टिस चंद्रचूड़ उस पीठ का हिस्सा थे, जिसने उत्तर प्रदेश में सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूल करने के ज़िला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजी गई नोटिसों पर जनवरी में प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-51511259?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले गद्दार नहीं</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-51276093?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के लिए देना होगा ‘धर्म का सबूत’: प्रेस रिव्यू</a></li> </ul><p>उन्होंने यह भी कहा,”असहमति पर प्रहार संवाद आधारित लोकतांत्रिक समाज के मूल विचार पर चोट करता है और इस तरह किसी सरकार को यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि वह अपनी मशीनरी को क़ानून के दायरे में वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए तैनात करे तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने या डर की भावना पैदा करने की किसी भी कोशिश को नाकाम करे.”</p><figure> <img alt="स्पोर्ट्स विमेन ऑफ़ द ईयर" src="https://c.files.bbci.co.uk/12185/production/_110571147_footerfortextpieces.png" height="281" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.</strong><strong>)</strong></p>

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