चलिये मांडू नगरी घूम आयें
Updated at : 19 Jan 2020 2:53 AM (IST)
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डॉ कायनात काजीसोलो ट्रेवलर मांडू का दुर्ग एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा दुर्ग माना जाता है. मांडू नगरी में इतना कुछ है देखने के लिए कि दो दिन भी कम मालूम होते हैं. मौका निकालकर आप मांडू नगरी घूमने जरूर जायें.रानी रूपमती और बाजबहादुर की अमर प्रेम कहानी का साक्षी है मध्य प्रदेश के धार […]
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डॉ कायनात काजी
सोलो ट्रेवलर
मांडू का दुर्ग एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा दुर्ग माना जाता है. मांडू नगरी में इतना कुछ है देखने के लिए कि दो दिन भी कम मालूम होते हैं. मौका निकालकर आप मांडू नगरी घूमने जरूर जायें.रानी रूपमती और बाजबहादुर की अमर प्रेम कहानी का साक्षी है मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक नगरी मांडू. इंदौर से निकलकर एनएच-47 से होते हुए जैसे-जैसे हम विंध्याचल पर्वत माला की ओर बढ़ते हैं, हमें एक अलौकिक सौंदर्य अपनी ओर खींचता है.
ऐसे सुंदर और सजीले पठार पूरे भारत में केवल यहीं हैं. इन पर्वत मालाओं का संबंध अगस्त्य मुनि से भी है. कहते हैं इस जगह का उदय ज्वालामुखी के फटने से हुआ था. मांडू ने परमार राजाओं से लेकर दिल्ली सल्तनत के बादशाहों और मुगल शाहंशाहों और आगे जाकर मराठा शासकों को आकर्षित किया. इसीलिए यहां वास्तुकला की अनेक शैलियों के स्मारक नजर आते हैं.
मांडू का दुर्ग एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा दुर्ग माना जाता है. यह पूर्व से पश्चिम की ओर 8-9 किमी एवं उत्तर से दक्षिण की ओर 6-7 किमी में फैला हुआ है. मांडू दुर्ग में प्रवेश करने के लिए कुल 12 द्वार थे. जिसमें से छह द्वार दुर्ग की दीवारों से जुड़े हैं. ये द्वार अलग-अलग नाम से जाने जाते हैं. मांडू के भी कई नाम हैं- मांडव, मांडवदुर्ग, मांडवगढ़, मांडवपुर एवं शादियाबाद यानी आनंद नगरी.
ऐतिहासिक पर्यटक स्थल मांडू में लगभग 48 स्मारक मौजूद हैं. पर्यटन की दृष्टि से इन क्षेत्रों को अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया है. जैसे पहला खंड है शाही क्षेत्र यानी रॉयल कंपलेक्स. इसमें कई अद्वितीय स्मारक हैं-
तवेली महल, जहाज महल, मुंज सागर, कपूर तालाब, हिंडोला महल, चंपा बावड़ी शाही महल, जल महल, नाहर झरोखा, नाटकघर, हमामघर, दिलावर खान की मस्जिद, गदाशाह की दुकान, गदाशाह का महल आदि. दूसरा है मध्य क्षेत्र. इसे विलेज ग्रुप भी कहा जाता है, जिसमें होशंगशाह का मकबरा, जामा मस्जिद, अशर्फी महल, श्रीराम मंदिर और आल्हा उदल की सांग शामिल है.
तीसरा रेवा कुंड क्षेत्र है, जिसमें रूपमती मंडप, बाजबहादुर महल, रेवा कुंडल, प्रतिध्वनि बिंदु, नीलकंठ मंदिर, साथ कोठरी, हाथीपोल दरवाजा, चिश्तीखां का मकबरा, लोहानी गुफा, चप्पन महल, दाई का महल, चोर कोट, मालिक मुगीथ की मस्जिद, कैनवान सराय, हाथी पगा महल, दरिया खां का मकबरा, लाल बंगला साहब, श्वेतांबर तीर्थ पेढ़ी, दिगंबर जैन मंदिर आदि शामिल हैं.
वैसे तो सभी स्मारक खूबसूरत हैं, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण क्षेत्र है रॉयल कॉन्प्लेक्स, जहां पर फेमस जहाज महल स्थित है. क्षेत्र का निर्माण भले ही परमार राजाओं ने शुरू करवाया था, लेकिन इसको सल्तनत के बादशाहों और मुगलों ने परिमार्जित किया. वास्तुकला की दृष्टि से मांडू स्थित समस्त स्मारकों में जहाज महल सबसे श्रेष्ठ है.
इसके आगे और पीछे एक सरोवर है. बारसात में जब सरोवर पानी से भर जाते हैं, तो यह महल पानी में तैरते हुए जहाज जैसा दिखायी देता है. इसके नजदीक ही एक संरचना है, जो इंडोर गौथिक वास्तुकला का सुंदर नमूना है. इसका नाम है हिंडोला महल. इस संरचना का नाम हिंडोला इसलिए पड़ा, क्योंकि यह संरचना बिना किसी खंबे के बनी हुई है.
मध्य क्षेत्र में होशंगशाह का मकबरा सफेद संगमरमर से बना है. यह एक भव्य इमारत है. लोग कहते हैं ताजमहल की प्रेरणा इस गुंबद से ली गयी थी. इसका निर्माण मांडू के प्रथम स्वतंत्र सुल्तान होशंग शाह गौरी ने 14वीं-15वीं ईस्वी में करवाया था. तीसरे क्षेत्र में रूपमती मंडप स्थित है. कहते हैं इस भवन का निर्माण बाजबहादुर और उनकी प्रेयसी रूपमती से जुड़ा हुआ है. इसका निर्माण नासिर शाह खिलजी ने सन् 1508 में करवाया था.
मांडू की पश्चिमी सीमा पर मालवा के पठारों के बीच स्थित है नीलकंठ महादेव मंदिर. यहां मांडू फेस्टिवल का आयोजन भी होता है, जहां हॉट एयर बलून जैसे एडवेंचर एक्टिविटी भी शामिल हैं. मांडू में इतना कुछ है देखने के लिए कि दो दिन भी कम मालूम होते हैं.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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