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अमरीका को ईरानी मिसाइल अटैक की कैसे लगी भनक

Updated at : 10 Jan 2020 10:40 PM (IST)
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अमरीका को ईरानी मिसाइल अटैक की कैसे लगी भनक

<figure> <img alt="ईरान मिसाइल" src="https://c.files.bbci.co.uk/11446/production/_110462707__110394676_1966442f-788e-4a01-9d9b-51283dce847e.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> <figcaption>प्रतीकात्मक तस्वीर</figcaption> </figure><p>मंगलवार को ईरान ने इराक में अमरीकी सैन्य ठिकाने पर कई मिसाइलें दागी. ईरान की ये कार्रवाई उसके टॉप लीडर जनरल सोलेमानी की मौत के ‘बदले’ के लिए की गई थी. </p><p>अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि इस हमले में कोई अमरीकी […]

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<figure> <img alt="ईरान मिसाइल" src="https://c.files.bbci.co.uk/11446/production/_110462707__110394676_1966442f-788e-4a01-9d9b-51283dce847e.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> <figcaption>प्रतीकात्मक तस्वीर</figcaption> </figure><p>मंगलवार को ईरान ने इराक में अमरीकी सैन्य ठिकाने पर कई मिसाइलें दागी. ईरान की ये कार्रवाई उसके टॉप लीडर जनरल सोलेमानी की मौत के ‘बदले’ के लिए की गई थी. </p><p>अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि इस हमले में कोई अमरीकी या इराक़ी जान नहीं गई और बहुत ही कम नुक़सान हुआ. </p><p>ईरान की मिसाइलों ने टारगेट को हिट किया लेकिन अमरीका ने मिसाइलों का ख़तरा कैसे भांप लिया था? </p><figure> <img alt="डोनल्ड ट्रंप" src="https://c.files.bbci.co.uk/111EE/production/_110462107_donaldtrump.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>इसका जवाब खुद डोनल्ड ट्रंप ने दिया कि उनके ‘वार्निंग सिस्टम’ ने सही काम किया. अमरीका के पास बहुत बड़ा रडार नेटवर्क और कई सेटेलाइट हैं जो पूरी दुनिया में मिसाइल लांच ट्रैक करते हैं. </p><p>इसी वजह से अमरीकी सैनिक मिसाइलों से बच पाए. इस बार तो सिस्टम ने सही काम किया लेकिन कुछ देशों की मिसाइल तकनीक बेहतर भी हो रही है तो ऐसे में अमरीका का सिस्टम कितना कारगर है? </p><p>वायर्ड वेबसाइट के मुताबिक़ इस वक्त अमरीका के पास 4 मिसाइल ट्रैकिंग इंफ्रारेड सैटेलाइट हैं और इसके अलावा 2 इंफ्रारेड मिसाइल डिटेक्शन सिस्टम भी है. </p><p>ईरान के केस में भी शायद इन्हीं सैटेलाइट में से किसी ने मिसाइलों की जानकारी दी होगी. </p><p>ऐसा दावा अमरीका ने तो नहीं किया है लेकिन ये सैटेलाइट कोई राज़ नहीं. रडार सिस्टम पहाड़ों की वजह से तब तक किसी मिसाइल को डिटेक्ट नहीं कर सकता जब तक वो एक सीमित ऊँचाई पर ना हो. </p><figure> <img alt="ईरान मिसाइल" src="https://c.files.bbci.co.uk/1600E/production/_110462109_gettyimages-1192521740.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>ईरान की इराक़ी शहर अल-बग़दादी में दागी गई मिसाइल के अंश</figcaption> </figure><p>जब एक मिसाइल लांच होती है तो एक अलर्ट मिसाइल वार्निंग सेंटर में जाता है जो अमरीका के कॉलोराडो में यूएस स्पेस कमांड ऑपरेट करता है. फिर मिलिट्री एक्सपर्ट देखते हैं कि क्या सही डिटेक्ट किया गया है या नहीं और मिसाइल की क्या ट्रेजेक्टरी होगी और कहां टारगेट करेगी. </p><p>वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक़ ईरान के केस में अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि उनके पास सैटेलाइट कम्युनिकेशन की वजह से कई घंटे पहले ही एडवांस वार्निंग थी. हालांकि मिसाइल लांच होने के बाद बस कुछ मिनट ही होते हैं. मिसाइल को रोकने की बजाय अमरीकी सैनिकों को टार्गेटेड बेस से निकल जाने का आदेश दिया गया. </p><p>लेकिन एक और ख़ास बात सामने आ रही है. अमरीकी न्यूज़ चैनल सीएनएन के पत्रकार जेक टैपर ने पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से ट्वीट किया है कि ईरान ने जानकर ऐसे टारगेट चुने जहाँ जान-माल का न्यूनतम नुक़सान हो. </p><p>अमरीका और यूरोपीय सरकारों के सूत्रों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा है कि उन्हें विश्वास है कि ईरान ने जानबूझकर ऐसा किया है ताकि कम से कम नुक़सान हो और ईरान ने इस हमले में अमरीकी कैंपों को काफ़ी हद तक बचा दिया ताकि जो संकट मंडरा रहा है वो नियंत्रण से बाहर ना हो जाए. </p><figure> <img alt="अयोतोल्लाह अली खमेनेई" src="https://c.files.bbci.co.uk/7996/production/_110462113_ayotollahkhamenei.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>अयोतोल्लाह अली खमेनेई</figcaption> </figure><p>अमरीका का मिसाइल वार्निंग सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए सही काम करता है जैसी ईरान के पास हैं. इन मिसाइलों के लांच होने पर इनकी ट्रेजेक्टरी कैलकुलेट की जा सकती है, यानी उनका रास्ता पता लगाया जा सकता है. </p><p>लेकिन अब ऐसी मिसाइलें भी आ रही हैं जो बीच में ही अपना रास्ता बदल सकने में सक्षम हैं. कुछ देशों के पास बेहतर मिसाइल तकनीक भी है जिसका तोड़ अभी अमरीका के पास नहीं है. जैसे कम उंचाई पर उड़ने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल. </p><p>हाइपरसोनिक डिवाइस साउंड की स्पीड से 5 गुना ज़्यादा तेज़ी से ट्रेवल करते हैं और दो तरह के होते हैं – क्रूज़ मिसाइल और एक टाइप की बैलिस्टिक मिसाइल जिसे एमआरवी कहा जाता है. </p><p>अमरीका को अपनी कमियां पता है और वो अपनी तकनीक को अपडेट करने की कोशिश भी कर रहा है. डोनल्ड ट्रंप ने जनवरी 2019 में ये वादा किया था कि वो ऐसा मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम बनाएंगे जो अमरीका के हर शहर को और लोगों को किसी भी मिसाइल अटैक से बचाएगा. </p><p>लेकिन इसके बाद अमरीका ने मिसाइल डिफेंस रिव्यू जारी किया और इसमें पुरानी नीतियों को ही जारी रखने की बात थी और कोई नया बड़ा प्रोग्राम नहीं अनाउंस किया गया. </p><p>बीबीसी के रक्षा मामलों के रिपोर्टर जोनाथन मार्कस एक रिपोर्ट के हवाले से लिखते हैं कि अमरीका कई मामलों में दूसरे देशों से आगे है जैसे इंटेलिजेंस, बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस, और लड़ाकू जहाज़ों में. आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के मुताबिक़ अमरीका के पास 400 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइले हैं. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें</strong><a href="https://www.facebook.com/BBCnewsHindi"> फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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