FATF: पाकिस्तान ने फ़रवरी 2020 तक ज़रूरी क़दम नहीं उठाया तो...

Updated at : 18 Oct 2019 8:32 PM (IST)
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FATF: पाकिस्तान ने फ़रवरी 2020 तक ज़रूरी क़दम नहीं उठाया तो...

<figure> <img alt="एफ़एटीएफ़ का पेरिस स्थित मुख्यालय" src="https://c.files.bbci.co.uk/F1FC/production/_109284916_afdca0f4-f767-46c9-8978-1c833475095b.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरक़रार रखने का फ़ैसला किया है. लेकिन उसने पाकिस्तान को सख़्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर पाकिस्तान ने फ़रवरी 2020 तक इस मामले में ज़रूरी क़दम नहीं उठाया तो फिर […]

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<figure> <img alt="एफ़एटीएफ़ का पेरिस स्थित मुख्यालय" src="https://c.files.bbci.co.uk/F1FC/production/_109284916_afdca0f4-f767-46c9-8978-1c833475095b.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरक़रार रखने का फ़ैसला किया है. लेकिन उसने पाकिस्तान को सख़्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर पाकिस्तान ने फ़रवरी 2020 तक इस मामले में ज़रूरी क़दम नहीं उठाया तो फिर उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है.</p><p>पेरिस में एफ़एटीएफ़ के अध्यक्ष ज़ियांग मन लिउ ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि पाकिस्तान फ़रवरी 2020 की डेडलाइन तक ग्रे लिस्ट में ही रहेगा.</p><p>उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जो लक्ष्य पूरा करना था वो उसे हासिल करने में वो असफल रहा है.</p><p>उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में नई सरकार बनने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग और दहशतगर्दों को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकने के मामले में प्रगति हुई है जो स्वागत योग्य है लेकिन अभी भी पाकिस्तान को और बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.</p><p>एफ़एटीएफ़ ने इसके लिए पाकिस्तान को फ़रवरी 2020 तक का समय दिया है.</p><p>अध्यक्ष ज़ियांग ने कहा कि इसके लिए पाकिस्तान को पूरी मदद दी जाएगी. एफ़एटीएफ़ ने एक बयान जारी कर कहा कि अगर फ़रवरी 2020 तक पाकिस्तान ने इस मामले में पर्याप्त क़दम नहीं उठाएगा तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.</p><p>इस कार्रवाई के तहत एफ़एटीएफ़ अपने सदस्य देशों को कह सकता है कि वो अपने-अपने वित्तीय संस्थानों को पाकिस्तान के साथ होने वाले कारोबार पर विशेष ध्यान दें.</p><p>पेरिस में 13 अक्तूबर से शुरू होने वाली बैठक के अंतिम दिन यानी शुक्रवार (18 अक्तूबर) को फ़ैसला सुनाते हुए एफ़एटीएफ़ ने कहा कि पाकिस्तान को जिन 40 सिफ़ारिशों पर अमल करने के लिए कहा गया था उन पर उसने संतोषजनक कार्रवाई नहीं की है.</p><h3>पाकिस्तान को 10 बिलियन डॉलर का नुकसान</h3><p>एफ़एटीएफ़ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसकी स्थापना G7 देशों की पहल पर 1989 में की गई थी. संस्था का मुख्यालय पेरिस में है, जो दुनिया भर में हो रही मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए नीतियां बनाता है.</p><p>साल 2001 में इसने अपनी नीतियों में चरमपंथ के वित्तपोषण को भी शामिल किया था. संस्था अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को सही रखने के लिए नीतियां बनाता है और उसे लागू करवाने की दिशा में काम करता है.</p><p>इसके कुल 38 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत, अमरीका, रूस, ब्रिटेन, चीन भी शामिल हैं.</p><p>जून 2018 से पाकिस्तान दुनिया भर के मनी लॉन्ड्रिंग पर नज़र रखने वाले संस्थाओं के रेडार पर है. पाकिस्तान इन संस्थाओं के निशाने पर तब आया जब उसे चरमपंथियों को फ़ंड करने और मनी लॉन्ड्रिंग के ख़तरे को देखते हुए ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया गया था.</p><p>ग्रे लिस्ट में सर्बिया, श्रीलंका, सीरिया, त्रिनिदाद, ट्यूनीशिया और यमन भी हैं.</p><figure> <img alt="लश्कर प्रमुख हाफ़िज़ सईद" src="https://c.files.bbci.co.uk/1401C/production/_109284918_fc7716c9-4dba-4d99-8989-42c60d819de9.jpg" height="351" width="624" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>38 सदस्यीय देशों वाले एफ़एटीएफ़ के नियमों के अनुसार ब्लैकलिस्ट से बचने के लिए किसी भी देश को तीन सदस्यों के समर्थन की ज़रूरत होती है.</p><p>तुर्की एकमात्र ऐसा देश था जो खुलकर भारत के लाए गए इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा था. भारत के इस प्रस्ताव का समर्थन अमरीका और ब्रिटेन कर रहे थे, वहीं पाकिस्तान का लंबे वक़्त से साथ देने वाला चीन उस समय इस पर चुप था.</p><p>चीन अब तक सभी मंचों पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन करते आया है लेकिन अब वो भी शांत है.</p><p>इससे पहले पाकिस्तान साल 2011 में भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर चुका है. उस वक़्त भी इसे ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया था. इसके बाद साल 2015 में पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से तभी बाहर आ पाया जब इसने सफलतापूर्वक ऐक्शन प्लान लागू किया.</p><p>इस लिस्ट में आने से पाकिस्तान को हर साल लगभग 10 बिलियन डॉलर का नुक़सान हो रहा है.</p><p><strong>बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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