एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अपना फ़ैसला

Updated at : 01 Oct 2019 10:42 PM (IST)
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एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अपना फ़ैसला

<figure> <img alt="दलितों का प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/B2E1/production/_109039754_fa20a6f4-f1bc-44f1-9036-e1166f2aab6a.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत गिरफ़्तारी के प्रावधानों को हल्का करने संबंधी अपना पुराना फ़ैसला वापस ले लिया है. </p><p>20 मार्च, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ़्तारी के प्रावधानों को हल्का किया था, इसके मुताबिक़ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होने […]

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<figure> <img alt="दलितों का प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/B2E1/production/_109039754_fa20a6f4-f1bc-44f1-9036-e1166f2aab6a.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत गिरफ़्तारी के प्रावधानों को हल्का करने संबंधी अपना पुराना फ़ैसला वापस ले लिया है. </p><p>20 मार्च, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ़्तारी के प्रावधानों को हल्का किया था, इसके मुताबिक़ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बाद तुरंत गिरफ़्तारी से छूट दी गई थी.</p><p>हालांकि इसके बाद नरेंद्र मोदी की सरकार ने रिव्यू याचिका दाख़िल की, जिस पर जस्टिस अरुण मिश्रा के नेतृत्व में जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीआर गवई की सदस्यता वाली कमेटी ने दो न्यायाधीशों के फ़ैसले को पलट दिया है. </p><p>तीन सदस्यीय बेंच ने कहा, &quot;अदालत वह काम नहीं कर सकती जो काम विधायिका के ज़रिए संभव नहीं हो.&quot;</p><p>सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की बेंच ने ये भी माना कि एससी/एसटी समुदाय के लोगों को अभी भी उत्पीड़न और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में इस क़ानून को डायल्यूट करने का कोई औचित्य नहीं है.</p><p>इस फ़ैसले के बाद अब एफ़आईआर दर्ज होने से पहले की जाने वाली ज़रूरी जांच की बाध्यता भी ख़त्म हो गई है. नरेंद्र मोदी की सरकार ने 20 मार्च, 2018 के फ़ैसले को संविधान के मूल भावना के विरुद्ध बताते हुए पुनर्विचार याचिका दाख़िला की थी.</p><p>जब ये फ़ैसला आया था तब नरेंद्र मोदी सरकार को काफ़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था कि वह एससी/एसटी समुदाय के लोगों के हितों की रक्षा नहीं कर रही है. </p><figure> <img alt="दलितों का प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/10101/production/_109039756_bd953130-db8d-46f7-8c63-89d774d8a8b8.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला उस वक़्त आया है जब महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. </p><p>महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में 29 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं जबकि राज्य में क़रीब 13 फ़ीसदी मतदाता दलित हैं. जबकि हरियाणा की 90 में 17 सीटें आरक्षित हैं और राज्य में दलितों की आबादी 21 प्रतिशत है. </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48135171?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">BJP नेता के दलित युवक को पीटने का सच</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48229109?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">उत्तराखंड: भरी शादी में दलित की ‘पीटकर हत्या’ पर देखा किसी ने नहीं</a></li> </ul><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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