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पटना में बाढ़: सवालों के घेरे में सिर्फ़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही नहीं, बीजेपी भी है- नज़रिया

Updated at : 30 Sep 2019 10:55 PM (IST)
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पटना में बाढ़: सवालों के घेरे में सिर्फ़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही नहीं, बीजेपी भी है- नज़रिया

<figure> <img alt="पटना" src="https://c.files.bbci.co.uk/ED6D/production/_109018706_hi056940832.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p>पटनावासियों ने थोड़ी राहत की साँस ली है, क्योंकि बारिश थम चुकी है और ऊँची जगहों से जलजमाव हटने लगा है.</p><p>लेकिन लोगों की मुसीबतें अभी कई शक्लों में बरक़रार हैं. पानी के बहाव में सड़कों पर और गलियों सहित मकानों के अंदर जहाँ-तहाँ घुस आए कचरों की […]

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<figure> <img alt="पटना" src="https://c.files.bbci.co.uk/ED6D/production/_109018706_hi056940832.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p>पटनावासियों ने थोड़ी राहत की साँस ली है, क्योंकि बारिश थम चुकी है और ऊँची जगहों से जलजमाव हटने लगा है.</p><p>लेकिन लोगों की मुसीबतें अभी कई शक्लों में बरक़रार हैं. पानी के बहाव में सड़कों पर और गलियों सहित मकानों के अंदर जहाँ-तहाँ घुस आए कचरों की सड़ांध फैली हुई है.</p><p>निचले इलाक़ों के तमाम मुहल्लों में अभी भी घुटनों से लेकर कमर तक पानी भरा है. वहाँ वाहनों के ज़रिये कौन कहे, पैदल आना-जाना भी मुश्किल हो रहा है.</p><p>पानी निकासी वाले पंप हाउस चालू तो किये गए हैं लेकिन चोक(अवरुद्ध) हो चुके छोटे-बड़े नाले रुकावट पैदा कर रहे है.</p><p>सब्ज़ी और फल की आमद नहीं के बराबर है. अधिकांश दुकानें बंद है. सरकारी राहत सामग्री बाँटने वाले या आपदा प्रबंधन के लोग कहीं-कहीं ख़ानापूर्ति करते दिख जाते हैं.</p><figure> <img alt="बाढ़ से प्रभावित हुए कई इलाके" src="https://c.files.bbci.co.uk/B75E/production/_109024964_two.jpg" height="546" width="976" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>बाढ़ से प्रभावित हुए कई इलाके</figcaption> </figure><h1>जलभराव से जनजीवन बेहाल</h1><p>जहाँ से जमा पानी निकल पाया है, वहाँ की सड़कें उखड़ी हुईं और कीचड़ भरे गड्ढों से पटी हुईं नज़र आ रही हैं.</p><p>युद्धस्तर पर गंदगी की सफ़ाई-मुहिम चलाने, बिजली और पेयजल आपूर्ति सिस्टम में आई टूट-फूट को अविलंब दुरुस्त करने और अस्पतालों में बाधित चिकित्सा-सेवा तुरंत बहाल करने की गुहार लगाई जा रही है.</p><p>हालाँकि ऐसी गुहार पर सरकारी अमलों को तत्परता के साथ कार्रवाई में जुट जाते देखने का कोई पूर्वोदाहरण यहाँ लोगों के सामने नहीं रहा है.</p><p>आज भी बिहार के शहरी/क़स्बाई इलाक़ों में जहाँ भी जलभराव से जनजीवन बेहाल है, यक़ीन मानिये कि इस की जड़ में राज्य की सरकार है.</p><p><a href="https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/2507894019274818/">https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/2507894019274818/</a></p><p>जलनिकासी व्यवस्था से जुड़े सरकारी महकमों में नींचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार गहरे समाया हुआ है. यानी पैसा तो पूरा ख़र्च हुआ बता दिया जाता है, पर काम अधूरा या अधमरा-सा ही रह जाता है.</p><p>कौन नहीं जानता कि ठेकेदारों और नेताओं को फ़ण्ड-लूट का गुण सिखाने वाले अफ़सरान आँकड़ों की धूल झोंकने में कितने माहिर होते हैं? </p><p>ख़ासकर भूमिगत नालों/चेम्बरों के निर्माण और कचरों की सफ़ाई के निमित्त आवंटित धनराशि में से अधिकांश को उड़ा/छिपा लेना आसान होता है. बाढ़ में सब कुछ बह जाने जैसा ! </p><h1>डूबता हुआ-सा कोई शहर</h1><p>वैसे, एक-दो दिन की बारिश वाला जलजमाव कुछ घंटों में ख़त्म हो कर बेईमान मैनेजरों को जनाक्रोश से बचा लेता है.</p><p>लेकिन मामला तब फँस जाता है, जब चार-पाँच दिनों तक लगातार भारी वर्षा और अवरुद्ध जलनिकासी की वजह से डूबता हुआ-सा कोई नगर या क़स्बा त्राहि माम करने लगता है.</p><p>ऐसी सूरत में ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त बताने वाले सरकारी दावे का खोखलापन या झूठ ऐसी पोल खोल बारिश के आगे छिप नहीं पाता है. इस बार पटना में यही हुआ. </p><p><a href="https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/2371918316469880/">https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/2371918316469880/</a></p><p>एक पूरी रात की भारी वर्षा और लगातार चार दिनों की हल्की बारिश से उत्पन्न जलभराव ने पूरे शहर को कचरा मिश्रित बदबूदार झील में तब्दील कर दिया.</p><p>इस अतिवृष्टि के बारे में स्थानीय मौसम विज्ञान विभाग ने लगभग एक सप्ताह पहले ही आगाह कर दिया था. </p><p>फिर भी इस बाबत राज्य सरकार की शिथिलता नहीं टूटी और कोई एहतियाती व्यवस्था नहीं की गयी.</p><h1>कोई एहतियाती व्यवस्था नहीं </h1><p>राज्य सरकार के नगर विकास विभाग, पटना नगर निगम और इनसे जुड़े नगर निकायों की घोर विफलता वाले असली चेहरे पहचान में आ गए.</p><p>यहाँ बताते चलें कि नगर विकास विभाग बिहार की सत्ता में साझीदार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कोटे में ही रहा है. </p><p>लगभग ग्यारह साल से यहाँ बीजेपी के ही नगर विकास मंत्री रहे हैं.</p><p><a href="https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/391331344870317/">https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/391331344870317/</a></p><p>इसलिए अगर पटना के नगर निगम को लोग ‘नरक निगम’ कहने लगे हैं, तो सवालों के घेरे में सिर्फ़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही नहीं, मुख्य रूप से बीजेपी भी आ जाती है.</p><p>हालांकि जब पटना की मौजूदा मुसीबत को नीतीश कुमार ने सिर्फ़ प्राकृतिक विपदा क़रार दे कर सरकारी विफलता पर परदा डाला, तो नाराज़ लोगों पर इसकी तीखी प्रतिक्रियाएँ हुईं.</p><p>ऐसी भी सख़्त टिप्पणी की गई कि जिस ‘नेचर’ को इस विपत्ति के लिए नीतीश ने ज़िम्मेवार ठहराया, उसी ने कुछ ज़्यादा बरस कर ड्रेनेज प्रबंधन के सरकारी झूठ का भाण्डा फोड़ दिया.</p><h1>नीतीश सरकार का प्रचार विभाग </h1><p>आरोप ये भी लग रहा है कि जलनिकासी का पोख़्ता बंदोबस्त करने में उतने कमीशन की गुंजाइश नहीं होती, इसलिए भारी कमीशन वाले भवन निर्माण पर इस सरकार का अधिक ज़ोर रहता है.</p><p>ज़ाहिर है कि पटना में जल-प्रलय जैसा संकट झेल रहे लोग काफ़ी रोष में हैं और हालात ने राज्य सरकार पर सवाल उठाने का मौक़ा दे दिया है.</p><p>पटनावासियों का यह प्रत्यक्ष अनुभव रहा है कि अपने आंतरिक कलह और भ्रष्टाचार को लेकर सुर्ख़ियों में रहने वाले इन महकमों के बूते समस्याएँ सुलझती नहीं, उलझती हैं.</p><p><a href="https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/429457247697862/">https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/429457247697862/</a></p><p>सबसे अधिक प्रभावित राजेंद्र नगर, कदमकुआँ और कंकड़बाग इलाक़ों में जनजीवन सामान्य होने में काफ़ी वक़्त लग सकता है. इसलिए वहाँ के बाशिंदे अधिक चिंतित हैं.</p><p>उधर नीतीश सरकार का प्रचार विभाग इसे क़ुदरत का क़हर बताने और सरकारी विफलता को झुठलाने में ज़ोर-शोर से जुटा है.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/BBCnewsHindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो सकते हैं.)</strong></p>

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