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संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से पहले दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन को लेकर प्रदर्शन

Updated at : 20 Sep 2019 6:07 PM (IST)
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संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से पहले दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन को लेकर प्रदर्शन

दिल्ली/कैनबरा : न्यू याॅर्क में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से पहले जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के कदम उठाने का आह्वान करते हुए दुनिया भर में हजारों जगह प्रदर्शन हुए. नयी दिल्ली में दर्जनों छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और एक रैली के दौरान आवास तथा शहरी मामलों के मंत्रालय के बाहर नारे […]

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दिल्ली/कैनबरा : न्यू याॅर्क में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से पहले जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के कदम उठाने का आह्वान करते हुए दुनिया भर में हजारों जगह प्रदर्शन हुए. नयी दिल्ली में दर्जनों छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और एक रैली के दौरान आवास तथा शहरी मामलों के मंत्रालय के बाहर नारे लगाये “जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई हो” और “हम साफ हवा में सांस लेना चाहते हैं.”

ऑस्ट्रेलिया में कई जगह शुक्रवार को हजारों प्रदर्शनकारी रैलियों में जमा हुए. ऐसी ही एक शुरुआती रैली ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर सिडनी और राष्ट्रीय राजधानी कैनबरा में हुई, जिसे वैश्विक जलवायु वैश्विक जलवायु हड़ताल नाम दिया गया. ऑस्ट्रेलिया में प्रदर्शनकारियों ने देश में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाने का आह्वान किया. उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा कोयला और तरल प्राकृतिक गैस का निर्यातक है. प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को वैश्विक जलवायु हड़ताल का आयोजन 110 कस्बों और शहरों में किया. इस दौरान सरकार और कारोबारियों से कहा गया कि वे 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को घटाकर शून्य करने के लक्ष्य को पूरा करने का वादा करें. ऐसी ही रैलियों का आयोजन शुक्रवार को दुनिया भर में करने की योजना है.

अमेरिका में शुक्रवार को 800 से अधिक आयोजन की तैयारी है. अनुमान है कि जर्मनी में 400 से अधिक रैलियां होंगी. ये प्रदर्शनकारी कुछ हद तक स्वीडन की किशोर पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग से प्रेरित हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से फ्राइडेज फॉर फ्यूचर के नाम से साप्ताहिक प्रदर्शन का आह्वान किया है. दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया के कार्यकारी प्रधानमंत्री माइकल मैककॉर्मैक ने कहा है कि छात्रों को विद्यालयों में होना चाहिए. उन्होंने कहा, इस तरह की रैलियां सप्ताहांत में आयोजित की जानी चाहिए, जब इससे किसी को बाधा नहीं पहुंचती है. इससे विद्यालय और विश्वविद्यालय बाधित नहीं होने चाहिए. थाईलैंड, हांगकांग और दुनिया के कई हिस्सों में भी हजारों लोगों ने जलवायु परिवर्तन के संबंध में प्रदर्शन किया.

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