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धार्मिक आज़ादी पर अमरीकी रिपोर्ट से भारत ख़फ़ा क्यों- ब्लॉग

Updated at : 24 Jun 2019 10:51 PM (IST)
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धार्मिक आज़ादी पर अमरीकी रिपोर्ट से भारत ख़फ़ा क्यों- ब्लॉग

<figure> <img alt="धार्मिक आज़ादी" src="https://c.files.bbci.co.uk/D0C1/production/_107514435_gettyimages-1052705346.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p> शुक्रवार को अमरीकी विदेश मंत्री ने विश्व में धार्मिक आज़ादी के बारे में वार्षिक रिपोर्ट जारी की. </p><p>चीन में शिंजियांग के वीगर मुसलमान समुदाय के साथ बीजिंग सरकार जो भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रही है या बर्मा में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ जो हो रहा […]

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<figure> <img alt="धार्मिक आज़ादी" src="https://c.files.bbci.co.uk/D0C1/production/_107514435_gettyimages-1052705346.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p> शुक्रवार को अमरीकी विदेश मंत्री ने विश्व में धार्मिक आज़ादी के बारे में वार्षिक रिपोर्ट जारी की. </p><p>चीन में शिंजियांग के वीगर मुसलमान समुदाय के साथ बीजिंग सरकार जो भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रही है या बर्मा में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ जो हो रहा है या ईरान में ग़ैर-मुस्लिम बिरादरियों का जीवन जितना कड़ा बनाया जा रहा है.</p><p>सऊदी अरब में जिस तरह एक हज़ार से अधिक शिया नागरिकों को सिर्फ़ प्रदर्शनों में भाग लेने या सोशल मीडिया पर कॉमेंट्स करने के जुर्म में क़ैद का सामना करना पड़ रहा है. </p><p>पाकिस्तान में ईसाई महिला आसिया बीबी की रिहाई के बावजूद 40 से अधिक लोगों को पैग़ंबर इस्लाम की तौहीन के आरोपों में लंबे समय से जिस तरह जेल में ठूंसा गया है. </p><p>उनकी कोई सुनने वाला नहीं या फिर भारत में गोरक्षकों के हाथों मुसलमानों और दलितों के ख़िलाफ़ हिंसात्मक घटनाएं घटी हैं और सरकार ने उनकी रोकथाम के लिए कोई ख़ास निर्णय नहीं लिए, इन सबका अमरीकी विदेश मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में ज़िक्र है.</p><figure> <img alt="वीगर मुसलमान" src="https://c.files.bbci.co.uk/130B1/production/_107510087_cac6c3fe-a814-4a21-b9ab-42b3c5d6f25c.jpg" height="351" width="624" /> <footer>AFP</footer> </figure><p>मगर जैसा कि ऐसी रिपोर्टों के साथ होता है, जितने देशों में धार्मिक आज़ादी पर रोक-टोक की बात की गई है उन तमाम देशों ने इस रिपोर्ट को एकतरफ़ा या मनगढ़ंत कहकर नकार दिया है. </p><p>या फिर ये कहा है कि किसी को हमारे अंदरूनी मामलों में टांग अड़ाने की ज़रूरत नहीं. हमारा अपना क़ानून है और संविधान में जितनी भी आज़ादियां हैं, वो सबको बराबर-बराबर मिली हुई है. लिहाज़ा शटअप.</p><p>मैं इस वक़्त 56 वर्ष का हो चला हूं और जब से होश संभाला है यही देखा है कि मानव अधिकार हों या धार्मिक, उनके बारे में भले संयुक्त राष्ट्र हो, एमनेस्टी इंटरनेशनल हो या किसी की भी रिपोर्ट, आज तक किसी देश की किसी नज़रिये की सरकार ने इन रिपोर्टों में की गई आलोचना के बारे में नहीं कहा कि भाई जी, बड़ी मेहरबानी, कि आपने फलां फलां कमी या मुद्दों की तरफ़ हमारी तवज्जो दिलाई. </p><p>हम देखेंगे कि हमसे मानवाधिकारों के हिसाब में कहां-कहां कमी-बेसी रह गई और हम इन ग़लतियों की छान-फटक करके इन्हें दूर करने की कोशिश करेंगे. आपकी तरफ़ से तवज्जो दिखाने का बहुत-बहुत धन्यवाद.</p><p>मगर हर देश अपने विरोधियों की तरफ़ उंगली उठाने के लिए इन्हीं रिपोर्टों को हथियार बनाता है. जैसे भारत भले कश्मीर में चल रही हिंसा के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में संयुक्त राष्ट्र या एमनेस्टी की रिपोर्ट को सफ़ेद झूठ बताए मगर उसी रिपोर्ट में अगर पाकिस्तान में मानवाधिकारों के बारे में कड़ी निंदा की गई हो तो भारत इसे 100 प्रतिशत सच्चा मानेगा और हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसका ज़िक्र करके मज़े भी लेगा.</p><p>यही हाल पाकिस्तान और अन्य देशों का भी है. यानी हम दूध के धुले और बाक़ी सब कीचड़ में लिथड़े. पर आईना पलटकर रख देने से क्या शक्ल भी अच्छी हो जाती है?</p><p>जाने ना जाने गुल ही ना जाने, बाग तो सारा जाने है.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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