हॉन्ग कॉन्गः प्रदर्शनकारियों पर रबर की गोलियां

Updated at : 12 Jun 2019 10:58 PM (IST)
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हॉन्ग कॉन्गः प्रदर्शनकारियों पर रबर की गोलियां

<figure> <img alt="प्रदर्शनकारी" src="https://c.files.bbci.co.uk/69C2/production/_107347072_mediaitem107347646.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><p>हॉन्ग कॉन्ग में प्रत्यर्पण क़ानून में संशोधन के ख़िलाफ़ हज़ारों की तादाद में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हिंसक संघर्ष हुआ है. </p><p>पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया और आंसु गैस के गोले छोड़े. </p><p>पुलिस ने […]

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<figure> <img alt="प्रदर्शनकारी" src="https://c.files.bbci.co.uk/69C2/production/_107347072_mediaitem107347646.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><p>हॉन्ग कॉन्ग में प्रत्यर्पण क़ानून में संशोधन के ख़िलाफ़ हज़ारों की तादाद में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हिंसक संघर्ष हुआ है. </p><p>पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया और आंसु गैस के गोले छोड़े. </p><p>पुलिस ने इस विरोधप्रदर्शन को दंगा करार देते हुए कहा है कि उनके पास बल प्रयोग के अलावा और कोई विकल्प नहीं था. </p><p>बुधवार की सुबह चेहरा ढंके हुए हॉन्ग कॉन्ग में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को जाने वाली मुख्य सड़कों को जाम कर दिया और सरकारी इमारतों को घेरना शुरू कर दिया. </p><figure> <img alt="प्रदर्शनकारी" src="https://c.files.bbci.co.uk/EA1E/production/_107343995_ab94fd02-510f-475a-84f7-e67cef2b1a9e.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p>घंटों तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उस ऐसेंबली में प्रवेश करने की कोशिश की, जहाँ प्रत्यर्पण कानून के प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी. प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेट तोड़ने की कोशिश की, छाते समेत कई तरह के सामान फेंकने शुरु किए. </p><p>इसके बाद उनकी पुलिस ने झड़प हुई. पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए रबड़ की गोलियां छोड़ी और आंसु गैस के गोले छोड़े.. </p><p>हिंसक झड़पों के बाद लेजिस्लेटिव काउंसिल में प्रत्यर्पण क़ानून पर दोबारा चर्चा नहीं हो पाई. </p><p>यह भी पढ़ें | <a href="https://www.bbc.com/hindi/international-48593881?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">चीन के ख़िलाफ़ सड़क पर क्यों हैं हॉन्गकॉन्ग के लाखों लोग </a></p><figure> <img alt="प्रदर्शनकारी" src="https://c.files.bbci.co.uk/1021A/production/_107347066_4b5d26a6-a7d3-451d-b92d-a0dbeb148e97.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>हॉन्ग कॉन्ग के पुलिस प्रमुख स्टीफन लो ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने के अलावा उनके पास और कोई विकल्प नहीं था. </p><p>पुलिस ने एक बयान में कहा,’ये तरीक़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन से परे जा चुका है. हमने कहा है कि वे तुरंत चले जाएं, वरना हमें उन्हें बलपूर्वक हटाना पड़ेगा.’ </p><p>सरकार के नए प्रत्यर्पण क़ानून के मुताबिक़ अपराधियों पर मुक़दमा चलाने के लिए उन्हें चीन भेजा जाना होगा. </p><p>सरकार ने कहा है कि व्यापक विरोध के बावजूद वो इस विधेयक को आगे बढ़ाएगी. उधर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गैंग सुआंग ने कहा कि वो इस बिल के समर्थन में हैं.</p><p>उन्होंने कहा कि चीन की सरकार हॉन्ग कॉन्ग को समर्थन देती रहेगी ताकि वो प्रत्यर्पण क़ानून में संशोधन कर सकें.</p><p>प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बीते रविवार को 10 लाख लोगों ने सड़कों पर उतरकर इस क़ानून का विरोध किया था. </p><p>स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक 20 जून को चीन समर्थक लेजिस्लेटिव काउंसिल की बैठक होनी है जिसमें इस क़ानून के पास होने की उम्मीद है. </p> <ul> <li>यह भी पढ़ें | <a href="https://www.bbc.com/hindi/international-48264381?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ट्रेड वॉर: अमरीका या चीन किसका ज़्यादा नुकसान?</a></li> <li>यह भी पढ़ें | <a href="https://www.bbc.com/hindi/vert-earth-45033082?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">हॉन्गकॉन्ग क्यों बना लुप्तप्राय जानवरों का ठिकाना</a></li> </ul><figure> <img alt="प्रदर्शनकारी" src="https://c.files.bbci.co.uk/1491E/production/_107345248_f73cc25f-7c2e-4280-bc0c-ebcff28008f7.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><p>आलोचकों का कहना है कि चीन की न्यायिक व्यवस्था में कथित तौर पर टॉर्चर का इस्तेमाल, मनमाने तरीक़े से बंदी बनाए रखना और ज़बरदस्ती अपराध को क़बूल करवाना आम बात है. </p><p>एंड्रयू लियुंग लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य रह चुके हैं, वो कहते हैं कि हॉन्ग कॉन्ग के प्रशासनिक मुखिया के लिए ये कठिन चुनौती है.. </p><p>”हॉन्ग कॉन्ग के लोगों में भावनाएं उमड़ रही हैं. बहुत कम लोगों को चीन के कानून पर भरोसा है. दूसरी ओर हॉन्ग कॉन्ग के प्रशासनिक मुखिया के सामने आम जनता और चीन की चिंता के बीच सामंजस्य बनाने की चुनौती है. बीजिंग की सबसे बड़ी चिंता ये है कि हॉन्ग कॉन्ग भगोड़े अपराधियों के लिए स्वर्ग बनता जा रहा है.” </p><p>हालांकि हॉन्ग कॉन्ग के प्रशासनिक मुखिया का कहना है कि नया प्रत्यर्पण क़ानून सिर्फ़ उन्हीं पर लागू होगा जो फ़रार हैं और गंभीर अपराध में संलिप्त हैं. </p><p>सरकार का कहना है कि ये संशोधन जल्द से जल्द पारित नहीं होते हैं तो हॉन्ग कॉन्ग के लोगों की सुरक्षा ख़तरे में पड़ जाएगी और शहर अपराधियों का अड्डा बन जाएगा.</p><p>सरकार का कहना है कि प्रत्यर्पण की कार्रवाई करने से पहले यह भी देखा जाएगा कि हॉन्ग कॉन्ग और चीन दोनों के क़ानूनों में अपराध की व्याख्या है या नहीं.</p><p>अधिकारियों का यह भी कहना है कि बोलने और प्रदर्शन करने की आज़ादी से जुड़े मामलों में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a 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