शरद पवार की एनसीपी का अस्तित्व संकट में: नज़रिया

Updated at : 12 Jun 2019 10:58 PM (IST)
विज्ञापन
शरद पवार की एनसीपी का अस्तित्व संकट में: नज़रिया

<figure> <img alt="शरद पवार" src="https://c.files.bbci.co.uk/095A/production/_107349320_d1109927-a7dc-498a-a8a6-1b1ce427c8e8.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का भविष्य क्या होगा, इस पर हम चर्चा करें तो यह सवाल ‘बीस साल बाद’ नाम की फ़िल्म के रहस्य की तरह लगता है.</p><p>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की अब तक की प्रगति का रहस्य क्या है यह भी एक राज़ ही है. </p><p>लगभग […]

विज्ञापन

<figure> <img alt="शरद पवार" src="https://c.files.bbci.co.uk/095A/production/_107349320_d1109927-a7dc-498a-a8a6-1b1ce427c8e8.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का भविष्य क्या होगा, इस पर हम चर्चा करें तो यह सवाल ‘बीस साल बाद’ नाम की फ़िल्म के रहस्य की तरह लगता है.</p><p>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की अब तक की प्रगति का रहस्य क्या है यह भी एक राज़ ही है. </p><p>लगभग 20 वर्ष पूर्व कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर जो संघर्ष हुआ उसमे शरद पवार ने मेघालय के कांग्रेसी नेता पीए संगमा और बिहार के तारिक अनवर के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया था. उनमें से पवार और संगमा के रास्ते 2004 मे ही अलग हो गए थे.</p><p>संगमा ने मेघालय में नेशनल पीपल्स पार्टी प्रादेशिक पक्ष की स्थापना की और तारिक अनवर हाल ही मे 2018 के दौरान कांग्रेस मे लौट आए.</p><p>इसके बावजूद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गोवा, गुजरात जैसे अन्य स्थानों पर उम्मीदवारों उतारती है और लक्षद्वीप से पार्टी का सांसद भी चुना जाता है. मगर यह सब बाद की बात है. </p><p>1999 में जब इस पार्टी का गठन हुआ था तब उन्हें अपने आपसे बहुत उम्मीदें थीं. उस समय कांग्रेस के बुरे दौर का क़रीब एक दशक हो चुका था और इन तीनों को उम्मीद थी कि कांग्रेस में से कई अन्य लोग इनका समर्थन करेंगे. </p><p>इसके अलावा एक धारणा यह भी थी कि जब किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा तो तब यह पार्टी अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. </p><p>मगर न तो कांग्रेस से कोई समर्थन मिला और ना ही राष्ट्रीय राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाने का कोई मौक़ा मिला. भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को 1999 में बहुमत मिला था. </p><figure> <img alt="शरद पवार" src="https://c.files.bbci.co.uk/577A/production/_107349322_0ae4a8ec-6778-44b2-bc9c-345dc5d34477.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अपने गठन के तुरंत बाद महाराष्ट्र में उस समय की परिस्थिति के अनुसार कांग्रेस से समझौता किया था. बीच-बीच में होने वाली नोकझोंक के बावजूद यह गठबंधन अभी अस्तित्व में है. आज जब पार्टी अपने-अपने इतिहास के 20 साल पूरे कर रही है तब इस पार्टी को अपना मूल्यांकन करना आवश्यक है.</p><p>बीच-बीच में ऐसी ख़बर आती है कि इस पार्टी का कांग्रेस में ही विलय होगा. हाल ही में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह हार और राहुल-पवार की मुलाकात के बाद इस तरह की ख़बरें आईं और फिर उन्हें नकारा भी गया.</p><h1>राष्ट्रवादी ने क्या कर दिखाया ?</h1><p>पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और अब उधर की कांग्रेस लगभग ख़त्म हो चुकी है और तृणमूल कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी बन गई है. </p><p>आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी ने अलग पार्टी की स्थापना की और उधर भी कांग्रेस अब लगभग ख़त्म हो चुकी है. लेकिन इस तरह का करिश्मा महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नहीं कर सकी.</p><p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48531383?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">राज ठाकरे का एनसीपी-कांग्रेस के साथ जाना क्या आख़िरी विकल्प?</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48432092?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">महाराष्ट्र: कांग्रेस के पंजे में दोबारा जान आएगी?</a></p><figure> <img alt="ममता बनर्जी" src="https://c.files.bbci.co.uk/A59A/production/_107349324_4961adbc-7f8b-49c0-aff2-0ea03ac60db2.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>हम किस तरह की राजनीति कर रहे हैं? भविष्य में हमारी राजनीति की दिशा क्या होगी? इस तरह के सवाल राष्ट्रवादी कांग्रेस को ज़रूर सताते होंगे. </p><p>उसी प्रकार कई बार इस तरह की चर्चा होती है कि यह पार्टी भाजपा के साथ न जाते हुए भी भाजपा के साथ रहेगी. पिछले विधानसभा चुनाव के बाद जब शिव सेना कुछ असमंजस में थी तब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने भाजपा का समर्थन करने की इच्छा दिखाई थी. </p><p>अब यह रास्ता भी बंद हो चुका है क्योंकि मोदी को ना तो पवार के सलाह की ज़रूरत है और ना ही उनके चार/पांच सांसदों के मतों की.</p><p>एक ओर भाजपा-शिवसेना का गठबंधन महाराष्ट्र में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और दूसरी ओर केंद्र में मिली हुई जीत की वजह से भाजपा सातवें आसमान पर है. </p><p>इसलिए भाजपा राष्ट्रवादी कांग्रेस को घास डालेगी ऐसा लगता नहीं. इसका मतलब अपना ख़ुद का अलग चूल्हा जलाने के सिवाय एनसीपी के पास कोई विकल्प नहीं है.</p><p>पिछले 20 वर्षों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र में 1999 का पहला चुनाव अकेले लड़ा था और 2014 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी अकेले ही लड़ी थी. मगर अकेले लड़ो या गठबंधन में, पार्टी की ताक़त शुरुआत से जैसी थी वैसी ही रही है बल्कि कम हुई है. </p><p>अपने शुरुआती दौर में पार्टी ने 20 प्रतिशत का आंकड़ा पार किया था अब तो वह भी मुमकिन नहीं लगता.</p><p>पार्टी की इस अवस्था को देखते हुए दो प्रश्न ध्यान में आते हैं, एक यह कि पार्टी ने इतने सालों में क्या कमाया? और दूसरा कि पार्टी का भविष्य क्या है?</p><h1>पार्टी ने क्या कमाया?</h1><p>बीते 20 वर्षों में भारत की राजनीति बेहद जटिल हो गई है. भाजपा और कांग्रेस के नेतृत्व में अलग-अलग मोर्चों की स्थापना के साथ ही साथ अनेक नए छोटे दल भी अस्तित्व में आए हैं. </p><p>बस यह एक श्रेय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को जाएगा कि इस तरह के माहौल में भी पार्टी का अस्तित्व बचा रहा.</p><figure> <img alt="एनसीपी" src="https://c.files.bbci.co.uk/EB9B/production/_107351306_46ef1558-3e96-4f0f-b135-ba202e8c4826.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>बेशक यह कोई नई पार्टी नहीं थी. कांग्रेस में पवार समर्थक जो लोग थे उन्हीं के दम पर यह पार्टी अस्तित्व में आई थी. इसलिए उनके पास स्थानिक राजनीतिक संस्थान थे, साधन थे और कार्यकर्ता भी थे. इसलिए नई पार्टी के रूप में जो चुनौतियां आती हैं वह इस पार्टी को कभी नहीं आई.</p><p>अपने राजनीतिक कौशल के कारण यह पार्टी जल्द ही सत्ताधारी पार्टी बन गई. इस वजह से पार्टी को टिके रहने में मदद मिली, लेकिन पार्टी का विकास हो ना सका, यह भी विचार करने की बात है. </p><p>पवार के नेतृत्व के कारण अपने शुरुआती दौर से ही पार्टी कार्यकर्ता बेहद सक्रिय रहे और युवा कार्यकर्ता भी बड़े पैमाने पर बने रहे. </p><p>ख़ासतौर पर छोटे शहरों में वे युवा जो छोटा-मोटा व्यवसाय करते थे वे इस पार्टी की ओर आकर्षित हुए. शरद पवार ख़ुद महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. </p><p>पवार के ही कारण राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण जगह है. इसलिए पार्टी के राज्य के समर्थक हमेशा उत्साहित रहते हैं और उन्हें आशा रहती है कि उनकी पार्टी का कद बढ़ेगा. संसाधनों की कमी का सामना पार्टी को कभी नहीं करना पड़ा.</p><p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48487162?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कांग्रेस के लिए मोदी मंत्र की काट खोज पाएंगी सोनिया गांधी?</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48345631?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ईवीएम-वीवीपैट मुद्दे पर विपक्ष मिलेगा चुनाव आयोग से</a></p><figure> <img alt="छगन भुजबल" src="https://c.files.bbci.co.uk/139BB/production/_107351308_cf5fd875-e8a4-4ab6-bd48-7f118ce88bd7.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>एक ख़ास बात यह है कि पवार केंद्रित पार्टी में शरद पवार, अजित पवार और सुप्रिया सुले के प्रभुत्व होने के बावजूद दूसरी बेंच के नेता मौजूद हैं. </p><p>इन्हें यहां नेता कहने का यह भी एक कारण है कि इसमें से अनेक लोगों की अपनी अपनी महत्वाकांक्षा भी है और साथ ही साथ अपने गांव अपने शहर के बाहर भी राजनीति करनी चाहिए इस बात का अहसास भी इन नेताओं को है. इसीलिए उनमें से कई का प्रभाव ख़ुद के शहर, जिलों के बाहर बढ़ता गया.</p><p>एक दौर में छगन भुजबल राज्य इकाई के बड़े नेता बन गए थे. इनके बाद आरआर पाटिल, जयंत पाटिल जैसे नेता आए और अब तटकरे, धनंजय मुंडे, जितेंद्र आव्हाड जैसे नेता बड़े होते दिखाई दे रहे हैं.</p><p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-47716692?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">शरद पवार को ‘सबसे भ्रष्ट’ नेता किसने बनाया?</a></p><p>अगर हम भारत भर में देखें तो उत्तर से दक्षिण तक लालू-मुलायम या चंद्राबाबू की पार्टी में या फिर पूर्वी हिस्से में बीजू जनता दल में ऐसा बहुत कम दिखाई देता है कि नेताओं की दूसरी, तीसरी बेंच मौजूद हो. यह सभी दल ज्यादातर एक ही नेता या एक ही परिवार के आसपास घूमते हैं. </p><p>लेकिन अपने परिवार के साथ-साथ पार्टी में नए नेताओं की फौज़ खड़ी करना यह राष्ट्रवादी कांग्रेस की सकारात्मक पक्ष है. देखा जाए तो एक ओर परिवार केंद्रित राजनीति और दूसरी ओर यशवंत राव चव्हाण की अगुआई वाली केंद्र की राजनीति- ऐसे दो अलग प्रभावों के बीच पार्टी आगे बढ़ी है. </p><figure> <img alt="पवार और सोनिया" src="https://c.files.bbci.co.uk/0523/production/_107351310_340bf803-6f15-4b05-82a7-046d25219b8b.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p><strong>राष्ट्रवादी </strong><strong>कांग्रेस पार्टी </strong><strong>का आगे क्या होगा?</strong></p><p>यह पार्टी के अस्तित्व का और भविष्य का सवाल है. इस पार्टी का गठन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुए मतभेद के चलते हुआ था. यह बात अनेक बार शरद पवार ख़ुद कह चुके हैं. वरना नीतियों, दृष्टि और विचारधारा की अगर सोचें तो इस बारे में एनसीपी और कांग्रेस इनमें कोई फ़र्क़ नजर नहीं आता. </p><p>महाराष्ट्र में या देश में इस पार्टी को अपनी अलग पहचान क्यों बनानी नहीं आई, यह समझने के लिए ये बात महत्वपूर्ण है. महाराष्ट्र में आंशिक तौर पर प्रादेशिक अस्मिता की भूमिका राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी लेती है. </p><p>लेकिन वह भी बहुत ज्यादा आक्रामक तरीका नहीं अपनाती. इसलिए उसे केवल एक क्षेत्रीय पार्टी समझना मुश्किल है. राष्ट्रीय राजनीति मे अपनी जगह बनाने के लिए पार्टी को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा कि वे कांग्रेस से अलग कैसे हैं.</p><p>अगर कांग्रेस के साथ पार्टी का विलय हुआ, तो महाराष्ट्र के स्तर पर आगे जाने वाले नेताओ की राजनीति बिगड़ जाती है. इसी वजह से पार्टी की खींचतान होती रहेगी. </p><p>पार्टी अगर अलग रहेगी तो प्रदेश में अनेक नेताओं की महत्वाकांक्षा पूरी हो सकती है. लेकिन अलग रहकर भी पार्टी मे कोई ख़ास चीज़ ना होने के कारण कांग्रेस जैसी पार्टी की तुलना में शिवसेना जैसी पार्टी आगे निकल जाती है इसमें कोई अचरज की बात नही.</p><p>20 साल बाद अपना अस्तित्व कायम रखने वाली पार्टी को अलग तरह की राजनीति न होने पर चिंता करने की ज़रूरत है. </p><p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48324931?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ममता के भतीजे ने मोदी को भेजा मानहानि का नोटिस</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48389283?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">नरेंद्र मोदी बोले- ‘बदइरादे और बदनीयत से कोई काम नहीं करूंगा'</a></p><figure> <img alt="सुप्रिया सुले" src="https://c.files.bbci.co.uk/5343/production/_107351312_51722b31-e009-4c48-ad3f-fac8619ab032.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>फ़िलहाल तो एनसीपी की पहचान महाराष्ट्र में कांग्रेस को ख़त्म करने और उसकी जगह लेने में असफल रही पार्टी और ख़ुद की अलग पहचान बनाने मे नाकाम रही पार्टी की है.</p><p>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">क्लिक</a> कर सकते हैं. आप हमें <a href="https://www.facebook.com/BBCnewsHindi">फ़ेसबुक</a>, <a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a>, <a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a> और <a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</p>

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola