एक प्रधानमंत्री, जिसका चुनाव हाइकोर्ट ने कर दिया था निरस्त
Author Prabhat khabar digital desk
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इंदिरा गांधी 1971 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से जीती थीं. उनसे हारे संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राजनारायण ने परिणाम को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी कि इंदिरा ने सरकारी मशीनरी और संसाधनों का दुरुपयोग किया है. 12 जून, 1975 को जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने राजनारायण की याचिका में उठाये सात मुद्दों में […]
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इंदिरा गांधी 1971 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से जीती थीं. उनसे हारे संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राजनारायण ने परिणाम को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी कि इंदिरा ने सरकारी मशीनरी और संसाधनों का दुरुपयोग किया है. 12 जून, 1975 को जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने राजनारायण की याचिका में उठाये सात मुद्दों में से पांच में इंदिरा को राहत दी, लेकिन दो में दोषी पाया.
जस्टिस सिन्हा ने आदेश में लिखा कि इंदिरा ने चुनाव में भारत सरकार के अधिकारियों और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया है. इस आधार पर हाइकोर्ट ने इंदिरा का चुनाव निरस्त कर दिया. जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत छह साल तक इंदिरा को चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहरा दिया. यह दुनिया में पहला मौका था, जब किसी हाइकोर्ट ने किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसा फैसला सुनाया हो.
इंदिरा की ओर से 22 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट में अपील की गयी. 24 जून, 1975 को सुप्रीम कोटे ने हाइकोर्ट के फैसले पर आंशिक स्थगन आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि इंदिरा संसद की कार्यवाही में भाग ले सकती हैं, लेकिन वोट नहीं कर सकतीं. 25 जून को दिल्ली में जयप्रकाश नारायण की रैली हुई. रैली के बाद आधी रात को देश में आपातकाल लगा दिया गया.
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