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OIC की बैठक में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा, कहा हम शांति चाहते हैं

Updated at : 01 Mar 2019 12:09 PM (IST)
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OIC की बैठक में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा, कहा हम शांति चाहते हैं

अबु धाबी : विदेश मंत्री सुषमा स्वराज आज अबुधाबी में होने वाली ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया और उन्होंने अपने संबोधन में आतंकवाद का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है.जहां इंसानियत को सर्वोपरि माना जाता है. हम यह मानते हैं कि संस्कृति […]

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अबु धाबी : विदेश मंत्री सुषमा स्वराज आज अबुधाबी में होने वाली ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया और उन्होंने अपने संबोधन में आतंकवाद का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है.जहां इंसानियत को सर्वोपरि माना जाता है. हम यह मानते हैं कि संस्कृति का संस्कृति से मिलाप होना चाहिए.

दुनिया का कोई भी धर्म हिंसा को बढ़ावा नहीं देता. इस्लाम, हिंदू या विश्व के किसी भी अन्य धर्म में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है. मैं महात्मा गांधी के देश से हूं जिनकी हर प्रार्थना शांति की कामना से खत्म होती थी, इसलिए हम अपने देश और क्षेत्र में शांति चाहते हैं. हमारे पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने भी कहा था कि जब देश में शांति होती है तो विश्व में शांति होती है और विश्व तरक्की करता है. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच उत्पन्न तनाव की पृष्ठभूमि में इस बैठक में हिस्सा ले रही हैं. हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस बैठक का बहिष्कार किया है.

सुषमा स्वराज ने कहा कि यह महामारी ‘धर्म को तोड़मरोड़ कर पेश करने और भ्रमित आस्था’ के कारण पनपती है. इस दो दिवसीय बैठक के उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुई स्वराज ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा हो भी नहीं सकता.’ स्वराज ने अपने संबोधन में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया. 57 सदस्यीय इस्लामिक समूह की बैठक में स्वराज ने कहा, ‘‘जैसे की इस्लाम का मतलब अमन है और अल्लाह के 99 नामों में से किसी का मतलब हिंसा नहीं है.

इसी तरह दुनिया के सभी धर्म शांति, करुणा और भाईचारे का संदेश देते हैं.’ स्वराज जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच उत्पन्न तनाव की पृष्ठभूमि में इस बैठक में हिस्सा ले रही हैं. जैश-ए-मोहम्मद द्वारा 14 फरवरी को किए गए इस आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे. भारत को 57 इस्लामिक देशों के समूह ने पहली बार अपनी बैठक में आमंत्रित किया है. स्वराज को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी ने शुक्रवार को कहा कि वह बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि समूह ने स्वराज को भेजा गया न्योता रद्द नहीं किया है. कुरैशी ने गुरुवार को कहा था, ओआईसी हमार घर है इसलिए वह वहां जाएंगे, लेकिन स्वराज के साथ कोई बातचीत नहीं होगी, लेकिन आज कुरैशी ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया. प्रमुख मुस्लिम देशों के नेताओं से स्वराज ने कहा, ‘‘आतंकवाद और चरमपंथ के नाम अलग-अलग हैं. वे विभिन्न कारणों का हवाला देते हैं. लेकिन अपने मंसूबों में कामयाब होने के लिए वे धर्म को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं और भ्रमित आस्थाओं से प्रेरित होते हैं .’

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