गुलमर्ग में मनाएं क्रिसमस की छुट्टियां

Updated at : 16 Dec 2018 7:52 AM (IST)
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गुलमर्ग में मनाएं क्रिसमस की छुट्टियां

डॉ कायनात काजी सोलो ट्रेवेलर दिसंबर की सर्द हवाओं के साथ आता है मौसम विंटर वकेशंस का. जब घर में भी रजाई से निकलने का दिल नहीं करता, वहीं कुछ मतवाले निकल पड़ते हैं ऐसे हॉलिडे पर, जो उन्हें पूरी जिंदगी याद रहनेवाला बन जाता है. कैसा लगे अगर आप इस साल क्रिसमस मनायें स्विट्जरलैंड […]

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डॉ कायनात काजी
सोलो ट्रेवेलर
दिसंबर की सर्द हवाओं के साथ आता है मौसम विंटर वकेशंस का. जब घर में भी रजाई से निकलने का दिल नहीं करता, वहीं कुछ मतवाले निकल पड़ते हैं ऐसे हॉलिडे पर, जो उन्हें पूरी जिंदगी याद रहनेवाला बन जाता है. कैसा लगे अगर आप इस साल क्रिसमस मनायें स्विट्जरलैंड में, वह भी बिना वहां जाये? मैं इस बार लिए चलती हूं एक ऐसे चर्च में, जो भारत में सबसे ऊंचाई पर होने का दावा करता है. यह चर्च 8,530 फीट की ऊंचाई पर स्थित है.
जबरवान पर्वत के दामन में बसे सब्ज हरे घास के मैदान मौसम की पहली बर्फबारी के साथ सफेद दुशाले से ढकने लगते हैं और क्रिसमस आते-आते यहां हर तरफ बर्फ ही बर्फ दिखाने लगती है. गुलमर्ग का 18 होल वाला भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित गोल्फ कोर्स भी बर्फ तले अगले कुछ महीनों के लिए मानो बर्फ की मोटी चादर तान सो जाता है.
वहीं उससे लगा 108 साल पुराना सेंट मैरी चर्च अपनी रोशनियों के साथ जाग उठता है. और क्यों न हो, सैंटा क्लाज का इंतजार तो वादी-ए-कश्मीर में भी पूरे उत्साह से किया जाता है. बर्फ के ऊंचे-ऊंचे टीलों के बीच पूरी शान से खड़ा यह चर्च क्रिसमस पर रोशनियों में नहा जाता है.
मजे की बात यह है कि इस चर्च में क्रिसमस मानाने सिर्फ ईसाई लोग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में मुस्लिम और अन्य धर्मों के लोग भी आते हैं. आधी रात से चर्च में मास शुरू हो जाता है. लोग मोमबत्तियां जलाते हैं.
सैंटा क्लाज बच्चों को गिफ्ट बांटते हैं. प्रार्थनाओं का सिलसिला सुबह होने तक चलता है. सुबह जगमगाते सूरज की रोशनी से जहान रोशन होता है. सफेद मखमली बर्फ पर पड़ती सूरज की चमकीली किरणें इस नजारे को इतना दिलफरेब बना देती हैं कि आपको स्विट्जरलैंड में होने का आभास होता है. यहां क्रिसमस का इंतजार पूरे सालभर किया जाता है.
गुलमर्ग में हर बजट के होटल व गेस्टहाउस मौजूद हैं, लेकिन सब पहले से ही बुक हो जाते हैं. सब के चेहरे खिल उठते हैं. पानी वाले, स्लेज खींचनेवाले, गरमा-गरम चाय बेचनेवाले और किराये पर स्नो बूट्स और जैकेट देनेवाले सब खुशी-खुशी सैलानियों का स्वागत करते हैं. कश्मीरी बड़े ही मेहमाननवाज लोग होते हैं.
इस चर्च में क्रिसमस मनाने लोग दूर-दूर से आते हैं. कहते हैं न कि सैंटा खुशियां लाते हैं. यह बात यहां आकर सच जान पड़ती है. क्यूंकि क्रिसमस के साथ ही गुलमर्ग में आगाज होता है स्नो फेस्टिवल का. दुनियाभर से स्कीइंग के शौकीन जबरवान पर्वत के ढलानों पर स्कीइंग करने अपने साजो-सामान के साथ खिंचे चले आते हैं.
गुलमर्ग में क्रिसमस मनाने के लिए बड़े प्रबंध किये जाते हैं. गुलमर्ग का गंडोला जो कि 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इस गंडोले को देश के सबसे ऊंचाई वाले गंडोले का खिताब मिला हुआ है. क्रिसमस के लिए रोशनियों से सजाया जाता है. सैलानियों के लिए क्रिसमस पर इस गंडोले की सवारी करना किसी रस्म जैसा होता है, जिसके बिना गुलमर्ग की यात्रा अधूरी मानी जाती है.
गुलमर्ग में जहां विदेशी सैलानियों के लिए स्कीइंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स दिल को लुभाते हैं, वहीं हिंदुस्तानियों को बर्फ में खेलना, स्नो मैन बनाना या फिर स्लेज पर सैर करना बेहद आकर्षित करता है. अगर आप भी यहां के एडवेंचर से दो-दो हाथ करना चाहते हैं, तो एक राउंड स्नो स्कूटर की लगा आइये. चर्च से नीचे जानेवाले ढलान की गहराई 300 फीट मानी जाती है.
चारों तरफ सफेद बर्फ के बीच स्कूटर की तेज रफ्तार आपको रोमांच से भर देगी. सुरक्षा की फिक्र न करें आपके स्कूटर पर आपका सारथी एक ट्रैंड स्नो स्कूटर ड्राइवर होता है. स्थानीय प्रशासन और जम्मू-कश्मीर टूरिज्म द्वारा सैलानियों की सुरक्षा और सुविधा का यहां खास ख्याल रखा जाता है.
गुलमर्ग जितना दिलफरेब है, उससे कहीं ज्यादा यहां तक पहुंचने का रास्ता हसीन है. श्रीनगर से मात्र 50 किमी दूर स्थित यह हिल स्टेशन पहुंचने की आसानी के नजरिये से बहुत उत्तम माना जाता है. श्रीनगर से टैक्सी से गुलमर्ग सिर्फ डेढ़ घंटे में पहुंचा जा सकता है.
अगर स्नोफॉल हुआ है, तो टंगमर्ग से गाड़ी बदलनी होती है. तंगमर्ग से आगे विशेष प्रकार की टैक्सी, जिनके टायरों पर जंजीरें बंधी होती हैं, लेनी पड़ती है. टंगमर्ग से आगे रास्ता पहाड़ पर चढ़ने लगता है, जिसके एक तरफ खाई है, तो दूसरी तरफ पाइन के ऊंचे-ऊंचे पेड़ों के जंगल हैं.
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