हॉकी वर्ल्ड कपः टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में पाकिस्तानी तड़का

Updated at : 08 Dec 2018 1:56 PM (IST)
विज्ञापन
हॉकी वर्ल्ड कपः टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में पाकिस्तानी तड़का

टीम में उनके चयन को लेकर शक़ ज़ाहिर किया गया था, सवाल उठ रहे थे कि क्या ये नए खिलाड़ी 2018 हॉकी विश्व कप के दबाव को झेल पाएंगे और टीम को आगे ले जा पाएंगे. लेकिन पहले दो पूल मैचों में दक्षिण अफ़्रीका और बेल्जियम के ख़िलाफ़ भारतीय टीम के युवा खिलाड़ी अपना अलग […]

विज्ञापन

टीम में उनके चयन को लेकर शक़ ज़ाहिर किया गया था, सवाल उठ रहे थे कि क्या ये नए खिलाड़ी 2018 हॉकी विश्व कप के दबाव को झेल पाएंगे और टीम को आगे ले जा पाएंगे.

लेकिन पहले दो पूल मैचों में दक्षिण अफ़्रीका और बेल्जियम के ख़िलाफ़ भारतीय टीम के युवा खिलाड़ी अपना अलग रंग दिखाने में कामयाब रहे हैं. वास्तव में इन युवाओं का प्रदर्शन ही सबसे अलग चमका है.

जब बात युवाओं की होती है तो दबाव और अनुभवहीनता की बात की जाती है लेकिन कई बार यही फ़ायदेमंद भी साबित हो जाता है. भारत में मामले में तो कम से कम अभी तक ये बाद फ़ायदेमंद ही साबित हुई है.

इनमें से सात खिलाड़ी 2016 में जूनियर विश्व कप जीतने के बाद से साथ हैं और कुछ तो स्कूल के दिनों से ही साथ खेल रहे हैं. यानी इस टीम में आपसी सौहार्द की कोई कमी नहीं है.

भारत ने जब दो साल पहले लखनऊ में जूनियर कप जीता था तब वरुण कुमार, सिमरनजीत सिंह, कृष्ण पाठक, सुमित, हरमनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह और नीलकांता शर्मा टीम के हिस्सा थे और ये सब खिलाड़ी तभी से एक दूसरे को बेहद क़रीब से जानते हैं.

डिफ़ेंडर और ड्रैग फ्लिकर वरुण कहते हैं, "हम जब वापस अपने कमरों में लौटते हैं तो पाकिस्तानी ड्रामे और सीरीज़ देखते हैं. ये पंजाबी में होते हैं और हमें बहुत रोचक लगते हैं. हमने कई डायलॉग याद कर लिए हैं और सही समय पर उनका इस्तेमाल भी करते हैं."

"जब कभी स्थिति तनावपूर्ण होती है या हम कमज़ोर महसूस कर रहे होते हैं तो माहौल को हल्का करने के लिए हम ये डायलॉग बोलते हैं." वरुण और उनके कई साथी खिलाड़ी जालंधर की सुरजीत हॉकी अकादमी से जुड़े रहे हैं.

तो फिर ये डायलॉग कैसे हैं?

"ईमानदारी से कहें तो ये बेमतलब होते हैं लेकिन हमें हंसने का मौक़ा दे देते हैं. उदाहरण के तौर पर पाकिस्तानी ड्रामे का एक डायलॉग है जिसमें एक पुरुष अक्सर दूसरे पर ताना मारता है कि अगर दिन में तुम्हारी शक्ल ख़राब लगे तो फिर प्यार करना मुश्किल हो जाता है. एक दूसरे डायलॉग में वो कहता है कि नवा खाता खुल गया. भले ही ये बेमतलब लगे लेकिन हमारे लिए ये माहौल को हल्का कर देते हैं."

गोलकीपर बातचीत में शामिल होते हुए कहते हैं, "हम बहुत लंबे समय से साथ हैं इसलिए सीनियर टीम में साथ आने पर भी हमें कुछ अलग सा नहीं लगता. एक टीम के तौर पर हम भले ही शरारती हों लेकिन हम अनुशासन और प्रशिक्षण को बहुत गंभीरता से लेते हैं."

चिकन पॉक्स से ठीक होकर वर्ल्ड कप शुरू होने से ठीक पहले टीम में लौटे पाठक चेहरे पर हंसी के साथ कहते हैं, "अगर बात मैदान के बाहर हो तो हम एक दूसरे की टांग खींचने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ते. जैसे जब कभी कोई वाक़ई में ख़राब कपड़े पहन लेता है तो हम कहते हैं कि इससे अच्छा उसके पास कुछ है ही नहीं. चने के झाड़ पर चढ़ा देते हैं हम."

सिमरनजीत सिंह कहते हैं कि खिलाड़ियों के बीच ये रिश्ता स्कूल के दिनों में ही शुरू हो गया था.

वो कहते हैं, "ज़्यादा लोग ये बात नहीं जानते लेकिन हममें से कुछ तो स्कूल के दिनों से ही साथ खेल रहे हैं. उस समय हममें से कोई भी पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं लेता था और हम बस खेलना चाहते थे. हम क्लास बंक करते, म्यूज़िक सीडी ख़रीदते और साथ में खेलते और डांस करते. यानी हमारे बीच जो रिश्ता बना वही अब तक चल रहा है."

विश्व नंबर तीन को हराते-हराते चूकी भारतीय टीम

भारतीय दुकानदारों को याद करते पाकिस्तानी खिलाड़ी

हॉकी विश्व कपः मुँह खोला तो लगेगा भारतीय खिलाड़ियों पर जुर्माना

"इसलिए ही अकादमी से हमारा निकलना, फिर जूनियर टीम में खेलना और अब भारत की सीनियर टीम का हिस्सा होना अपने आप होता गया. हां, ये सही है कि सीनियर स्तर पर हॉकी थोड़ी अलग हो जाती है, ये थोड़ी मुश्किल है और तकनीकी दक्षता की भी दरकार होती है."

"लेकिन एक चीज़ है जिस पर हमें कभी मेहनत नहीं करनी पड़ी है और वो है टीम का हिस्सा बन जाना क्योंकि हमारे उस रिश्ते ने चीज़ों को बहुत आसान कर दिया. विश्व कप का दबाव आप पर हावी हो सकता है और सीनियर लेवल पर खेलना भी बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है. लेकिन हम भाग्यशाली हैं कि हम एक दूसरे के साथ हैं और टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी भी हमारा बहुत ध्यान रखते हैं. हम एक दूसरे से अपने दिल की बात कर लेते हैं और अपनी सभी भावनाओं को साझा कर लेते हैं. ये बहुत ज़रूरी भी है क्योंकि कई बार हम बहुत अकेला महसूस करते हैं."

सिमरनजीत कहते हैं, "विश्वासपात्र होने से मदद मिलती है. मुझे लगता है कि यही वजह है कि हम इस विश्व कप के दबाव को सहन कर पा रहे हैं. और फिर दिन भी की थकान के बाद हमारे साथ पाकिस्तानी ड्रामे तो होते ही हैं."

आज भारत अपना अंतिम पूल मुक़ाबला कनाडा के ख़िलाफ़ खेलेगा. भारत अभी तक अपने पूल में सबसे ऊपर है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

]]>

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola