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तिब्बत में 15वें दलाई लामा की नियुक्ति में चीन की दखल का विरोध करेगा अमेरिका

Updated at : 06 Dec 2018 6:19 PM (IST)
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तिब्बत में 15वें दलाई लामा की नियुक्ति में चीन की दखल का विरोध करेगा अमेरिका

वॉशिंगटन : चीन तिब्बत में 15वें दलाई लामा के रूप में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करना चाहता है, जो बीजिंग के प्रति वफादार हो. इस बीच, अमेरिका ने यह संकेत भी दिया है कि अगर चीन तिब्बतियों पर अपने मनोनुकूल व्यक्ति को दलाई लामा बनाकर थोपने का प्रयास करता है, तो वह इसका विरोध करेगा. […]

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वॉशिंगटन : चीन तिब्बत में 15वें दलाई लामा के रूप में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करना चाहता है, जो बीजिंग के प्रति वफादार हो. इस बीच, अमेरिका ने यह संकेत भी दिया है कि अगर चीन तिब्बतियों पर अपने मनोनुकूल व्यक्ति को दलाई लामा बनाकर थोपने का प्रयास करता है, तो वह इसका विरोध करेगा. इसके साथ ही, उसने यह भी कहा है कि धार्मिक मामलों में राजनीति या सत्ता द्वारा दखल नहीं दिया जाना चाहिए. धार्मिक मामले में धार्मिक संगठन ही फैसला करें, तो ज्यादा बेहतर होगा और तिब्बत में दलाई लामा का चयन धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप होना चाहिए.

इसे भी पढ़ें : दलाई लामा की शर्त पर चीन को खुश नहीं करेगा भारत, देश में कहीं भी धार्मिक आयोजन के लिए आजाद

अमेरिका ने संकेत दिया है कि तिब्बत के लोगों पर चीन द्वारा अपना दलाई लामा थोपे जाने के किसी भी कदम का वह विरोध करेगा, क्योंकि वॉशिंगटन का मानना है कि तिब्बत के वर्तमान शीर्ष बौद्ध नेता के उत्तराधिकारी का चुनाव धार्मिक परंपराओं के मुताबिक होना चाहिए और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए. उधर, चीन को इस बात की चिंता सता रही है कि 14वें दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा.

वर्तमान दलाई लामा की उम्र 83 वर्ष है और फिलहाल वह निर्वासन में भारत में रह रहे हैं. उन्हें शीर्ष लामाओं ने उस समय दलाई लामा घोषित किया था, जब वह केवल दो वर्ष के थे. तिब्बत की बौद्ध परंपराओं के मुताबिक, जब वर्तमान दलाई लामा का निधन होगा, तो दूसरे व्यक्ति के रूप में उनका पुनर्जन्म होगा. चीन का कहना है कि 14वें दलाई लामा के उत्तराधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार उसके पास है, जो बीजिंग के प्रति वफादार हो.

सांसदों के समक्ष ट्रंप प्रशासन के रुख को स्पष्ट करते हुए मंगलवार को लॉरा स्टोन ने कहा कि अमेरिका का मानना है कि धार्मिक फैसले धार्मिक संगठनों की ओर से किये जाने चाहिए, न कि राजनीतिक सत्ता द्वारा. स्टोन पूर्वी एशियाई एवं प्रशांत क्षेत्र मामलों की कार्यवाहक उप सहायक विदेश मंत्री हैं. स्टोन ने पूर्वी एशिया पर सीनेट विदेश संबंध की उप समिति से कहा कि अमेरिका का स्पष्ट रुख है कि धार्मिक फैसले धार्मिक संगठनों के अंदर किये जाने चाहिए और यह काम सरकार का नहीं है.

स्टोन सीनेटर कोरी गार्डनर के एक सवाल का जवाब दे रही थीं. सीनेटर ने पूछा था कि चीन ने कहा है कि वे अगले दलाई लामा को चुनेंगे. तिब्बत की नीति में बताया गया है कि अमेरिका के अधिकारी नियमित रूप से तिब्बत का दौरा करेंगे. मैं इन दोनों पर बात करना चाहता हूं. अगर चीन दलाई लामा थोपता है, तो अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया होगी?

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