बॉस की अच्छाई का फायदा न उठायें

Updated at : 16 Jun 2014 5:41 AM (IST)
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बॉस की अच्छाई का फायदा न उठायें

।। दक्षा वैदकर ।। ली डर और कर्मचारी के रिश्ते को लेकर कई लेख लिखे गये हैं. अक्सर उनमें कहा जाता है कि लीडर को कर्मचारियों से दोस्ताना व्यवहार रखना चाहिए. उनकी बातों को सुनना चाहिए. कर्मचारियों की मजबूरी को समझना चाहिए. कई लीडर इसी तरह का व्यवहार करते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा […]

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।। दक्षा वैदकर ।।

ली डर और कर्मचारी के रिश्ते को लेकर कई लेख लिखे गये हैं. अक्सर उनमें कहा जाता है कि लीडर को कर्मचारियों से दोस्ताना व्यवहार रखना चाहिए. उनकी बातों को सुनना चाहिए. कर्मचारियों की मजबूरी को समझना चाहिए. कई लीडर इसी तरह का व्यवहार करते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करने से सब मन लगा कर काम करेंगे, मेहनत करेंगे. टीम वर्क में काम होगा, लेकिन कई बार ऐसा होता नहीं है. इस अच्छे व्यवहार का उल्टा असर हो जाता है. इसकी वजह है कर्मचारी. वे लीडर की अच्छाई का फायदा उठाते हैं.

उनके दोस्ताना व्यवहार का इस्तेमाल अपने लिए करते हैं. वे बार-बार छुट्टी मांगते हैं. कम और बहुत ही चलताऊ तरीके से काम करते हैं. आराम से ऑफिस आते हैं और गलती पर पछताना तो दूर, सॉरी बोलने की जहमत भी नहीं उठाते. ऐसी स्थिति में ऑफिस का माहौल पहले से भी ज्यादा खराब हो जाता है. कंपनी का स्तर ऊपर जाने की बजाय नीचे जाने लगता है. सवाल उठता है कि ऐसी स्थिति में लीडर क्या करे. क्या वह दोबारा खड़स लीडर बन जाये. एटिट्यूड में रहे और कर्मचारियों को दबा कर रखे या इसी तरह कर्मचारियों की ही मनमरजी चलने दे.

इस बात पर मुङो वही साधु वाली कहानी याद आती है. एक साधु रोजाना जब नदी में स्नान करके निकलते, तो उन्हें एक बिच्छू नजर आता. वह उसे बचाने के लिए उठा कर नदी में फेंकते, तो वह उन्हें डंक मार देता. लेकिन साधु रोज यही कार्य करते. एक आदमी उनकी इस आदत को रोजाना देखता था. उसने एक दिन साधु से पूछ ही लिया कि जब वह बिच्छू रोज आपको डंक मारता है, तो आप उसकी मदद क्यों करते हैं. इस पर साधु ने जवाब दिया, ‘जब वह अपनी डंक मारने की इतनी बुरी आदत नहीं बदल रहा, तो भला मैं अपनी मदद करने की अच्छी आदत क्यों बदलूं? ये उसका जीने का तरीका है और ये मेरा जीने का तरीका है.’

यहां मैं यह सुझाव तो नहीं दे रही कि खुद को साधु मान कर सब कुछ सहन करते जाएं, लेकिन यह जरूर कहूंगी कि अपना हंसमुख, मिलनसार, मददगार स्वभाव न छोड़ें.

बात पते की..

– अगर आप कर्मचारी हैं और आपके बॉस का व्यवहार इसी तरह का मिलनसार व मदद करने वाला है, तो उनकी कद्र करें. फायदा न उठायें.

– खुद को बॉस की जगह रख कर सोचें कि इस तरह का व्यवहार करने के बाद भी अगर कर्मचारी साथ न दें, तो आप कैसा महसूस करेंगे.

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