विश्व कला इतिहास में चित्रकार लिओनार्दो दा विंची

Updated at : 26 Aug 2018 8:19 AM (IST)
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विश्व कला इतिहास में चित्रकार लिओनार्दो दा विंची

अशोक भौमिक चित्रकार विश्व की सबसे ज्यादा चर्चित चित्र ‘मोनालिसा’ को एक श्रेष्ठ चित्रकार की एक श्रेष्ठ कृति के रूप में जाना जाता है. ‘मोनालिसा’, निस्संदेह शबीह (पोर्ट्रेट) चित्रण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. हालांकि, इस चित्र की ख्याति, चित्र की महिला की रहस्यमय हंसी को लेकर तमाम व्याख्याओं के लिए है, पर इन सबों […]

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अशोक भौमिक

चित्रकार

विश्व की सबसे ज्यादा चर्चित चित्र ‘मोनालिसा’ को एक श्रेष्ठ चित्रकार की एक श्रेष्ठ कृति के रूप में जाना जाता है. ‘मोनालिसा’, निस्संदेह शबीह (पोर्ट्रेट) चित्रण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.

हालांकि, इस चित्र की ख्याति, चित्र की महिला की रहस्यमय हंसी को लेकर तमाम व्याख्याओं के लिए है, पर इन सबों के चलते हम प्रायः चित्र की अनेक कलात्मक पक्षों को अनदेखा कर देते हैं. इस चित्र में चित्रकार लिओनार्दो दा विंची ने दृश्य-चित्र (लैंडस्केप) और शबीह-चित्र (पोर्ट्रेट) को अपनी तमाम बारीकियों के साथ एक ही चित्र में चित्रित किया है.

चित्र का दृश्यचित्र (लैंडस्केप), महिला के बायें और दायें, दो हिस्सों में बंटा दिखता है. यहां गौर से देखने पर दृश्य चित्र का आकाश का अंश महिला की आंख और कान के ऊपर के हिस्से में है, जबकि लैंडस्केप की सूखी जमीन का हिस्सा महिला की गर्दन के नीचे से कोहनी तक का हिस्सा है.

इन्हीं दोनों के बीच (महिला के कान से कंधे तक) इस दृश्यचित्र में हरियाली का विस्तार है, जहां एक नदी भी दिखती है. इस दृश्यचित्र के बायें हिस्से के ऊपरी भाग में भी एक नदी है, जबकि इस अंश के नीचे का हिस्सा मटमैला और भूरे रंग का जमीनी हिस्सा है, जहां एक पुराना पुल भी दिखायी देता है.

महिला के दाहिने हिस्से के दृश्यचित्र में एक सर्पिल सड़क है, जो नदी तट तक जाती है. यह दृश्य काफी ऊंचाई से देखा गया लगता है, जिसे हम ‘उड़ती चिड़िया की नजर से’ या ‘बर्ड्स आई व्यू’ से देखा हुआ दृश्य कहते हैं.

यह दृश्य न केवल महिला से काफी दूर है, बल्कि महिला किसी बहुत ऊंचे भवन की खिड़की के पास बैठी हुई है. इससे इस संभावना को भी एक आधार मिलता है कि यह दृश्यचित्र कोई प्राकृतिक दृश्य न होकर, एक चित्रित पृष्ठपट (बैकड्राॅप) है, जिसे महिला के पीछे तान कर इस चित्र को बनाया गया है.

इस चित्र की प्रकाश व्यवस्था विशेष रूप से देखने लायक है. चित्र में स्पष्टतः कई (सात) प्रकाशित अंश हैं, जो मद्धिम से लेकर विभिन्न तीव्रता के हैं. इस प्रकाश व्यवस्था में केंद्र का (महिला के गर्दन के नीचे का) हिस्सा सबसे ज्यादा प्रकाशित दिखता है. इस सबसे ज्यादा आलोकित हिस्से के चलते हमारी नजर ‘मोनालिसा’ के चेहरे पर नहीं टिक पाती. इस चित्र के आकर्षण का यह एक बहुत महत्वपूर्ण पक्ष है.

‘मोनालिसा’ चित्र में चित्ररचना की एक खास शैली ‘स्फूमातो’ का प्रयोग किया गया है, जिसमें सीमा-रेखाओं या आउटलाइंस का प्रयोग न करते हुए एक खास (धुएं या कोहरे जैसी) कोमलता को पैदा किया जाता है.

इस चित्र में महिला के चेहरे पर कहीं भी कोई हार्ड लाइन नहीं है, यहां तक की महिला की भौहें तक नहीं हैं. इस महिला के बालों के ऊपर एक हल्की जाली का एक आवरण है, जिसे हम उसके दाहिनी और कान के पास देख सकते है. ‘मोनालिसा’ चित्र की इन खूबियों को देखने-समझने और इसकी तुलना अन्य चित्रों से करने पर ही हम ‘मोनलिसा’ की विशिष्टता को समझ पाते हैं.

विश्व कला इतिहास में लिओनार्दो दा विंची (1452-1519) से बड़ा प्रतिभाशाली चित्रकार शायद ही कोई हो. मूर्तिकार, अन्वेषक, गणितज्ञ, साहित्यकार, वैज्ञानिक, संगीतज्ञ, शरीर-वैज्ञानिक, वनस्पतिशास्त्री के अलावा भी कई और विधाओं में विंची की प्रतिभा के कारण उन्हें याद किया जाता है. छह सौ वर्षों बाद भी उनकी कलाकृतियां आज के कलाकारों का मार्गदर्शन करती हैं.

विंची फ्लोरेंस के रहनेवाले थे और उनकी कला शिक्षा फ्लोरेंस में ही हुई थी, पर बाद में वे मिलान, रोम, वेनिस और फ्रांस में रहकर चित्र बनाये. आज उनके केवल पंद्रह चित्र ही उपलब्ध हैं, पर वे सभी अपने कला गुणों के कारण ऐतिहासिक महत्व के हैं. उनका ‘द लास्ट सपर’ चित्र विश्व के अन्यतम धार्मिक चित्रों में एक है.

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