क्या कवि करोड़पति नहीं हो सकते?

Published at :01 Jun 2014 9:42 AM (IST)
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क्या कवि करोड़पति नहीं हो सकते?

एक शौक़िया कवि ने पिछले हफ़्ते संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक टीवी टैलेंट शो में 10 लाख डॉलर से ज़्यादा की रक़म जीत ली. कविता पाठ के साथ ही वहां का नज़ारा बेहद अनूठा था. अबु धाबी के अल-राहा बीच थिएटर में रोशनी से जगमगाता हुआ फ़र्श, शानदार पृष्ठभूमि और अनूठे लाइट शो का […]

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एक शौक़िया कवि ने पिछले हफ़्ते संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक टीवी टैलेंट शो में 10 लाख डॉलर से ज़्यादा की रक़म जीत ली.

कविता पाठ के साथ ही वहां का नज़ारा बेहद अनूठा था. अबु धाबी के अल-राहा बीच थिएटर में रोशनी से जगमगाता हुआ फ़र्श, शानदार पृष्ठभूमि और अनूठे लाइट शो का दृश्य कुछ ऐसा था जिससे पॉप आइडल, एक्स फ़ैक्टर या अमेरिकाज गॉट टैलेंट के प्रशंसक वाक़िफ़ होंगे.

फ़रवरी से ही दुनिया भर के क़रीब सात करोड़ दर्शकों ने "मिलियंस पोएट" कार्यक्रम देखा. इस शो में परंपरागत पोशाक पहने पुरुष प्रतिभागी (इस साल किसी महिला ने इसमें हिस्सा नहीं लिया) अपनी लिखी हुई कविताएं सुनाते हैं जो बोलचाल की अरबी कविता का एक प्रकार है जिसे नाबाती कहते हैं.

इस शो में मौजूद जजों का एक पैनल अपनी प्रतिक्रिया देता है. इस शो में कभी-कभार संयुक्त अरब अमीरात का शाही परिवार भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है. इस शो में प्रतियोगियों की संख्या धीरे-धीरे कम की जाती है ताकि अंतिम चरण में कुछ ही प्रतिभागी रह पाएं.

जैसा कि मशहूर कवि वर्ड्सवर्थ कहते हैं कि भावनाएं शांति वाले माहौल में ही उभरती हैं, उस लिहाज़ से कविताओं से जुड़े इस कार्यक्रम का प्रारूप भले ही विपरीत लगता हो लेकिन इस शो की मोटी रक़म हमें थोड़ी देर तक सोचने के लिए मजबूर करती है.

पूर्वाग्रह पर सवाल

27 वर्षीय सैफ़ अल-मंसूरी ने पिछले हफ़्ते इस शो के छठे संस्करण में जीत हासिल की और उन्होंने पचास लाख यूएई दिरहम यानी करीब 13 लाख डॉलर हासिल किए.

अगर साहित्यिक पुरस्कारों की बात करें तो इतनी राशि कम ही पुरस्कारों में दी जाती है और इस लिहाज़ से साहित्य का नोबेल पुरस्कार ही इसके थोड़ा क़रीब है जिसमें आठ लाख स्वीडिश क्रोनर (स्वीडन की मुद्रा) या 12 लाख डॉलर बतौर पुरस्कार राशि दी जाती है.

ये सभी बातें कविता और कवियों से जुड़े हमारे पूर्वाग्रहों पर सवाल उठाती हैं.

शिकागो की पोएट्री पत्रिका के संपादक और कवि डॉन शेयर का कहना है, "आमतौर पर कविता, शो बिज़नेस से विपरीत दिखती है और हम शायद कवियों को बेहद ख़ास तरह की हस्तियों के तौर पर देखना पसंद नहीं करते हैं."

लेकिन उनका कहना है कि पॉप स्टार, फ़िल्म स्टार और यहां तक कि राजनेता ज़्यादा अमीर हैं ऐसे में जिन कवियों और उपन्यासकारों के पास पैसा आया है उस पर नाखुशी ज़ाहिर करना ठीक नहीं है.

पोएट्री सोसायटी की निदेशक जुडिथ पामर कहती हैं कि इसकी कोई वजह नहीं है कि अमीर कवि अपना काम करने के लिए उम्मीद, प्रेम, नुक़सान और हैरानी को क्यों महसूस नहीं कर सकते.

मिलियंस पोएट शो को संरक्षण की एक परंपरागत कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है. यह शो अबु धाबी के युवराज के दिमाग़ की उपज थी. इस शो में शामिल होने वाले प्रतिभागियों की कविता में अक्सर खाड़ी देश के नेताओं की तारीफ़ होती है.

कला का संरक्षण

विशुद्ध रोमांटिक कविता लिखने वाले कवि के मुक़ाबले शायद इस तरह की कविताएं लिखने वाले कवियों द्वारा अचानक ख़ूब पैसे कमाने की बात ज़्यादा हैरान नहीं करती है. अल-मंसूरी ने जब मिलियंस पोएट शो में जीत हासिल की उसके बाद उन्होंने दर्शकों से कहा कि यह एक यात्रा की शुरुआत है और वे भविष्य में उनकी काफ़ी रचनाएं देखेंगे और सुनेंगे.

कला के संरक्षक पश्चिमी देशों से भी ग़ायब नहीं हुए हैं बल्कि यह संरक्षण निजी स्तर के बजाए औद्योगिक जगत या सभ्य समाज के स्तर पर दिया जाता है.

पोएट्री इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन द्वारा संचालित "एक कवि अपनाएं" योजना इसका अपवाद है.

फ़ाउंडेशन के निदेशक, बैस क्वॉकमैन इस बात पर अफ़सोस जताते हैं कि आजकल एक कवि के रूप में अपना अस्तित्व बनाए रखना लगभग असंभव है लेकिन उन्हें अल-मंसूरी की 13 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि से कोई जलन नहीं होती.

वह कहते हैं, "अगर वह रैप संगीत की शैली अपनाते हैं, शानदार कारें और महंगे धूप वाले चश्में लेते हैं और ख़ूबसूरत लड़कियों के साथ समुद्र तट पर ड्राइविंग करते हैं तो मुझे इसकी परवाह नहीं होगी. "

वह कहते हैं, "उन्हें एक बड़ा रैपर स्टार होने दीजिए और उसके बाद रात में उन्हें ख़ूबसूरत कविताएं लिखने का मौक़ा दीजिए."

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