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राम मंदिर को लेकर क्या कहती है 1905 की गजट रिपोर्ट, पढ़ें...

Updated at : 06 Dec 2017 12:43 AM (IST)
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राम मंदिर को लेकर क्या कहती है 1905 की गजट रिपोर्ट, पढ़ें...

मनोज सिन्हा, मिथिलेश झा, राजीव चौबे उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिला स्थित अयोध्या में राम मंदिर आैर बाबरी मस्जिद का विवाद काफी पुराना है. अंग्रेजों के शासनकाल में तैयार की गयी फैजाबाद जिले की गजट रिपोर्ट की मानें, तो 1857 की क्रांति के बाद ही इसका विवाद शुरू हो गया था. फैजाबाद जिला गजट 1905 […]

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मनोज सिन्हा, मिथिलेश झा, राजीव चौबे

उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिला स्थित अयोध्या में राम मंदिर आैर बाबरी मस्जिद का विवाद काफी पुराना है. अंग्रेजों के शासनकाल में तैयार की गयी फैजाबाद जिले की गजट रिपोर्ट की मानें, तो 1857 की क्रांति के बाद ही इसका विवाद शुरू हो गया था. फैजाबाद जिला गजट 1905 के अनुसार, वर्ष 1855 तक हिंदू और मुसलमान दोनों एक ही इमारत में इबादत या पूजा करते रहे थे, लेकिन 1857 के विद्रोह के बाद मस्जिद के सामने एक बाहरी दीवार डाल दी गयी और हिंदुओं को अदंरुनी प्रांगण में जाने, वेदिका (चबूतरा), जिसे उन लोगों ने बाहरी दीवार पर खड़ा किया था, पर चढ़ावा देने से मना कर दिया गया.

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1883 में इस चबूतरे पर मंदिर का निर्माण करने की कोशिश को उपायुक्त द्वारा रोक दिया गया, उन्होंने 19 जनवरी, 1885 को इसे निषिद्ध कर दिया. महंत रघुवीर दास ने उप-न्यायाधीश फैजाबाद की अदालत में एक मामला दायर किया. 17 फीट x 21 फीट माप के चबूतरे पर पंडित हरिकिशन एक मंदिर के निर्माण की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन मुकदमे को बर्खास्त कर दिया गया. एक अपील फैजाबाद जिला न्यायाधीश कर्नल जेईए चमबिअर की अदालत में दायर किया गया, स्थल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने 17 मार्च, 1886 को इस अपील को खारिज कर दिया. एक दूसरी अपील 25 मई, 1886 को अवध के न्यायिक आयुक्त डब्ल्यू यंग की अदालत में दायर की गयी थी, इन्होंने भी इस अपील खारिज कर दिया. इसी के साथ, हिंदुओं द्वारा लड़ी गयी पहले दौर की कानूनी लड़ाई का अंत हो गया.

बताया जाता है कि 1934 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान मस्जिद के चारों ओर की दीवार और मस्जिद के गुंबदों में एक गुंबद क्षतिग्रस्त हो गया था. ब्रिटिश सरकार द्वारा इनका पुनर्निर्माण किया गया. इतिहास बताता है कि मस्जिद और गंज-ए-शहीदन कब्रिस्तान नामक कब्रगाह से संबंधित भूमि को वक्फ क्रम संख्या 26 फैजाबाद के रूप में यूपी सुन्नी केंद्रीय वक्फ (मुस्लिम पवित्र स्थल) बोर्ड के साथ 1936 के अधिनियम के तहत पंजीकृत किया गया था. इस अवधि के दौरान मुसलमानों के उत्पीड़न की पृष्ठभूमि की क्रमशः 10 और 23 दिसंबर, 1949 की दो रिपोर्ट दर्ज करके वक्फ निरीक्षक मोहम्मद इब्राहिम द्वारा वक्फ बोर्ड के सचिव को दिया गया था.

गजट की पहली रिपोर्ट कहती है कि मस्जिद की तरफ जानेवाले किसी भी मुस्लिम टोका गया और नाम वगैरह … लिया गया. वहां के लोगों ने मुझे बताया कि हिंदुओं से मस्जिद को खतरा है. जब नमाजी (नमाज अदा करने वाले) लौट कर जाने लगते है, तो उनकी तरफ आसपास के घरों के जूते और पत्थर फेंके जाते हैं. मुसलमान भय के कारण एक शब्द भी नहीं कहते. रघुदास के बाद लोहिया ने अयोध्या का दौरा किया और वहां भाषण दिया. कब्र को नुकसान मत पहुंचाइए. बैरागियों ने कहा कि मस्जिद जन्मभूमि है और इसलिए इसे हमें दे दें. मैंने अयोध्या में एक रात बितायी और बैरागी जबरन मस्जिद पर कब्जा करने लगे.

सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, 22 दिसंबर, 1949 की आधी रात को जब पुलिस गार्ड सो रहे थे, तब राम और सीता की मूर्तियों को चुपचाप मस्जिद में ले जाया गया और वहां स्थापित कर दिया गया. अगली सुबह इसकी खबर कांस्टेबल माता प्रसाद द्वारा दी गयी और अयोध्या पुलिस थाने में इसकी सूचना दर्ज की गयी. 23 दिसम्बर 1949 को अयोध्या पुलिस थाने में सब इंस्पेक्टर राम दुबे द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कहा गया, "50-60 व्यक्तियों के एक दल ने मस्जिद परिसर के गेट का ताला तोड़ने के बाद या दीवारों को फांद कर बाबरी मस्जिद में प्रवेश किया और वहां श्री भगवान की मूर्ति की स्थापना की तथा बाहरी और अंदरुनी दीवार पर गेरू (लाल दूमट) से सीता-राम का चित्र बनाया गया. उसके बाद 5-6 हजार लोगों की भीड़ आसपास इकट्ठी हुई तथा भजन गाते और धार्मिक नारे लगाते हुए मस्जिद में प्रवेश करने की कोशिश करने लगी, लेकिन उन्हें रोक दिया गया."

रिपोर्ट के अनुसार, अगली सुबह हिंदुओं की बड़ी भीड़ ने भगवान को प्रसाद चढ़ाने के लिए मस्जिद में प्रवेश करने का प्रयास किया. जिला मजिस्ट्रेट केके नायर ने दर्ज किया है कि यह भीड़ जबरन प्रवेश करने की कोशिश करने के लिए पूरी तरह से दृढ़ संकल्प थी. ताला तोड़ डाला गया और पुलिसवालों को धक्का देकर गिरा दिया गया. हममें से सब अधिकारियों और दूसरे लोगों ने किसी तरह भीड़ को पीछे की ओर खदेड़ा और फाटक को बंद किया. पुलिस और हथियारों की परवाह न करते हुए साधु एकदम से उन पर टूट पड़े और तब बहुत ही मुश्किल से हमलोगों ने किसी तरह से फाटक को बंद किया. फाटक सुरक्षित था और बाहर से लाये गये एक बहुत ही मजबूत ताले से उसे बंद कर दिया गया तथा पुलिस बल को सुदृढ़ किया गया.

जारी….

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