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रोहिंग्या संकट के तीन सप्ताह बाद भी पलायन जारी, दागे जा रहे हैं रॉकेट लॉन्चर

Updated at : 15 Sep 2017 12:15 PM (IST)
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रोहिंग्या संकट के तीन सप्ताह बाद भी पलायन जारी, दागे जा रहे हैं रॉकेट लॉन्चर

कॉक्स बाजार (बांग्लादेश) : म्यांमार में हिंसा के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों के पलायन के करीब तीन सप्ताह बाद बांग्लादेश सीमा पर हजारों लोग शरणार्थी बस्तियों में मदद और सुरक्षा की बाट जोह रहे हैं. विश्व भर में इस संकट की आलोचना की जा रही है. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी म्यांमार से जातीय […]

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कॉक्स बाजार (बांग्लादेश) : म्यांमार में हिंसा के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों के पलायन के करीब तीन सप्ताह बाद बांग्लादेश सीमा पर हजारों लोग शरणार्थी बस्तियों में मदद और सुरक्षा की बाट जोह रहे हैं. विश्व भर में इस संकट की आलोचना की जा रही है. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी म्यांमार से जातीय सफाये के अभियान को रोकने की मांग कर रहे हैं जिसके तहत करीब 400,000 रोहिंग्या लोगों ने राखिन प्रांत से पलायन किया है.

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पुलिस ने जानकारी दी कि रोहिंग्या शरणार्थियों को बांग्लादेश के सीमावर्ती शहर टेकनाफ लाने वाली दर्जनों नौकाओं में से एक को गुरुवार को पकड़ा गया और कम से कम दो लोग डूब गये. इस घटना के बाद इस संकट के शुरू होने से लेकर अब तक नाफ नदी में डूबने वाले लोगों की संख्या बढकर 88 हो गयी है.

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एक रोहिंग्या व्यक्ति ने बताया कि उनके गांव राशिडोंग में छह दिन पहले म्यांमार सैनिकों और पुलिस ने हमला किया. अब्दुल गोफ्फार ने कहा कि जब सेना और पुलिस ने हमारे गांव को घेरा और आग लगाने के लिए हम पर रॉकेट लॉन्चरों से हमला किया तो हम अपने गांव से भागे और जहां भी रास्ता मिला, हम उसी दिशा में बढ़ते गये. म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता जाव ते ने कहा कि राखिन के तीन शहरों में 471 बंगाली गांवों में से 176 गांवों में अब वीरानी छाई हुई है जबकि कम से कम 34 और गांव आंशिक रुप से खाली हैं.

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म्यांमार ने रोहिंग्या पर खुद अपने घरों और गांवों को फूंकने का आरोप लगाया है जिसकी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने यह कहकर आलोचना की कि यह सच्चाई को पूरी तरह से खारिज करना है. संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने गुरुवार को विश्व संस्था के मुख्यालय में संवाददाताओं को बताया कि बीते 24 घंटे में करीब 10,000 लोगों के सीमा पार जाने की खबर है.

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