मकान मालिक ने घर से निकाला तो किसी के हो गये पैसे खत्म, देखिये प्रवासी मजदूरों की 4 मार्मिक कहानी
Author Arvindkumar singh
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कोरोना संकट और लॉकडाउन की चौतरफा मार प्रवासी मजदूरों ने झेली है. ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी. रोजी-रोटी और बेहतर जीवन का आस लिये हजारों किलोमीटर दूर गये इन प्रवासी मजदूरों पर कोरोना संकट मानों किसी काल की तरह टूट पड़ा है. कोरोना संकट से बच भी गये तो भूख और लाचारी इन्हें लील लेने को बैठी है. कहीं ये प्रवासी मजदूर भूख के मारे भोजन के पैकेट पर झपट्टा मारते दिख रहे हैं तो कहीं नंगे पांव तपती सड़क पर पैदल चलते हुये. कहीं ये नाउम्मीदी और बेबसी में जार-जार रोते दिख रहे हैं. बेबसी औऱ भूख के साथ अपनी मिट्टी में लौट जाना चाहते हैं. आज की हमारी पेशकश इन प्रवासी मजदूरों पर केंद्रित है, जिसमें हम आपको प्रवासी कामगारों की बेबसी और मुश्किल की चार मार्मिक कहानियां दिखायेंगे.
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