काशी संस्कृति संसद: सलमान खुर्शीद की किताब पर नाराजगी, वक्ताओं ने कहा- हिंदू धर्म हमलावर नहीं
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 13 Nov 2021 10:07 AM
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद ने कहा कि हिन्दू संस्कृति में महिलाओं को समान अधिकार हैं. स्त्री एवं पुरुष दोनों एक ही परमेश्वर के दो भाग हैं. इसका उल्लेख मनुस्मृति में है. स्त्री विभिन्न रूपों में पूजनीय हैं.
Varanasi News: वाराणसी में तीन दिवसीय संस्कृति संसद का शुभारंभ रुद्राक्ष सभागार में हो गया है. तीन दिवसीय संस्कृति संसद में 14 सत्र होंगे. संस्कृति संसद के पहले दिन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद ने कहा कि हिन्दू संस्कृति में महिलाओं को समान अधिकार हैं. स्त्री एवं पुरुष दोनों एक ही परमेश्वर के दो भाग हैं. इसका उल्लेख मनुस्मृति में है. स्त्री विभिन्न रूपों में पूजनीय हैं. यह मान्यता सिर्फ हिन्दू संस्कृति में है. सनातन संस्कृति ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तत्र देवता’ को मानती है.
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद ने कहा कि कन्या पूजन का विधान हमारी सनातन संस्कृति में ही मिलता है. वाचस्पति त्रिपाठी ने कहा कि हिंदू संस्कृति में नारी अपमान का आरोप विरोधियों की साजिश है. नारी उपनयन के रूप में विवाह को मान्यता है. महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा अहम स्थान दिया गया है. यही कारण है कि कृष्ण के पहले राधा, राम के पहले सीता, शिव के पहले पार्वती का उच्चारण होता है.
दूसरे सत्र में भारतीय संस्कृति को अपनाने के प्रश्न के बारे में कहा गया कि यह संस्कृति निःस्वार्थ भाव को बढ़ाती है. योगाचार्य दिव्यप्रभा (ब्रिटेन) ने हिन्दू धर्म के खिलाफ हो रहे कुप्रचार के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिन्दू धर्म संस्कृति एक प्रकाश की भांति है, जो अपनी रोशनी चारों ओर फैला रही है. हिन्दू सदा हिंसा से दूर रहता है. तृतीय सत्र युवा समस्याओं का समाधान श्रेष्ठ संस्कारों से संबंधित रहा.
मुख्य वक्ता लद्दाख के लोकसभा सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल ने कहा भारतीयता की भावना भारतीय संस्कृति से उत्पन्न होती है. आज देश को भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, गरीबी, आतंकवाद और नक्सलवाद से मुक्त कराना है. इसमें भारत की 65 प्रतिशत युवा शक्ति को निर्णायक भूमिका निभानी पड़ सकती है. महायज्ञ का बिगुल धर्म-संस्कृति की राजधानी काशी से फूंका जाना चाहिए. राज्यसभा सांसद और संस्कृति संसद के आयोजन समिति की अध्यक्ष रुपा गांगुली ने कहा हिन्दू संस्कृति कभी हिंसक और हमलावर नहीं रही. हिन्दू संस्कृति पर निरंतर प्रहार हो रहे हैं, उससे सजगतापूर्वक संघर्ष की जरुरत है.
‘एक देश एक विधान, हमारा देश हमारे कानून’ विषय पर समानांतर सत्र को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि देश के विकास के लिए समान नागरिक संहिता आवश्यक है. समान नागरिक संहिता भारतीय संविधान की आत्मा है. अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भगवा आतंकवाद और हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठन बोको हराम और ISIS से करने पर नाराजगी जताई. उन्होंने सलमान खुर्शीद को कहा कि वो आदत सुधारें.
विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश चंद्र ने कहा कि हिंदू, ईसाई और मुस्लिम एक समान नहीं हैं. यह गलत व्याख्या है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. स्वामी विवेकानंद ने कहा था जितनी भी संस्कृति का अध्ययन करना चाहते हो, जरूर करो. पहले हिंदू संस्कृति का अध्ययन करो तब पाओगे कि हिंदू संस्कृति कितनी श्रेष्ठ है. हिंदू की तुलना किसी और धर्म से नहीं हो सकती. हिंदू किसी पर अत्याचार नहीं करते. डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि सनातन संस्कृति ही हिंदुत्व है. शिव नगरी काशी एक कल्चरल सेंटर है.
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