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Varanasi: ज्ञानव्यापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मामले में कोर्ट का आया फैसला, तीन मई के बाद सर्वे का आदेश

Updated at : 27 Apr 2022 7:54 AM (IST)
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Varanasi: ज्ञानव्यापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मामले में कोर्ट का आया फैसला, तीन मई के बाद सर्वे का आदेश

Varanasi News: श्रृंगार गौरी मामले पर वाराणसी की अदालत में चल रही सुनवाई में सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर ने मंगलवार को कमीशन की कार्रवाई ईद के बाद करने का आदेश दिया है.

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Varanasi News: काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी मामले पर सिविल जज ने ईद के बाद कमीशन की कार्रवाई करने का आदेश दिया है. सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने कमीशन की कार्रवाई की रिपोर्ट 10 मई को पेश करने का आदेश दिया है. इससे पहले 20 अप्रैल को अदालत ने श्रृंगार गौरी मामले में दोनों पक्षों और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की दलीलें सुनने के बाद आदेश के लिए 26 अप्रैल की तारिख तय की थी.

श्रृंगार गौरी मामले पर वाराणसी की अदालत में चल रही सुनवाई में सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर ने मंगलवार को कमीशन की कार्रवाई ईद के बाद करने का आदेश दिया है. गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी और अन्य विग्रह देवताओं का वकील कमिश्नर से सर्वे कराने के मामले में डीजीसी सिविल की आपत्ति पर वादीपक्ष की तरफ से बीते 20 अप्रैल को दलीलें सिविल कोर्ट में पेश की गई थी. अदालत ने दोनों पक्षों और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद का पक्ष सुनने के बाद आदेश के लिए 26 अप्रैल की तिथि नियत कर दी थी.

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वादी पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी व सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने डीजीसी सिविल के आवेदन को निरस्त करने, मां श्रृंगार गौरी और मंदिर के विग्रह देवताओं नंदी जी व हनुमान जी महाराज का स्थान, तहखाना और बैरिकेटिंग के अंदर मंदिर से संबंधित समस्त साक्ष्य जो वादी गण द्वारा बताए जाए और दिखाया जाए,. उसकी कमीशन कार्रवाई वीडियोग्राफी एवं फोटो में प्रतिवादीगण के सहयोग करने और बाधा न उत्पन्न करने का आदेश दिए जाने का अनुरोध किया गया था. साथ ही, कमीशन कार्रवाई में राखी सिंह समेत वादी पक्ष के लोग, 15 वकीलों और 3 वीडियोग्राफर के शामिल होने की बात कही गई थी.

रेड जोन में वीडियोग्राफी से सुरक्षा को खतरा बताया गया था, लेकिन यह स्पष्ट नही किया गया था कि किससे खतरा है. यूपी स्टेट की तरफ से डीजीसी सिविल महेंद्र कुमार पांडेय व डीजीसी फौजदारी आलोक चन्द्र शुक्ल ने पक्ष रखा था.अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से अधिवक्ता अभय यादव ने कमीशन की कार्रवाई जिस आराजी नंबर के बाबत कही गई है, उसकी चौहद्दी और रकवा स्पष्ट नहीं होने पर सवाल उठाया था.

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