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Varanasi: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत, कोर्ट में आत्मसमर्पण के बाद अंतरिम जमानत, 2015 का है मामला...

Updated at : 22 Dec 2022 4:30 PM (IST)
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Varanasi: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत, कोर्ट में आत्मसमर्पण के बाद अंतरिम जमानत, 2015 का है मामला...

प्रतिकार यात्रा के दौरान हुए बवाल में दशाश्वमेध थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सहित कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सहित अन्य को फरार घोषित किया था. साथ ही, सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए उनकी संपत्ति के कुर्की का आदेश पुलिस को दिया था.

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Lucknow: प्रदेश के वाराणसी जनपद में प्रतिकार यात्रा के दौरान हुए बवाल में आरोपी ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गुरुवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया. अदालत ने अविमुक्तेश्वरानंद की अंतरिम जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए नियमित जमानत पर अर्जी पर सुनवाई के लिए 23 दिसंबर की तारीख नियत कर दी. इसके पहले विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट रिक्त होने के कारण अविमुक्तेश्वरानंद जिला जैसी अदालत में हाजिर हो गए.

गोदौलिया चौराहे पर हुआ था बवाल

इस मामले के मुताबिक 2015 में गंगा में गणेश प्रतिमा विसर्जन पर अड़े स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद समेत अन्य लोगों ने गोदौलिया के पास जाम लगाया था. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था. अविमुक्तेश्वरानंद और कई बटुकों पर भी पुलिस ने लाठीचार्ज किया था. इसी के विरोध में 5 अक्टूबर 2015 को मैदागिन स्थित टाउन हॉल मैदान से प्रतिकार यात्रा निकाली गई थी. इस दौरान गोदौलिया चौराहे पर बवाल हो गया. पुलिस पर हमले के साथ ही वहां खड़ी गाड़ियों में आगजनी हुई थी.

प्रतिकार यात्रा के दौरान बिगड़े थे हालात

प्रतिकार यात्रा के दौरान हुए बवाल में दशाश्वमेध थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सहित कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. इसी मामले में अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सहित अन्य को फरार घोषित किया था. साथ ही, सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए उनकी संपत्ति के कुर्की का आदेश पुलिस को दिया था. अदालत ने कहा था कि इस मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट एडीसीपी काशी जोन कोर्ट में पेश करेंगे. कोर्ट के सख्त रुख के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में आवेदन पत्र दाखिल किया गया.

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कोर्ट के कड़े रुख के बाद हुए पेश

इस पर अदालत ने कहा कि सात वर्ष पुराने मामले में अविमुक्तेश्वरानंद को कोर्ट में तलब किये जाने के बावजूद पेश नहीं होने पर पहले गैर जमानती वारंट फिर फरार घोषित किया गया. इसके बाद भी हाजिर नहीं होने पर कुर्की का आदेश कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 83 के तहत जारी किया है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्तों को देखते हुए अग्रिम जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं बनता और अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की जाती है. इसके बाद गुरुवार को अविमुक्तेश्वरानंद कोर्ट में हाजिर हुए और नियमित जमानत की गुहार लगाई .

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