बाहुबली पूर्व विधायक राजन तिवारी नेपाल भागते समय अरेस्ट, माफिया श्रीप्रकाश शुक्ल का जानें क्यों आ रहा नाम
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 18 Aug 2022 5:38 PM
गैैरजमानती वारंट जारी होने के बाद से वह फरार चल रहा था. यूपी के टॉप 45 माफिया की सूची में राजन तिवारी का नाम दर्ज है. पूर्व विधायक राजन तिवारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था. दिसंबर 2005 में उसके खिलाफ यूपी कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुआ था.
Gorakhpur News: मोस्ट वांटेड बाहुबली नेता राजन तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया है. कैंट और एसओजी की संयुक्त टीम ने यह गिरफ्तारी की है. बिहार-नेपाल बॉर्डर स्थित रक्सौल से राजन तिवारी को अरेस्ट किया गया है. कैंट थाने से गैंगस्टर के मुकदमे में राजन तिवारी वांछित था. राजन पर गोरखपुर में 60 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं. गैैरजमानती वारंट जारी होने के बाद से वह फरार चल रहा था. यूपी के टॉप 45 माफिया की सूची में राजन तिवारी का नाम दर्ज है. पूर्व विधायक राजन तिवारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था. दिसंबर 2005 में उसके खिलाफ यूपी कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुआ था.
जानकारी के मुताबिक, बाहुबली पूर्व विधायक राजन तिवारी नेपाल भागने की फिराक में था. मगर यूपी पुलिस को इसकी भनक लग चुकी थी. सचूना के आधार पर हरैया थानाध्यक्ष ने उसे समय रहते गिरफ्तार कर लिया. यूपी पुलिस को जानकारी मिली थी कि राजन तिवारी यूपी पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए नेपाल भागने की योजना बना रहा है. सूचना के आधार पर यूपी एसटीएफ और कैंट थाना की पुलिस ने मोतिहारी पहुंचकर मोतिहारी एसपी से सहयोग मांगा. इसके बाद सफारी गाड़ी से नेपाल भागने के दौरान हरैया बॉर्डर पर राजन तिवारी को हरैया पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.
बता दें कि 15 मई 1998 को गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी. 2005 से कोर्ट से लगभग 100 वारंट जारी किया गया मगर एक भी वारंट कैंट थाना के रिकॉर्ड में नहीं पहुंचा. मगर यूपी में योगी सरकार बनने के बाद ऑपरेशन शिकंजा अभियान में राजन तिवारी के मुकदमा को शामिल किया गया. यह ऑपरेशन अपराधियों की नकेल कसने के लिए शुरू किया गया है. इसी क्रम में गुरुवार को यूपी पुलिस ने राजन तिवारी को गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया.
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राजन तिवारी यूपी के गोरखपुर के सोहगौरा गांव का रहने वाला है. छात्र जीवन में ही राजन तिवारी ने जरायम की दुनिया में अपना नाम दर्ज करा दिया था.
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पुलिस विभाग के सूत्रों के मुताबिक, माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ मिलकर उसने कई अपराधों को अंजाम दिया है.
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महाराजगंज के लक्ष्मीपुर सीट से विधायक रहे वीरेंद्र प्रताप शाही पर हुए हमले में भी राजन तिवारी का नाम चर्चा में आया था.
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इस मामले में श्रीप्रकाश शुक्ला और राजन तिवारी के साथ चार लोगों को आरोपी बनाया गया था. इस मामले में वह 2014 में बरी हो चुके हैं.
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राजन तिवारी दो बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं. पूर्वी चंपारण के गोबिदगंज से लोक जनशक्ति पार्टी से वे विधायक चुने गए थे.
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राजन तिवारी मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी विधायक अजीत सरकार के मर्डर केस में भी आरोपी बनाए गए थे. इस मामले में पटना उच्च न्यायालय से उन्हें बरी कर दिया गया था.
रिपोर्ट : कुमार प्रदीप
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