राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर सबकी नजर, कल चंपत राय के इस्तीफे समेत 5 अहम एजेंडे पर होगी चर्चा

Ayodhya Ram Mandir: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक 6 जुलाई को मणिराम दास छावनी में आयोजित होगी. इस बैठक में चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के साथ इन पांच मुद्दों पर होगी चर्चा
Ayodhya Ram Mandir: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक 6 जुलाई को मणिराम दास छावनी में आयोजित होगी. बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास करेंगे, जबकि लंबे समय बाद पहली बार इसकी कार्यवाही का संचालन महासचिव चंपत राय की जगह ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि करेंगे. यह बदलाव इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि राम मंदिर चढ़ावा मामले के बाद चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं. दोनों को बैठक में आमंत्रित किया गया है, जहां ट्रस्ट उनके इस्तीफे पर अंतिम निर्णय लेगा.
चंपत राय के इस्तीफे पर ट्रस्ट करेगा फैसला
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार करना है. ट्रस्ट के सदस्य बहुमत के आधार पर तय करेंगे कि दोनों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएं या अस्वीकार. जब तक ट्रस्ट औपचारिक रूप से निर्णय नहीं लेता, तब तक दोनों तकनीकी रूप से ट्रस्ट के सदस्य बने रहेंगे.
पहली बार गोविंद देव गिरि संभालेंगे बैठक की जिम्मेदारी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद से अब तक सभी बैठकों की तैयारी, एजेंडा तय करने और बैठक की प्रक्रिया का संचालन महासचिव चंपत राय ही करते रहे हैं. लेकिन उनके इस्तीफे के बाद इस बार बैठक की सूचना जारी करने से लेकर एजेंडा तय करने तक की जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने संभाली है.
इन पांच प्रमुख मुद्दों पर होगी चर्चा
बैठक में ट्रस्ट कई महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय ले सकता है. इनमें प्रमुख रूप से-
- महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला.
- राम मंदिर चढ़ावा मामले में गठित एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट पर चर्चा.
- मंदिर के पैसे और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और बेहतर बनाने पर चर्चा.
- वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय और अन्य वित्तीय प्रस्तावों पर विचार.
- अध्यक्ष की अनुमति से अन्य आवश्यक विषयों पर चर्चा.
ट्रस्टी का इस्तीफा कैसे होता है मंजूर?
ट्रस्ट के नियमों के अनुसार केवल इस्तीफा देने से किसी ट्रस्टी का पद समाप्त नहीं हो जाता. संबंधित सदस्य को कम से कम एक महीने पहले लिखित सूचना देनी होती है. इसके बाद ट्रस्ट बोर्ड अगली बैठक में इस्तीफे पर विचार कर उसे स्वीकार या अस्वीकार करता है. इसी तरह यदि किसी ट्रस्टी को हटाने की जरूरत पड़ती है तो उससे पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है. अंतिम निर्णय ट्रस्ट के दो-तिहाई बहुमत से लिया जाता है.
ट्रस्ट में कितने सदस्य हैं?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अधिकतम 15 सदस्य हो सकते हैं, जिनमें तीन पदेन और 12 आजीवन सदस्य शामिल हैं. आजीवन ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद पहले से रिक्त है. वहीं चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के सदस्यों की संख्या और जिम्मेदारियों को लेकर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है.
नए ट्रस्टी की नियुक्ति का क्या है प्रावधान?
ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, नए ट्रस्टी को शामिल करने का फैसला ट्रस्ट बोर्ड ही करता है. किसी नए सदस्य की नियुक्ति के लिए बोर्ड के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होती है. वहीं, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से नामित पदेन सदस्यों की नियुक्ति अलग प्रक्रिया के तहत की जाती है.
ऑनलाइन भी शामिल हो सकते हैं कुछ सदस्य
बैठक में सभी ट्रस्ट सदस्यों को आमंत्रित किया गया है. उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन के ऑनलाइन माध्यम से शामिल होने की संभावना है. यदि अन्य कोई सदस्य अयोध्या नहीं पहुंच पाते हैं तो उनके लिए भी वर्चुअल माध्यम से जुड़ने की व्यवस्था रखी गई है.
राम मंदिर चढ़ावा मामले के बाद हो रही इस बैठक को ट्रस्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि ट्रस्ट चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर क्या फैसला लेता है और मंदिर के प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रबंधन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं. –कोमल अग्रवाल की रिपोर्ट
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By राधेश्याम कुशवाहा
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