बलिया से आरा-पटना की दूरी होगी कम, यहां गंगा पर बनेगा 1600 करोड़ से आधुनिक फोरलेन पुल

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बलिया आरा गंगा पर पुल (सांकेतिक तस्वीर)

UP News: उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के आरा-पटना के बीच आवागमन आसान बनाने के लिए गंगा नदी पर 1600 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फोरलेन पुल बनाया जाएगा, इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और विकास को नई गति मिलेगी.

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UP News: दशकों से जिस पुल का इंतजार पूर्वांचल और बिहार के लाखों लोग कर रहे थे, वह सपना अब हकीकत बनने की ओर बढ़ गया है. बलिया के महुली घाट पर गंगा नदी के ऊपर करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फोरलेन पुल का निर्माण होगा. केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी है और इसकी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) लगभग तैयार हो चुकी है. जल्द ही निर्माण प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. यह पुल सिर्फ गंगा के दो किनारों को नहीं जोड़ेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार की अर्थव्यवस्था, व्यापार और विकास को भी नई उड़ान देगा. परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को राष्ट्रीय राजमार्ग-922 से जोड़ने के लिए करीब 27 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क और आधुनिक सेतु का निर्माण किया जाएगा. निर्माण का जिम्मा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंपा जाएगा.

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80 नहीं, अब सिर्फ 40 किलोमीटर का सफर

महुली पुल बनने के बाद बलिया से बिहार के आरा तक पहुंचना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा. अभी जहां लोगों को लगभग 80 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, वहीं पुल बनने के बाद यह दूरी घटकर करीब 40 किलोमीटर रह जाएगी. इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी, जबकि व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी.

पूर्वांचल और बिहार के लाखों लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

इस परियोजना का लाभ केवल बलिया और आरा तक सीमित नहीं रहेगा. छपरा, सिवान, भोजपुर, बक्सर, गाजीपुर, मऊ, देवरिया और पूर्वांचल के कई जिलों के लोगों को भी तेज और बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा. दिल्ली, लखनऊ, पटना और वाराणसी जैसे बड़े शहरों तक यात्रा आसान होगी. किसानों, व्यापारियों, छात्रों और मरीजों के लिए यह परियोजना किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है.

साकार होगा वर्षों पुराना सपना

महुली गंगा पुल को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के उस सपने से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें गंगा के दोनों किनारों को विकास की मजबूत डोर से जोड़ने की कल्पना की गई थी. इस परियोजना को आगे बढ़ाने में पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त की पहल भी अहम मानी जाती है.

बदलेगी पूरे इलाके की तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुल बनने के बाद पूर्वांचल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में निवेश बढ़ेगा, नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे. लंबे समय से उपेक्षित माने जाने वाले इस क्षेत्र के लिए यह परियोजना विकास की नई इबारत लिख सकती है. महुली का यह पुल केवल कंक्रीट और लोहे का ढांचा नहीं होगा, बल्कि पूर्वांचल और बिहार के लाखों लोगों की उम्मीदों, सुविधाओं और विकास का नया प्रतीक बनेगा.

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