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UP: डिप्टी स्पीकर के इलेक्शन में BJP विधायकों की क्रॉस वोटिंग, चुनाव से पहले सीएम योगी के लिए कितना मुश्किल?

Updated at : 19 Oct 2021 11:53 AM (IST)
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UP: डिप्टी स्पीकर के इलेक्शन में BJP विधायकों की क्रॉस वोटिंग, चुनाव से पहले सीएम योगी के लिए कितना मुश्किल?

Deputy Speaker Election in UP: बीजेपी के सीतापुर सदर से विधायक राकेश राठौर ने डिप्टी स्पीकर चुनाव में सपा प्रत्याशी नरेंद्र वर्मा के पक्ष में वोट किया है. वहीं दो से तीन विधायकों का नाम अभी आलाकमान पता लगाने में जुट गई है.

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले सत्ताधारी बीजेपी को एसेंबली के फ्लोर टेस्ट में बड़ा झटका लगा है. बीजेपी के तीन से चार विधायकों ने डिप्टी स्पीकर के चुनाव में व्हिप जारी होने के बावजूद सपा प्रत्याशी को वोट दे दिया. वहीं अपने विधायक के क्रॉस वोटिंग करने से बीजेपी आलाकमान सकते में है.

रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के सीतापुर सदर से विधायक राकेश राठौर ने डिप्टी स्पीकर चुनाव में सपा प्रत्याशी नरेंद्र वर्मा के पक्ष में वोट किया है. वहीं दो से तीन विधायकों का नाम अभी आलाकमान पता लगाने में जुट गई है. चुनाव से पहले सत्तापक्ष में हुई क्रॉस वोटिंग ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है.

बसपा में भी टूट– इधर, बीजेपी के अलावा बसपा में भी बड़ी टूट देखने को मिली है. बताया जा रहा है कि फ्लोर टेस्ट में बसपा के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है. वहीं अपना दल के दो विधायक और तीन विधायक सुहेलदेव समाज पार्टी के सपा प्रत्याशी को अपना मत दिया.

कांग्रेस की आदिति सिंह ने दिया बीजेपी को वोट- वहीं कांग्रेस के दो विधायकों ने बीजेपी कैंडिडेट को अपना वोट दिया है. रायबरेली सदर से विधायक आदिति सिंह ने हाईकमान के निर्देश को दरकिनार करते हुए बीजेपी को वोट दिया. वहीं पिछली बार कांग्रेस ने नोटिस जारी किया था, लेकिन अब तक पार्टी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई.

वहीं सदन में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने सत्तारूढ़ दल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उत्‍तर प्रदेश का संसदीय इतिहास लिखा जाएगा तो आज का दिन सबसे काला होगा. मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि साढ़े चार वर्ष में न तो लिखित और न ही मौखिक किसी भी तरह उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए कोई संवाद नहीं किया गया.चौधरी ने कहा कि यह संसदीय परंपराओं का घनघोर अपमान है

उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर परंपराओं को तोड़ने का आरोप लगाते हुए यह भी दावा किया कि जब भी कोई उपाध्यक्ष निर्वाचित होता है तो उसे सदन की पीठ (अध्यक्ष की कुर्सी) पर आसीन कराकर बधाई दी जाती है लेकिन, नितिन अग्रवाल को नेता विरोधी दल के बगल में उपाध्यक्ष के बने आसन पर ही बिठाकर बधाई दी गई। उन्होंने निर्वाचित उपाध्यक्ष को बधाई देने के साथ यह भी कहा कि ये ‘लोला’ (भोला भाला) हैं.

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