औरंगाबाद का 'उमंगा' धाम: 52 एकड़ में फैले 52 ऐतिहासिक मंदिर, अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के बावजूद बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा यह पर्यटन स्थल

Author Vinay singh|Edited by Sakshi Kumari
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उमंगा पहाड़ के दृश्य ,उमंगेश्वरी मंदिर

उमंगा पहाड़ के दृश्य ,उमंगेश्वरी मंदिर

Aurangabad Umanga Hill Tourism : औरंगाबाद की उमंगा पहाड़ी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होने के बावजूद उपेक्षित है. करीब 52 एकड़ में फैली यह जगह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की राह देख रही है. यहाँ की खासियतों को जानें.

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Aurangabad Umanga Hill Tourism : एक ओर राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर औरंगाबाद के मदनपुर प्रखंड मुख्यालय के दक्षिण-पश्चिम में स्थित उमंगा पहाड़ी आज भी विकास की बाट जोह रही है. करीब 52 एकड़ में फैली यह पहाड़ी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और मनोरंजन के दृष्टिकोण से बेहद समृद्ध है,फिर भी इसे अब तक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जा सका है.

पहाड़ी के बगल से गुजरती हैं सड़कें

यह पहाड़ी हरे-भरे पेड़ों, ऊंची-नीची पठारी संरचनाओं और मनमोहक वादियों से घिरी हुई है. पहाड़ी के बगल से गुजरने वाली सड़क इसकी सुंदरता को और निखारती है. जंगलों के बीच से गुजरती यह सड़क दक्षिण दिशा के गांवों तक जाती है, जहां से पर्यटक प्राकृतिक नजारों का भरपूर आनंद उठाते हैं. स्थानीय स्तर पर यह एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सुकून और मनोरंजन के लिए पहुंचते हैं.

कई आकर्षक स्पॉट और प्राकृतिक सौंदर्य

उमंगा पहाड़ी पर छोटे-बड़े कई आकर्षक स्थल मौजूद हैं. उबड़-खाबड़ रास्तों के बीच बच्चों के खेलने और घूमने के लिए कई सुरक्षित स्थान हैं. पहाड़ी के नीचे स्थित हनुमानगढ़ी तालाब इसकी खूबसूरती को और बढ़ाता है. वहीं, बीच-बीच में बने प्राकृतिक स्पॉट परिवारों के लिए पिकनिक और सैर-सपाटे का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं.

अमर कुंड और झरनों का आकर्षण

पहाड़ी के पूर्वी भाग में सहस्त्र शिवलिंगी के पास स्थित अमर कुंड सैलानियों को विशेष रूप से आकर्षित करता है. बरसात के मौसम में यहां कई छोटे-छोटे झरने बहने लगते हैं, जिनकी कल-कल ध्वनि वातावरण को और भी मनमोहक बना देती है. सुबह-शाम इन झरनों के पास लोगों की भीड़ लगी रहती है.

धार्मिक महत्व भी कम नहीं

उमंगा पहाड़ी केवल प्राकृतिक ही नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. यहां उमंगेश्वरी मंदिर, सूर्य मंदिर, भुवनेश्वरी मंदिर, मटुक भैरवनाथ एवं गौरी शंकर मंदिर सहित करीब 52 मंदिरों की श्रृंखला है. इन मंदिरों में समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ आयोजित होते रहते हैं, जिससे यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए भी खास बन जाता है.

आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर

स्थानीय आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि इस पहाड़ी पर कई दुर्लभ औषधीय पौधे मौजूद हैं, जो हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और त्वचा रोगों के इलाज में कारगर हो सकते हैं. उमंगेश्वरी मंदिर के पुजारी बालमुकुंद पाठक के अनुसार, यदि सरकार इस दिशा में शोध कराए, तो यह क्षेत्र आयुर्वेदिक उपचार का बड़ा केंद्र बन सकता है.

मौसम के साथ बढ़ती है रौनक

नववर्ष, मकर संक्रांति और बसंत पंचमी जैसे अवसरों पर यहां सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है. जाड़े के पूरे मौसम में यह पहाड़ी पिकनिक स्पॉट के रूप में गुलजार रहती है.बसत श्री पंचमी के मेले में लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

विकास की मांग तेज

उमंगा मंदिर के पुजारी दिलीप पाठक का कहना है कि यह पहाड़ी प्राकृतिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद समृद्ध है. यदि सरकार इसे विकसित करे, तो यह क्षेत्र का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है। उन्होंने बताया कि कई बार अधिकारी यहां आकर योजनाएं बना चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है.

उमंगा पहाड़ी में पर्यटन के विकास की अपार संभावनाएं हैं. जरूरत है तो केवल सरकारी पहल, आधारभूत सुविधाओं और योजनाबद्ध विकास की, ताकि यह अनमोल धरोहर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सके.

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