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Yogini Ekadashi 2022: इस विधि से करें योगिनी एकादशी का व्रत, यहां से जानें शुभ मुहूर्त और अन्य खास बातें

Updated at : 23 Jun 2022 2:55 PM (IST)
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Yogini Ekadashi 2022: इस विधि से करें योगिनी एकादशी का व्रत, यहां से जानें शुभ मुहूर्त और अन्य खास बातें

Yogini Ekadashi 2022: इस साल योगिनी एकादशी व्रत शुक्रवार 24 जून 2022 यानी कल रखा जाएगा. 24 जून को शुक्रवार भी है. इसलिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष फल लोगों को प्राप्त होगा.

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Yogini Ekadashi Vrat 2022 : योगिनी एकादशी का व्रत हर वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. इस साल ये व्रत शुक्रवार 24 जून 2022 यानी कल रखा जाएगा. 24 जून को शुक्रवार भी है. इसलिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष फल लोगों को प्राप्त होगा.

योगिनी एकादशी के शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि शुरू : जून 23, 2022 को रात 09 बजकर 40 मिनट पर आरंभ
एकादशी तिथि समाप्त : जून 24, 2022 को रात 11बजकर 13 मिनट पर खत्म
पारण का समय : 25 जून सुबह 05 बजकर 52 मिनट से 8 बजकर 32 मिनट पर

योगिनी एकादशी व्रत महत्व

धार्मिक ग्रंथों में एकादशी की महत्ता को बताया गया है. स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अगहन माह में शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी को गीता उपदेश दिया है. अतः एकादशी पर्व का विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्रती को हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के समतुल्य फल की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही व्रती के सभी दुःख, दर्द, कष्ट और क्लेश दूर हो जाते हैं.

योगिनी एकादशी पूजा विधि

योगिनी एकादशी की शुरुआत दशमी तिथि से हो जाती है. इस दिन व्रती को लहसुन, प्याज और तामसी भोजन का परित्याग कर देना चाहिए. निशाकाल में भूमि पर शयन करना चाहिए. एकादशी को ब्रह्म बेला में उठकर सर्वप्रथम अपने आराध्य देव को स्मरण और प्रणाम करना चाहिए. इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत होकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करना चाहिए.

तत्पश्चात, आमचन कर व्रत संकल्प लें. अब भगवान भास्कर को जल का अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा, फल, फूल, दूध, दही, पंचामृत, कुमकुम, तांदुल, धूप-दीप आदि से करें. दिनभर उपवास रखें. व्रती चाहे तो दिन में एक फल और एक बार पानी ग्रहण कर सकते हैं. शाम में आरती-प्रार्थना के बाद फलाहार करें. अगले दिन पूजा-पाठ संपन्न कर व्रत खोलें.

क्यों खास होती है योगिनी एकादशी

योगिनी एकादशी के बाद देवशयनी एकादशी मनाई जाती है.धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु 4 महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं.इसलिए योगिनी एकादशी को महत्वपूर्ण समझा जाता है.

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