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विश्व साइकिल दिवस: सामान्य से स्टाइलिस्ट साइकिल तक की है डिमांड, ऐसा है कारोबार

Updated at : 03 Jun 2023 6:00 AM (IST)
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विश्व साइकिल दिवस: सामान्य से स्टाइलिस्ट साइकिल तक की है डिमांड, ऐसा है कारोबार

साइकिल चलाने के कई फायदे हैं. सेहतमंद रहने के साथ ही इससे पर्यावरण की सुरक्षा की जा सकती है.

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बोकारो, रंजीत कुमार. वाहनों के ज्यादा इस्तेमाल ने पर्यावरण के साथ-साथ लोगों की सेहत को भी नुकसान पहुंचाया है. यही कारण है कि लोगों को साइकिल की उपयोगिता समझाने और इसे इस्तेमाल में लाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से हर साल तीन जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है. बात अगर बोकारो की करें तो यहां हर दिन 70 से 75 हजार रुपये की साइकिल की बिक्री होती है. इस तरह हर माह 21 से 22 लाख रुपये और सालाना करीब ढाई करोड़ रुपये का कारोबार होता है. फिलहाल बोकारो में साइकिल की 12 बड़ी दुकानें हैं, जबकि एक दर्जन के आसपास छोटी दुकानें चल रही हैं. साइकिल की बढ़ती कीमत और बदल रहे स्वरूप के कारण कई दुकानदारों ने साइकिल के बाजार से किनारा कर लिया है. हालांकि साइकिल हर वर्ग को पसंद है. मजदूर को सामान्य साइकिल चाहिए, तो सभ्रांत लोगों को स्टाइलिस्ट साइकिल चाहिए. कुछ लोगों के लिए साइकिल व्यायाम का हिस्सा है. कई लोग सुबह-शाम साइकिल की सवारी करते देखे जा सकते हैं. इससे लोगों की सेहत सुधर रही है. पर्यावरण की सुरक्षा भी हो रही है.

साइकिल चलाने के कई फायदे हैं. सेहतमंद रहने के साथ ही इससे पर्यावरण की सुरक्षा की जा सकती है. 30 वर्ष से अधिक उम्र के एक व्यक्ति का शरीर लगभग 2000 कैलोरी ग्रहण करता है. ऐसे में साइकिल सहित दूसरी शारीरिक गतिविधियों से 900 कैलोरी तक कम किया जा सकता है. रोज एक घंटे साइकिल चलाने से लगभग 300 कैलोरी तक बर्न किया जा सकता है. रोज 30 से 60 मिनट तक साइकिल चलाना चाहिए. डब्ल्यूएचओ के अनुसार सप्ताह में ढाई घंटे तक शारीरिक गतिविधियां करें. इसमें व्यायाम, दौड़ना, सैर, साइकिलिंग आदि शामिल हो – डॉ अनन्या प्रसाद, जेनरल फिजिशियन

सेक्टर छह के दुकानदार जनार्दन सिंह ने कहा कि ज्यादातर समय साइकिल ही चलाता हूं. इसने मुझे स्वस्थ जीवन दे रखा है. रोजाना सुबह साइकिल से 10 किलोमीटर का सफर तय करता हूं. अब तो व्यायाम का हिस्सा बना लिया है. बच्चों को भी साइकिल चलाने के लिए प्रेरित करता हूं. स्वस्थ शरीर के लिए साइकिलिंग जरूरी है. रोजाना लगभग 10 से 15 किलोमीटर साइकिल चलाने वाले ग्रुप के सदस्य डॉ मनोज श्रीवास्तव, डॉ शाहनवाज अनवर, राजेश कुमार, गुप्तेश्वर सिंह ने बताया कि साइकिल चलाना सेहत के लिए लाभदायक है. साथ ही पर्यावरण की भी सुरक्षा हो रही है. लोगों को संकल्प लेना होगा कि वाहनों का इस्तेमाल कम करें. खासकर छोटे-छोटे काम के लिए साइकिल का उपयोग करें. चास के साइकिल विक्रेता उदय कुमार ने बताया कि फीचर से लैस गियर वाली साइकिल बाजार में आ गयी है. पहले लोगों के पास सामान्य साइकिल ही हुआ करती थी. जिस पर कैरियर लगा रहता था. इस पर सामान रख कर ले जाना व जरूरत पड़ने पर किसी व्यक्ति को बैठाना आसान था. कई बार तीन-तीन लोग साइकिल पर सवारी करते थे. वर्ष 1990 के बाद से साइकिल की बिक्री में बढ़ोतरी आयी, लेकिन कोरोना काल के बाद से मांग घटने लगी. बिहार साइकिल, चास के उदय कुमार ने बताया कि चार हजार से 35 हजार तक की साइकिल उपलब्ध है. अधिकतर लोग पांच हजार की साइकिल की मांग करते हैं. आर्थिक परेशानी के कारण लोग साइकिल कम खरीद रहे हैं. रोजाना 50 से 55 लोग पूछताछ करते हैं. कई लोग साइकिल खरीदने का कारण मोटापा व पैर दर्द की समस्या बताते हैं. उसी के अनुसार साइकिल लेते हैं. साइकिल खरीदने के पीछे स्वास्थ्य बेहतर बनाने का उद्देश्य होता है.

साइकिल चलाने के फायदे : हृदय स्वस्थ रहता है, वजन नियंत्रण में रहता है, टाइप टू मधुमेह का जोखिम कम होता है, मांसपेशियां व हड्डियां मजबूत होती हैं, कैंसर का जोखिम कम होता है, गठिया की रोकथाम में मददगार है, तनाव कम होता है.

विश्व साइकिल दिवस -1947 में आजादी के बाद कई दशक तक भारत में साइकिल यातायात व्यवस्था की अनिवार्य हिस्सा बनी. खासतौर पर 1960 से लेकर 1990 तक भारत में ज्यादातर परिवारों के पास साइकिल थी. यह व्यक्तिगत यातायात का सबसे ताकतवर व किफायती साधन था. -विश्व साइकिल दिवस को मनाने की शुरुआत साल 2018 में की गयी थी. अप्रैल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व साइकिल दिवस मनाने का फैसला लिया और इसके लिए 3 जून का दिन तय किया गया. इसके बाद पहली बार 3 जून को 2018 को ये दिन सेलिब्रेट किया गया. -संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साइकिल दिवस को 3 जून को मनाने की घोषणा की तो तमाम देशों ने इसका समर्थन किया. इसको लेकर एक कैंपेन चलाया गया था, जिसका 56 से ज्यादा देशों ने समर्थन किया था. इस दिन कई जगहों पर साइकिल रेस का आयोजन किया जाता है.

द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार पिछले एक दशक में साइकिल चालकों की संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में 43 फीसदी से बढ़कर 46 फीसदी हुई है. वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह संख्या 46 फीसदी से घटकर 42 फीसदी पर आ गयी है. मुख्य वजह साइकिल सवारी का असुरक्षित होना बताया जाता है. – लगातार बढ़ रहे प्रदूषण की वजह से दुनिया के बहुत से देशों में साइकिल चलाने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है. नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम में सिर्फ साइकिल चलाने की ही अनुमति है. भारत में दिल्ली, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद व चंडीगढ़ में साइकिल लेन का निर्माण किया गया है. यूपी में भी एशिया का सबसे लंबा साइकिल हाइवे बना है. इसकी लंबाई करीब 207 किलोमीटर से अधिक है.

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