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बंगाल में माओवादियों की गतिविधि से दामोदर नदी इलाके में दहशत, ममता सरकार की नींद उड़ी

Updated at : 27 Apr 2022 11:54 AM (IST)
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बंगाल में माओवादियों की गतिविधि से दामोदर नदी इलाके में दहशत, ममता सरकार की नींद उड़ी

माओवादियों के पसरते पैर से दामोदर नदी के आसपास के क्षेत्र के लोगों में भय और आतंक साफ देखा जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि किसी बढ़ी घटना को अंजाम देने के उद्देश्य से ही उक्त सीमावर्ती जिलों में माओवादियों के कार्यकलाप बढ़ रहा है.

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पानागढ़ : पश्‍चिम बंगाल में बढ़ रहे माओवादी गतिविधियों के कारण इनके खिलाफ राज्य पुलिस और एसटीएफ द्वारा गिरफ्तारी तेज हो गयी है .लेकिन इन सबके बीच बांकुड़ा और बीरभूम सीमावर्ती जिलों से सटे पूर्व बर्दवान जिले के पानागढ़ सेना छावनी के पीछे इलाके में माओवादी गतिविधियों के कारण दामोदर नदी के किनारे रहने वाले ग्रामीणों में आतंक देखा जा रहा है.

सरकार की नींद उड़ने लगी

बीरभूम जिले से विश्वभारती के पूर्व छात्र समेत दो को एसटीएफ ने माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार कर बांकुड़ा जिला ले जाया गया है. इधर हाल के दिनों में बांकुड़ा और पुरुलिया में माओवादियों की बढ़ती गतिविधि से राज्य सरकार की नींद उड़ने लगी है. माओवादी गतिविधि का क्या पानागढ़ सेना छावनी पर असर पड़ सकता है कि नही इसे लेकर खुफिया विभाग की सकते में है. चूंकि पानागढ़ सेना छावनी के पीछे कुछ ही किलोमीटर पर बांकुड़ा जिला मौजूद है.

माओवादी चहल पहल बढ़ी

दामोदर नदी के इस पार पूर्व बर्दवान का पानागढ़ सेना छावनी तो दूसरी ओर बांकुड़ा जिला विस्तार इलाका मौजूद है. जहां माओवादी चहल पहल बढ़ती देखी जा रही है. दामोदर नदी के किनारे रहने वाले ग्रामीणों में इस बात को लेकर आतंक है कि कई माओवादी के निशाने पर वे लोग न हो. हालांकि एक क बाद एक माओवादी पोस्टर मिलने से इलाके के लोगों में भय और आतंक देखा जा रहा है. पानागढ़ सेना छावनी और पानागढ़ वायु सेना जैसे देश के सुरक्षा से जुड़े फोर्स और अस्त्र शस्त्र भंडार होने के कारण कही माओवादियों के टारगेट पर तो नही है. इस बात से इनकार नही किया जा सकता.

दक्षिण बंगाल में माओवादियों की गतिविधियों में काफी इजाफा

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि दक्षिण बंगाल में माओवादियों की गतिविधियों में काफी इजाफा हुआ है. लेकिन इसका मूल कारण क्या है. यह स्पष्ट नही हो पा रहा है. माओवादी की बढ़ती गतिविधियों को लेकर पानागढ़ सेना छावनी की सुरक्षा को लेकर क्या कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है कि नही इसे लेकर पानागढ़ सेना छावनी की खुफिया विभाग की ओर से कोई टिप्पणी नही मिल पाई है. लेकिन दामोदर नदी के किनारे ही बांकुड़ा जिले से सटे इस महत्वपूर्ण इलाके को सुरक्षित रखने के लिए सेना की ओर से कोई कदम उठाया जा रहा है कि नही इसे लेकर कोई सुगबुगाहट नही देखने को मिल रही है.

लोगों में भय और आतंक का माहौल

इधर माओवादियों के पसरते पैर से दामोदर नदी के आसपास के क्षेत्र के लोगों में भय और आतंक साफ देखा जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि किसी बढ़ी घटना को अंजाम देने के उद्देश्य से ही उक्त सीमावर्ती जिलों में माओवादियों के कार्यकलाप बढ़ रहा है. बताया जाता है कि विश्वभारती के पूर्व छात्र को माओवादी सन्देह में गत रविवार को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था.

दो माओवादी को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया

टीपू सुल्तान उर्फ मुस्तफा तथा अर्कदीप गोस्वामी नामक दो माओवादी को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था. एसटीएफ सूत्रों के अनुसार वर्ष 2019 में पश्चिम मेदिनीपुर जिला पुलिस टीपू को गिरफ्तार की थी. बाद में जमानत पर टीपू रिहा हुए थे. इसके पूर्व वर्ष 2021 में झारग्राम पुलिस ने टीपू को देशद्रोह अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था. इस बार स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने माओवादी संदेह पर टीपू सुल्तान को गिरफ्तार किया. बताया जाता है कि इधर नए सिरे से झारग्राम, पश्चिमी मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पुरुलिया और अन्य जिलों में माओवादियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. संदिग्धों की सूची में बीरभूम में झारखंड से सटे इलाके शामिल हैं. इन इलाकों में पहले ही हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. राज्य के पुलिस डीजी मनोज मालवीय ने इन जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों के साथ बैठकें की हैं.

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पुलिस और एसटीएफ ने धर पकड़ अभियान शुरू किया

माओवादी गतिविधियों के बढ़ने के कारण ही इस दिशा में राज्य पुलिस और एसटीएफ ने धर पकड़ अभियान शुरू कर दिया है.बांकुड़ा में मंगलवार को माओवादी के पोस्टर मिलने से फिर हड़कंप मच गया है. पोस्टरों में किशनजी की मौत का बदला लेने की धमकी दी गई है. इससे पहले खुफिया विभाग ने खबर दी थी कि जंगलमहल में माओ की हरकतें बढ़ रही है. इस स्थिति में, पश्चिम बंगाल और उसके तीन पड़ोसी राज्यों उड़ीसा, बिहार और झारखंड के मुख्य सचिव और गृह सचिव ने एक बैठक की है. पता चला है कि बैठक में माओवादियों की समस्या के अलावा बांध से पानी छोड़ने और बरसात के मौसम में नदी के पानी के वितरण के मुद्दे पर भी चर्चा हुई.

रिपोर्ट : मुकेश तिवारी

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