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पत्थर माइंस और क्रशर बंद करने को लेकर धनबाद के अमलखोरी गांव में 90 दिनों से ग्रामीणों का धरना जारी

Updated at : 21 Oct 2022 8:24 PM (IST)
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पत्थर माइंस और क्रशर बंद करने को लेकर धनबाद के अमलखोरी गांव में 90 दिनों से ग्रामीणों का धरना जारी

धनबाद जिला अंतर्गत पावापुर पंचायत के अमलखोरी गांव में माइंस और क्रशर को बंद कराने को लेकर ग्रामीण पिछले 90 दिनों से धरना पर बैठे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला. आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन पर कई आरोप लगाये हैं.

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Jharkhand News: धनबाद जिला अंतर्गत तोपचांची प्रखंड के अमलखोरी गांव में पत्थर खदान और क्रशन को बंद कराने को लेकर पिछले 90 दिनों से ग्रामीण धरने पर बैठे हैं. ग्रामीणों ने कहा कि पूरे राज्य में अवैध खदान और क्रशर को राज्य सरकार बंद करा रही है. वहीं, अमलखोरी में आज भी खदान और क्रशर चालू है. इसको बंद कराने को लेकर ही ग्रामीण धरने पर बैठे हैं.

ग्रामीणों ने लगाया आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस से निकलने वाले पानी को अपने खेतों में बहने नहीं देंगे. वहीं, ब्लास्टिंग से उड़ने वाले पत्थर को भी अपने खेतों में गिरने नहीं देंगे. कहा कि तीन माह से धरना पर बैठे उनकी समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस जबरन खदान और क्रशर चालू रखना चाहती है. वहीं, क्रशर संचालक द्वारा कई ग्रामीणों पर रंगदारी का केस किया गया, जबकि ग्रामीणों की शिकायत को पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही है.

ग्रामीणों संग सीओ ने की चर्चा, पर नहीं बनी बात

इधर, शुक्रवार को बीडीओ सह प्रभारी सीओ राजेश एक्का धरना दे रहे ग्रामीणों के पास पहुंचे. सीओ के साथ मेसर्स छिन्नमस्तिका स्टोन मिनरल्स, मेसर्स सोन बाबा स्टोन मिनरल्स माइंस और श्री बाला जी स्टोन चिप्स एलएलपी के संचालक के साथ धरने पर बैठे ग्रामीणों के पास पहुंचे. इस दौरान ग्रामीणों से बात हुई, पर समस्या का समाधान नहीं निकला.

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ग्रामीणों को अनिश्चितकालीन धरना जारी

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ग्रामीणों को डरा रही है. उनके आवेदनों पर विचार नहीं किया जा रहा है. दर्जनों पुलिस भेजकर और डर का माहौल बनाकर माइंस और क्रशर चालू कराना चाहती है. ग्रामीण एकस्वर में कहते हैं कि जब तक क्षेत्र से खदान और क्रशर को बंद नहीं किया जाता और ग्रामीणों पर लगे आरोप को वापस नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा.

रिपोर्ट : दीपक पांडेय, तोपचांची, धनबाद.

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Samir Ranjan

लेखक के बारे में

By Samir Ranjan

Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media

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