पूर्वोत्तर रेलवे के पीसीएमएम दफ्तर पर सीबीआई के बाद विजिलेंस का छापा, कोरोना काल के दस्तावेज खंगालने से हड़कंप
Published by : Sanjay Singh Updated At : 26 Sep 2023 2:44 PM
जानकारी के अनुसार विजिलेंस की टीम ने सूक्ति एसोसिएट फर्म के प्रोपराइटर और कर्मचारियों से भी पूछताछ की है. कुछ जरूरी फाइलों को टीम ने अपने कब्जे में जे लिया हैं. विजिलेंस की टीम की जांच पड़ताल अभी भी जारी है. हालांकि रेल प्रशासन विजिलेंस टीम के इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहा है.
Gorakhpur News: पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर के सामग्री प्रबंधन विभाग में भ्रष्टाचार का मामला और गहराता जा रहा है. कुछ दिन पहले तीन लाख रुपए रिश्वत के साथ पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक रंगे हाथों पकड़े गए थे. सीबीआई के बाद अब रेलवे बोर्ड बिजनेस के कार्यकारी निदेशक की टीम भी रेलवे के प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक (पीसीएमएम) और स्टोर डिपो की सामान की खरीद फरोख्त की फाइलें खंगालने गोरखपुर पहुंच गई है.
रेलवे बोर्ड विजिलेंस के कार्यकारी निदेशक की टीम सोमवार को दोपहर बाद गोरखपुर पहुंच गई और देर शाम तक फाइलों की जांच पड़ताल करती रही. विजिलेंस टीम के आने की सुगबुगाहट होते हुए संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया. इस दौरान विजिलेंस की टीम ने विभाग की फाइलों की पड़ताल की. साथ ही सूक्ति एसोसिएट फार्म के दस्तावेजों को भी जांच की. इस दौरान टीम ने कोरोना संक्रमण के समय की गई आपूर्ति की जानकारी भी जुटाई.
जानकारी के अनुसार विजिलेंस की टीम ने सूक्ति एसोसिएट फर्म के प्रोपराइटर और कर्मचारियों से भी पूछताछ की है. कुछ जरूरी फाइलों को टीम ने अपने कब्जे में जे लिया हैं. विजिलेंस की टीम की जांच पड़ताल अभी भी जारी है. हालांकि रेल प्रशासन विजिलेंस टीम के इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहा है. लेकिन, विजिलेंस टीम की जांच से रेलवे के अधिकारी सन्नाटे में आ गए हैं.
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रेलवे बोर्ड विजिलेंस के कार्यकारी निदेशक की टीम रविवार को ही गोरखपुर पहुंच गई थी. जानकारों के मुताबिक तीन सदस्यों की टीम गोरखपुर पहुंची है. डायरेक्टर सहित दो अधिकारी सोमवार को गोरखपुर पहुंचे. टीम अभी गोरखपुर में हुई है. टीम सामग्री प्रबंधन विभाग में वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने में जुटी हुई है. सीबीआई और विजिलेंस की लगातार चल रही जांच यह बता रही है कि रेलवे में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं.
विजिलेंस टीम सामान की खरीद व बिक्री तथा लोकल खरीद में अनियमिता, किसी विशेष एजेंसी को लाभ पहुंचाने, रेलवे के वाहनों और उपकरणों के नाम पर हेराफेरी की शिकायत पर 23 मार्च को भी गोरखपुर पहुंची थी. आरोप था कि कॉविड काल के दौरान पूर्वोत्तर रेलवे के अस्पताल में लोकल खरीद मामले में दवा की सप्लाई में एक कंपनी को विशेष लाभ पहुंचाया गया था. रेलवे की एक बड़ी क्रेन को निष्प्रयोग बताकर प्राइवेट क्रेन को कार्य के लिए लगाया गया है.
इसके बाद विजिलेंस के अधिकारियों ने इस पूरे मामले की जांच की, जिसमें कुछ जरूरी फाइलों को कब्जे में लेकर अपने साथ ले गई थी. इसके बाद प्रकरण में उप मुख्य सामग्री प्रबंधक ऋतु राज का ट्रांसफर रेलवे के दूसरी जोन में हो गया था. इसके ठीक पांच माह बाद सामग्री प्रबंधन में भ्रष्टाचार की संरचना में सीबीआई ने गोरखपुर में पीसीएमएम को रिश्वत लेते उनके आवास से रंगे हाथों पकड़ा था.
अहम बात है कि गोरखपुर में विजिलेंस ही नहीं सीबीआई की टीम भी जमी हुई है. 13 सितंबर को सीबीआई की टीम ने गोरखपुर के कौवा बाग स्थित बंगला नंबर 23 से केसी जोशी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था. सूक्ति एसोसिएट फर्म के संचालक प्रभाव त्रिपाठी की शिकायत पर सीबीआई ने कार्रवाई की थी. सीबीआई ने केसी जोशी को तीन दिनों तक रिमांड पर लेने के बाद जेल भेज दिया था. वर्तमान में जोशी जेल में है.
सूक्ति एसोसिएट फर्म के प्रोपराइटर प्रमुख त्रिपाठी का आरोप है कि पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधन उनसे 7 लाख रुपए रिश्वत मांग रहे हैं. रकम नहीं देने पर जेम पोर्टल पर उनके फार्म का पंजीकरण निरस्त करने की धमकी दी है. सीबीआई को बताया था कि उनकी फर्म को गोरखपुर स्थित स्टोर डिपो के लिए तीन ट्रक की आपूर्ति का टेंडर मिला है. उन्हें सात लाख रुपए रिश्वत नहीं देने पर पंजीकरण के साथ टेंडर भी रद्द करने की धमकी दी गई है.
रिपोर्ट–कुमार प्रदीप,गोरखपुर
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By Sanjay Singh
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