उत्तरकाशी के हिमस्खलन में 16 लोगों की गई जान, राहत-बचाव में जुटी J&K के ऑल्टिट्यूड वायफेयर स्कूल की टीम
Published by : Agency Updated At : 06 Oct 2022 10:14 PM
Uttarakhand News: उत्तरकाशी में हुए हिमस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है. राज्य आपात अभियान केंद्र ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग स्थित हाई ऑल्टिट्यूड वायफेयर स्कूल की 14 सदस्यीय टीम भी आज से बचाव कार्य में जुट गयी है.
Uttarakhand News: उत्तरकाशी में हुए हिमस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है. नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने कहा कि बचावकर्मियों ने मौके से और 12 पर्वतारोहियों के शव बरामद किए हैं. वहीं, आपदा पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि बचाव और राहत दल लगातार काम कर रहे हैं.
बचाव और राहत दल लगातार काम कर रहे हैं। NDRF, SDRF और ज़िला प्रशासन की टीम लगातार काम कर रही है। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक 16 शवों को रिकवर किया जा चुका है। रेस्क्यू अभियान अभी भी जारी है: उत्तरकाशी आपदा पर उत्तराखंड के मुख्यंमत्री पुष्कर सिंह धामी, देहरादून pic.twitter.com/8Eu327cEOq
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 6, 2022
जारी है राहत और बचाव: NDRF, SDRF और जिला प्रशासन की टीम लगातार काम कर रही है. 16 शवों को रिकवर किया जा चुका है. रेस्क्यू अभियान अभी भी जारी है. उम्मीद की जा रही है कि 15 पर्वतारोही अब भी लापता हैं.
15 पर्वतारोही अब भी लापता: बता दें, पर्वतारोहियों का एक दल चढ़ाई के बाद लौटते के दौरान 17 हजार फुट की ऊंचाई पर द्रौपदी का डांडा-द्वितीय चोटी पर हिमस्खलन की चपेट में आ गया. जिसके बाद उनसे संपर्क भी टूट गया. हालांकि राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में काफी बाधा आ रही है.
खराब मौसम के कारण ही हेलीकॉप्टर को भी वापस बुला लिया है. हालांकि राज्य आपात अभियान केंद्र ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग स्थित हाई ऑल्टिट्यूड वायफेयर स्कूल की 14 सदस्यीय टीम भी आज से बचाव कार्य में जुट गयी है.
टीम का नेतृत्व कर रहे नायब सूबेदार अनिल कुमार ने पीटीआई/भाषा को बताया, ‘‘टीम में प्रशिक्षु सहित कुल 34 पर्वतारोही थे.” कुमार उन घायल 14 पर्वतारोहियों में से एक हैं जिन्हें एनआईए के बेस कैंप से लाकर बुधवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
उन्होंने बताया कि हिमस्खलन के दौरान 33 पर्वतारोहियों ने दरारों में छुपकर शरण ली थी. उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि मैं अन्य से आगे चल रहा है, मैं दरार के बायीं ओर लटक गया. जब बर्फ स्थिर होने लगी तो मैंने रस्सियां खोलीं और अपनी टीम के लोगों को बचाना शुरू किया.
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