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UP Chunav 2022: मेरठ में आज जेपी नड्डा की अग्नि परीक्षा, क्या सपा-रालोद गठबंधन को देंगे चुनौती?

Updated at : 11 Dec 2021 8:58 AM (IST)
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UP Chunav 2022: मेरठ में आज जेपी नड्डा की अग्नि परीक्षा, क्या सपा-रालोद गठबंधन को देंगे चुनौती?

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शनिवार को मेरठ आ रहे हैं. नड्डा आज यहां 25 हजार से अधिक बूथ अध्यक्षों को संबोधित करेंगे. सम्मेलन में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा समेत अन्य मंत्री भी शामिल होंगे.

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UP Chunav 2022: यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में अब कुछ ही महीने का समय बाकी है. ऐसे में बीजेपी अधिक से अधिक वाटरों को अपने पाले में लाने की हर संभव कोशिश में जुटी हुई है. इस बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शनिवार को मेरठ आ रहे हैं. नड्डा आज यहां 25 हजार से अधिक बूथ अध्यक्षों को न सिर्फ संबोधित करेंगे, बल्कि जीत का मंत्री भी देंगे.

जेपी नड्डा के अलावा डिप्टी सीएम भी रहेंगे मौजूद

बीजेपी ने चुनावी तैयारी को धार देने के लिए अपनी तैयारी तेज कर दी है. शनिवार को पश्चिम यूपी के 14 जिलों के 71 विधानसभा क्षेत्रों के 25 हजार बूथ अध्यक्षों को नड्डा जीत का मंत्र देंगे. ये सम्मेलन मेरठ के सुभारती विश्वविद्यालय के मैदान में हो रहा है. जहां बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, केंद्रीय पशुपालन एवं मत्स्य राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान, समेत बीजेपी के अन्य मंत्री और दिग्गज नेता भी उपस्थित रहेंगे.

बदले मिजाज को भापेंगे जेपी नड्डा

पहले के चुनावों की अपेक्षा इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मिजाज काफी बदला हुआ है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो, बीजेपी अब यहां पहले जितनी मजबूत नहीं रही. दरअसल, किसान आंदोलन के चलते यहा कि स्थिति में बहुत बदलाव आया है. आंदोलन जरूर खत्म हो गया है, लेकिन बीजेपी के प्रति किसानों की नाराजगी अभी भी जारी है, यही कारण है कि नड्डा चुनाव से पहले ही यहां की स्थिति को बेहतर बना लेना चाहते हैं.

वेस्ट यूपी में बीजेपी को चुनौती

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन ने पहले ही बीजेपी के खिलाफ माहौल बना दिया है. इसके अलावा 7 दिसंबर को मेरठ के दबथुवा में हुई सपा-रालोद की गठबंधन रैली भी बीजेपी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह ने यहां एक साथ लाखों की भीड़ को संबोधित किया था.

सपा-रालोद की नजर भी वेस्ट यूपी पर

सबसे अहम बात ये है कि सपा और रालोद का गठबंधन होने के बाद वेस्ट यूपी में यह गठबंधन की पहली रैली हुई. सिवालखास विधानसभा क्षेत्र के दबथुवा में इस रैली का आयोजन किया गया. दोनों पार्टियों ने इस रैली को ऐतिहासिक बनाने की हर संभव कोशिश की. रैली में काफी अधिक संख्या में भीड़ भी देखने को मिली. आइए जानतें हैं इस रैली का बीजेपी पर क्या असर पड़ सकता है.

क्या इस गठबंधन से बीजेपी को नुकसान होगा?

सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये उठता है कि क्या इस गठबंधन से बीजेपी को कोई नुकसान होगा. दरअसल, पश्चिमी यूपी में लगभग 13 सीटें ऐसी हैं, जिन पर जाट या यूं कहें कि किसानों का कब्जा है. वहीं कृषि कानून (अब वापस हो चुका है) और एमएसपी समेत अलग अलग मांगों को लेकर किसान बीजेपी से नाराज चल रहे हैं. किसानों की नाराजगी का फायदा रालोद को मिल सकता है. इसके अलावा राजनीतिक जानकारों की मानें तो, इन क्षेत्रों का मुस्लिम समुदाय पहले से ही बीजेपी से नाराज चल रहा, जिसका सीधा-सीधा फायदा सपा को होगा. ऐसे में ये गठबंधन बीजेपी को पश्चिमी यूपी में नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन इस नुकसान को जेपी नड्डा कितनी कम कर सकते हैं, ये देखने वाली बात होगी.

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