Corona Fear: हो सकता है साल भर टेनिस न हो पाये

Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 03 Apr 2020 2:27 PM

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Corona Fear: विंबलडन प्रमुख रिचर्ड लुईस ने स्वीकार किया कि उन्हें डर है कि 2020 का बाकी टेनिस सत्र भी कोरोना वायरस की भेंट चढ़ सकता है.

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Corona Fear: कोरोना वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है और दुनियाभर में इससे संक्रमित लोगों की संख्या 10 लाख के पार चली गई है तथा 50,000 लोग जान गंवा चुके हैं. वायरस का असर हर क्षेत्र में नजर आ रहा है. खेल में भी…विंबलडन प्रमुख रिचर्ड लुईस ने स्वीकार किया कि उन्हें डर है कि 2020 का बाकी टेनिस सत्र भी कोरोना वायरस की भेंट चढ़ सकता है. टेनिस के सभी टूर्नामेंट पिछले महीने के शुरू से ही बंद हैं और विंबलडन के दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार रद्द होने के बाद 13 जुलाई तक किसी टूर्नामेंट के होने की संभावना भी नहीं है.

दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित टेनिस प्रतियोगिता के रद्द किये जाने से पहले फ्रेंच ओपन ने मई जून में होने वाले अपने टूर्नामेंट को सितंबर-अक्टूबर तक टाल दिया था. इस तरह से क्ले कोर्ट और ग्रास कोर्ट का एक भी टूर्नामेंट इस सत्र में नहीं खेला जाएगा. ऑल इंग्लैंड क्लब के मुख्य कार्यकारी लुईस ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि यह कहना अवास्तविक होगा कि हो सकता है कि इस साल आगे कोई टेनिस टूर्नामेंट न हो. उन्होंने कहा कि लेकिन मैं चाहूंगा कि चीजें जल्द ही सामान्य हो जाएं ताकि जल्द से जल्द टूर्नामेंट शुरू हो सकें. कोई नहीं जानता कि क्या होगा.

दुनियाभर में कोरोना वायरस का संकट और गहराया

कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है. अभी तक एक दिन में सबसे अधिक मौत की संख्या अमेरिका से सामने आयी है. आधी से ज्यादा दुनिया के लॉकडाउन जैसे हालात में रहने के बावजूद यह विषाणु तेजी से फैल रहा है और अमेरिका, स्पेन तथा ब्रिटेन में हालात बेहद खराब हो गये हैं. इस वैश्विक महामारी से अर्थव्यवस्था भी चरमरा रही है. नये आंकड़ों के अनुसार, 66.5 लाख अतिरिक्त अमेरिकियों ने पिछले सप्ताह बेरोजगारी लाभ के लिए हस्ताक्षर किये. इसके साथ ही मार्च के पिछले दो हफ्तों में एक करोड़ लोग अपनी नौकरी गंवा चुके हैं.

अर्थशास्त्रियों ने किया आगाह

अर्थशास्त्रियों ने आगाह किया कि हालात और बिगड़ने वाले हैं. वित्तीय रेटिंग एजेंसी फिच ने गुरुवार को अनुमान जताया कि अमेरिका और यूरोजोन की अर्थव्यवस्थाएं इस तिमाही में 30 प्रतिशत तक सिकुडेंगी. विश्व नेताओं ने इस संकट से निपटने के लिए बड़े वित्तीय सहायता पैकेजों की घोषणा की है और विश्व बैंक ने 15 महीनों में 160 अरब डॉलर आपात नकदी जारी करने की योजना को मंजूरी दी.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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