4 साल का स्नातक कोर्स शुरू करने को लेकर बंगाल के सभी कुलपतियों को लिखा गया पत्र, 15 दिनों के अंदर देना है जवाब
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 05 Apr 2023 12:38 PM
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राष्ट्रीय शैक्षिक नीति 2020 के अनुपालन में उच्च शिक्षण संस्थानों की पहचान करने के लिए समिति बनायी गयी है, जहां चार वर्षीय यूजी कार्यक्रम शुरू किया जा सकता है.15 दिनों के अंदर समिति को अपनी राय देने के लिए कहा गया है.
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के अनुपालन में चार साल के स्नातक कोर्स शुरू करने के लिए राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखा गया है. इस पत्र में सभी वाइस चांसलरों को 15 दिनों के अंदर कमेटी को जवाब भेजने के लिए कहा गया है. चार साल के स्नातक कार्यक्रम को लागू करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए राज्य शिक्षा विभाग द्वारा गठित छह सदस्यीय समिति ने सभी राज्य सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों से जानना चाहा है कि क्या वे अगले शैक्षणिक वर्ष से कोर्स को लागू करने के लिए तैयार हैं.
समिति द्वारा लिखे गये पत्र में विश्वविद्यालयों को उन चुनौतियों के बारे में भी बताने के लिए कहा गया है, जो चार वर्षीय यूजी पाठ्यक्रम शुरू करने के दौरान आ सकती हैं. जादवपुर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर सुरंजन दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति ने अपनी पहली बैठक के बाद विश्वविद्यालयों से उनकी प्रतिक्रिया मांगने का फैसला किया है.
राज्य सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों और उनके संबद्ध कॉलेजों के साथ-साथ एकात्मक विश्वविद्यालय फिलहाल तीन वर्षीय स्नातक कोर्स चला रहे हैं. उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालयों से जवाब मांगे गये हैं, क्योंकि राष्ट्रीय शैक्षिक नीति (एनइपी) 2020 के अनुपालन में उच्च शिक्षण संस्थानों की पहचान करने के लिए समिति बनायी गयी है, जहां चार वर्षीय यूजी कार्यक्रम शुरू किया जा सकता है. वाइस चांसलरों को लिखे गये पत्र में 15 दिनों के अंदर समिति को अपनी राय देने के लिए कहा गया है.
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पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालयों को हितधारकों से परामर्श करने के बाद समिति को सूचित करना होगा. अगर विश्वविद्यालय 2023 शैक्षणिक सत्र से राष्ट्रीय पाठ्यचर्या और क्रेडिट ढांचे को लागू करने के लिए तैयार है, या विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए तैयार नहीं है, इसका स्पष्ट जवाब देना होगा. उनके सामने क्या चुनौतियां हैं और विश्वविद्यालय स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम के किसी भी संशोधन का सुझाव दे सकते हैं.
कमेटी के अध्यक्ष व जेयू के वाइस चांसलर सुरंजन दास ने बताया कि हम प्रतिक्रियाओं को संकलित करेंगे और उन्हें विभाग को भेजेंगे. विभाग ने सभी राज्य सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों को ””उचित कदम उठाने”” के लिए पत्र लिखने के बाद समिति के गठन की घोषणा की थी. कोर्स के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिए विश्वविद्यालय के कला संकाय में सभी विभागों के प्रमुखों और विज्ञान संकाय के शिक्षकों से मिलेंगे.
उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कलकत्ता विश्वविद्यालय, उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय और अन्य विश्वविद्यालय जिनके पास बड़ी संख्या में कॉलेज एफिलियेटिड हैं, उन्हें प्रणाली को लागू करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. चार साल के कार्यक्रम में एक छात्र को एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन साल के बाद स्नातक की डिग्री के साथ जाने की अनुमति होगी.
चौथा वर्ष पूरा करने वाले छात्र- पहले छह सेमेस्टर में कुल मिलाकर 75 प्रतिशत या उससे अधिक स्कोर करने वालों के लिए एक विकल्प, ””अनुसंधान के साथ ऑनर्स”” की डिग्री प्राप्त करेंगे. स्नातक छात्रों को कैंपस में अतिरिक्त चौथा वर्ष बिताने से शिक्षण और बुनियादी ढांचे पर भारी बोझ पड़ेगा, लेकिन यूजीसी कोई अतिरिक्त सहायता प्रदान करने पर मौन है. कलकत्ता विश्वविद्यालय ने भी अपने संबद्ध कॉलेजों के प्रिंसिपलों से इस निर्णय पर फीडबैक मांगा है.
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