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शिक्षक भर्ती घोटाला : कभी सिम कार्ड बेचने वाला TMC नेता शांतनु बनर्जी कैसे बन गया करोड़ों का मालिक

शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार तृणमूल नेता कुंतल घोष का करीबी माना जाने वाला शांतनु वर्ष 2005 में मोबाइल का सिम कार्ड और कॉस्मेटिक्स बेचता था. लेकिन वर्ष 2011 के बाद उसकी दौलत बढ़ने लगी थी.

West Bengal News: शिक्षक भर्ती घोटाले में सीबीआइ एवं इडी की जांच में नये-नये खुलासे हो रहे हैं. इस मामले में गिरफ्तार तृणमूल नेता शांतनु बंद्योपाध्याय की संपत्ति से संबंधित राज भी सामने आ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, घोटाले में गिरफ्तार तृणमूल नेता कुंतल घोष का करीबी माना जाने वाला शांतनु वर्ष 2005 में मोबाइल का सिम कार्ड और कॉस्मेटिक्स बेचता था. लेकिन वर्ष 2011 के बाद उसकी दौलत बढ़ने लगी थी.

सूत्रों के अनुसार, इडी को शांतनु के आलीशान घर, हुगली नदी किनारे स्थित बड़े उद्यान समेत कई संपत्तियों का पता चला है. बालागढ़ में उसका एक फार्म हाउस होने की भी जानकारी मिली है. शांतनु के पिता बिजली विभाग में कार्यरत थे. कार्यकाल में पिता की मृत्यु होने से उसे नौकरी मिल गयी. इसके बाद धीरे-धीरे शांतनु की राजनीति में एंट्री हुई, जिसके बाद उसकी संपत्ति बढ़ने लगी.

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बताया जा रहा है कि शांतनु को पहले हुगली के एक कॉलेज में तृणमूल छात्र परिषद की जिम्मेदारी मिली थी. उसके बाद वह ब्लॉक के साथ-साथ जिले में भी तृणमूल छत्र परिषद का नेता बन गया. फिर युवा नेता बना. वर्ष 2018 में तारकेश्वर से पंचायत चुनाव जीतने के बाद वह हुगली जिला परिषद का कर्माध्यक्ष बना.

इसके बाद ही शांतनु ने बालागढ़ में अपने घर के पास एक ढाबा खोला. साथ ही उसके पास होम-स्टे, बालागढ़ के चदरा बटाला इलाके में एक बड़ा रिसॉर्ट भी खोला. इसके अलावा शांतनु द्वारा कई जमीन भी गुमनाम तरीके से खरीदे जाने की बात सामने आ रही है.

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तृणमूल नेता शांतनु को 13 तक इडी की हिरासत में भेजा

प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने गत शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के नेता शांतनु बंद्योपाध्याय को गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के अगले दिन यानी शनिवार उसे विधाननगर महकमा अस्पताल में मेडिकल जांच के बाद बैंकशाल कोर्ट स्थित स्पेशल प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) कोर्ट में पेश किया गया, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शांतनु को 13 मार्च तक इडी हिरासत में भेज दिया गया.

सूत्रों के अनुसार, अदालत में सुनवाई के दौरान इडी ने दावा किया कि जांच में शांतनु के पास बेनामी संपत्ति होने का पता चला है. उन पर शिक्षक भर्ती घोटाले में करोड़ों रुपये हेरफेर का आरोप भी लगा है. साथ ही यह दावा किया कि शांतनु के मामले में गिरफ्तार कुंतल घोष व तृणमूल विधायक माणिक भट्टाचार्य ही नहीं, बल्कि तापस मंडल से भी संबंध हैं.

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शांतनु बंद्योपाध्याय पर यह भी आरोप लग रहा है कि वह कभी मोबाइल का सिम बेचा करता था, लेकिन राजनीति में आने और फिर शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ने के बाद बेशुमार दौलत का मालिक बन बैठा. उसके घर से नौकरी का आवेदन करने वाले करीब 300 से ज्यादा लोगों की एक सूची मिली है. साथ ही परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड की कॉपी व रोल नंबर का लिस्ट, सिफारिश पत्र के अलावा कई डिजिटल सबूत इडी के हाथ लगे हैं.

ऐसी ही सूची माणिक भट्टाचार्य के आवास से भी बरामद हुई थी, जिसमें कुछ अभ्यर्थियों के नाम हैं. शांतनु पर आरोप है कि वह प्राइमरी, अपर प्राइमरी व अन्य शिक्षकों को सीधी भर्ती व परीक्षा पास करवाने का लालच देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था और इसके बाद कुंतल घोष व तापस मंडल के जरिये रुपये बड़े नेताओं तक पहुंचाता था.

आरोप यह है कि शांतनु के जरिये करीब 20 अभ्यर्थियों को अवैध रूप से नौकरी मिली और प्रति अभ्यर्थियों से करीब पांच-पांच लाख रुपये लिये गये. इन अभ्यर्थियों की नौकरी के लिए शांतनु द्वारा माणिक से सिफारिश करने की बात भी जांच का अहम हिस्सा है.

इडी के अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि शांतनु की गिरफ्तारी वैसी ही थी, जैसी तृणमूल विधायक माणिक भट्टाचार्य के समय हुई थी. उन्होंने भी अपना बयान अपने हाथ से लिखा है. घोटाले में सामान्य योग्यता वालों को नौकरी नहीं मिली. शांतनु के घर से दस्तावेज मिलने के बाद विभिन्न सरकारी कार्यालयों से संपर्क किया गया है. जांच में मिली जानकारी और आरोपी द्वारा दिये बयान में गड़बड़ी मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

इडी के अधिवक्ता ने कहा कि शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के तहत उससे पूछताछ करना काफी अहम है. हालांकि, शांतनु के अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल की जमानत की याचिका की. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने शांतनु को फिलहाल इडी हिरासत में ही रखे जाने का निर्देश दिया.

निर्दोंष हूं, फंसाने की हो रही कोशिश : शांतनु

अदालत में लाये जाने के दौरान पत्रकारों के सवालों के जवाब में शांतनु ने कहा : मैं निर्दोष हूं. मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है. मैंने किसी से रुपये नहीं लिये हैं. जेल के अंदर के लोग उन्हें फंसा रहे हैं. उसे कौन फंसा रहा है, इस प्रश्न पर उन्होंने कुछ नहीं कहा. हालांकि उन्होंने इस सिलसिले में किसी का नाम नहीं लिया.

गौरतलब है कि हुगली जिला परिषद के कर्माध्यक्ष और तृणमूल नेता शांतनु को इडी ने गत शुक्रवार को सातवीं बार पूछताछ के लिए साॅल्टलेक स्थित केंद्रीय जांच एजेंसी के कार्यालय में बुलाया था. पूछताछ में उसके दिये बयान में गड़बड़ी मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

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