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झारखंड: घाघीडीह जेल के बंदियों को मिल रही तकनीकी शिक्षा, कारोबार कर ऐसे बनेंगे आत्मनिर्भर

Updated at : 29 May 2023 6:20 AM (IST)
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झारखंड: घाघीडीह जेल के बंदियों को मिल रही तकनीकी शिक्षा, कारोबार कर ऐसे बनेंगे आत्मनिर्भर

घाघीडीह जेल में बंदियों को कंप्यूटर, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबरिंग और सोलर लाइट बनाने का काम सिखाया जा रहा है. महिला बंदियों को भी अलग-अलग प्रशिक्षण कार्य सिखाये जा रहे हैं. जेल प्रबंधन की मानें तो कई बंदी प्रशिक्षण पूरा भी कर चुके हैं.

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जमशेदपुर, निखिल सिन्हा. घाघीडीह केंद्रीय कारा के बंदियों को तकनीकी शिक्षा दी जा रही है. इसका उद्देश्य प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाना है. बंदियों को तरह-तरह के व्यावसायिक प्रशिक्षण टाटा स्टील की ओर से दिया जा रहा है, ताकि जेल से निकलने के बाद वे अपराध की दुनिया में कदम न रख समाज की मुख्य धारा में शामिल होकर अपनी आजीविका का इंतजाम आसानी से कर सकें. इसके लिए जेल प्रबंधन की ओर से टाटा स्टील के सदस्यों को प्रशिक्षण देने की अनुमति दी गयी है.

बंदियों को दी जा रही ट्रेनिंग

घाघीडीह जेल में बंदियों को कंप्यूटर, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबरिंग और सोलर लाइट बनाने का काम सिखाया जा रहा है. महिला बंदियों को भी अलग-अलग प्रशिक्षण कार्य सिखाये जा रहे हैं. जेल प्रबंधन की मानें तो कई बंदी प्रशिक्षण पूरा भी कर चुके हैं. उनको प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र भी सौंप दिया गया है. जेल प्रबंधन ने बताया कि अलग-अलग बैच बना कर प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

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पुरुष इलेक्ट्रिशियन, तो महिलाएं सिलाई और बेकरी का ले रहीं प्रशिक्षण

जेल प्रबंधन के अनुसार जेल में बंद अधिकांश महिला बंदी की रूचि सिलाई और बेकरी का सामान बनाने में दिख रही है. महिलाओं को प्रशिक्षण के लिए सिलाई मशीन भी उपलब्ध कराया गया है. वहीं पुरुष बंदी की बात करें, तो पुरुष बंदी कंप्यूटर और इलेक्ट्रीशियन के प्रशिक्षण लेने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं.

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300 से अधिक बंदी हुए प्रशिक्षित

जेल प्रबंधन ने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक करीब 300 बंदियों को अलग-अलग क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है. सभी बंदी को प्रमाण पत्र भी दिया गया है. कई बंदी जेल से रिहा होने के बाद रोजगार भी कर रहे हैं.

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