विश्व भारती विश्विद्यालय में कोहराम, द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजे जाने पर 7 प्रोफेसरों को शोकॉज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Mar 2023 1:10 PM
विश्व भारती के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने से पहले ही विश्विद्यालय में कोहराम मच गया. कुलपति के खिलाफ राष्ट्रपति को पत्र भेजे जाने के बाद प्रबंधन ने 7 प्रोफेसरों को शोकॉज नोटिस भेजा है. इन प्रोफेसरों ने विश्वविद्यालय के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती पर गंभीप आरोप लगाए हैं.
बोलपुर, मुकेश तिवारी. दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने के पहले ही विश्व भारती विश्विद्यलय में कोहराम मच गया. दरअसल, विश्वविद्यालय के सात प्रोफेसरों के खिलाफ विश्व भारती प्रबंधन ने शोकॉज नोटिस जारी किया है. विश्वविद्यालय के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती पर राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग को लेकर प्रोफेसरों के संगठन ने राष्ट्रपति को एक खुला पत्र भेजा था.
यह पत्र विश्व भारती के प्रोफेसरों, आश्रम निवासियों, समाज के कई प्रमुख लोगों के एक समूह द्वारा लिखी गयी है. इस पत्र को लेकर चंद घंटों में ही विश्व भारती विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है. मंगलवार सुबह प्रोफेसरों को नोटिस मिला. विश्व भारती प्रबंधन की ओर से जारी शोकॉज में 29 मार्च तक जवाब देने को कहा गया है.
शोकॉज में विश्व भारती विश्विद्यालय के प्रोफेसर सुदीप्त भट्टाचार्य, कौशिक भट्टाचार्य, तथागत चौधरी, अरिंदम चक्रवर्ती, शरत कुमार जाना, समीरन साहा और राजेश केवी का नाम शामिल है. ये सभी विश्व भारती विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रोफेसर हैं. इनमें से कई के सिर पर निलंबन का नोटिस भी झूल रहा है.

वीबीयूएफए यानी विश्व भारती प्रोफेसर एसोसिएशन के बयान के अनुसार, विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति विद्युत चक्रवर्ती के कार्यकाल में यह संस्थान चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है. जिसके परिणामस्वरूप नैक और एनआरएफआई रैंकिंग में विश्व भारती नीचे पहुंच गया है. भारत के सभी हिस्सों के लोगों, खासकर फैकल्टी के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया है, उससे यह संस्थान बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
प्रोफेसरों के मुताबिक, एक मामले में विश्व भारती पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. उनका आरोप है कि कुलपति की पक्षपातपूर्ण मानसिकता संस्था के प्रमुख के रूप में उपयुक्त नहीं है, बल्कि यह निम्न मानसिकता का परिचायक है. उन्होंने कहा एक दलित छात्र-शिक्षक कुलपति के कोप का शिकार हो गए हैं. बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद शैक्षणिक और ढांचागत विकास की उपेक्षा की गई है. विश्व भारती में कई छात्रों, कार्यकर्ताओं, प्राध्यापकों को प्रताड़ित, निलंबित, बर्खास्त, झूठी जांच, न्यायालय की अवमानना आदि करके पूरे समाज का मनोबल गिराया है. दूसरी ओर, इस जल्दबाजी और अनियोजित दीक्षांत समारोह को आयोजित करने में सुरक्षा कारणों से आज ही होने वाली सेमेस्टर परीक्षा रद्द करनी पड़ी.
प्रोफेसरों ने कहा कि पत्र के माध्यम से विश्व भारती की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया है. वहीं, विश्व भारती के कार्यवाहक जनसंपर्क अधिकारी महुआ बनर्जी ने अधिकारियों की ओर से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. उन्होंने इस मामले में फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है.
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