कोलकाता हाईकोर्ट ने ममता सरकार को दिया झटका, ‘दुआरे राशन’ योजना अवैध घोषित

पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘दुआरे राशन’ योजना को अवैध घोषित कर दिया है.एक साल पहले पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से ‘दुआरे राशन’ योजना शुरू की गई थी.इस योजना का उद्घाटन खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया था.
पश्चिम बंगाल में
कोलकाता हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘दुआरे राशन’ योजना को अवैध घोषित कर दिया है. एक साल पहले पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से ‘दुआरे राशन’ योजना शुरू की गई थी, जिसके तहत लाभार्थियों के घर पर ही राशन सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी. इस योजना का उद्घाटन खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया था.बता दें, विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस योजना को टीएमसी के घोषणा पत्र में शामिल किया था. चुनाव में जीत मिलने के बाद ममता सरकार ने इस योजना को लागू किया. योजना का उद्घाटन करते समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया था कि ‘दुआरे राशन’ योजना शुरू होने के बाद अब राशन कार्ड धारकों को घंटों लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. डीलर राशन लेकर स्वयं कार्ड धारकों के घर तक पहुंचेंगे. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया था कि ‘दुआरे राशन’ योजना का लाभ करीब 10 करोड़ लगों को मिलेगा.
हालांकि इस योजना को लेकर राशन डीलरों में काफी नाराजगी थी. उनका कहना था कि राशन कार्ड धारकों के घर तक राशन पहुंचाना काफी कठिन काम है. इसी को लेकर कुछ राशन डीलरों ने इसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के खिलाफ बताया था और अदालत का रुख किया था. 11 सितंबर को ही इस मामले की सुनवाई पूरी हो गई थी, लेकिन कोलकाता हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.
डीलरों ने ‘दुआरे राशन’ योजना के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के विपरीत है. इस योजना के लिए पश्चिम बंगाल में इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं नहीं हैं. वहीं राशन डीलरों की याचिका पर जब हाईकोर्ट ने ममता सरकार से जवाब मांगा तो सरकार ने कहा था कि जिस गांव में राशन बंटना है, वहां पर डीलरों को वाहन ले जाकर एक जगह खड़ा करना होगा. इस गांव के 500 मीटर के दायरे में जो भी गांव होंगे, वहां के राशन कार्ड धारक आकर राशन ले लेंगे. इससे लोगों को घंटों लाइन में इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उनको सहूलियत होगी. हालांकि ममता सरकार के इस तर्क को हाईकोर्ट ने नहीं माना.
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