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बरेली: शिवेंद्र चौबे ने संभाली रामेश्वर नाथ की सियासी विरासत, डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव फेडरेशन के बने चेयरमैन

Updated at : 30 Aug 2023 3:42 PM (IST)
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बरेली: शिवेंद्र चौबे ने संभाली रामेश्वर नाथ की सियासी विरासत, डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव फेडरेशन के बने चेयरमैन

शिवेंद्र नाथ चौबे भाजपा संगठन में मुख्य भूमिका में हैं. इस बार उन्होंने डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव फेडरेशन के चुनाव में निर्विरोध जीत हासिल की है. शिवेंद्र नाथ चौबे को बरेली के नेताओं और पदाधिकारियों ने निर्विरोध जीत की बधाई दी है.

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Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली में कद्दावर नेता रहे दादा रामेश्वर नाथ चौबे की सियासत को उनके पौत्र शिवेंद्र नाथ चौबे ने संभाल लिया है. पूर्व विधायक रामेश्वर नाथ चौबे उर्फ मुन्ना चौबे एक बड़ा नाम थे. वह बरेली की सनहा, जो अब बिथरी चैनपुर विधानसभा है, वहां से पांच बार कांग्रेस से विधायक थे.

भाजपा की राम लहर 1991 में भी रामेश्वर नाथ चौबे ने कांग्रेस को जीत दिलाई थी. उनका वर्ष 2021 में निधन हो गया. इसके बाद उनके पौत्र शिवेंद्र नाथ चौबे ने सियासी विरासत को संभालना शुरू कर दिया है.

शिवेंद्र नाथ चौबे भाजपा संगठन में मुख्य भूमिका में हैं. इस बार उन्होंने डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव फेडरेशन के चुनाव में निर्विरोध जीत हासिल की है. शिवेंद्र नाथ चौबे को बरेली की आंवला लोकसभा सीट से भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप से लेकर तमाम नेताओं और पदाधिकारियों ने निर्विरोध जीत की बधाई दी है. इसके साथ ही फैडरेशन के डिप्टी चेयरमैन पद के लिए बहेड़ी के जयदीप बेनीवाल को चुना गया है.

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बरेली के कालीबाड़ी डीसीएफ कार्यालय पर हुए चुनाव में बरेली के निर्भय गुर्जर, राजकुमार अग्रवाल, भारतीय जनता पार्टी के आंवला जिलाध्यक्ष वीर सिंह पाल, पवन शर्मा, सांसद धर्मेंद्र कश्यप, संतोष शर्मा, भारतीय जनता पार्टी के महानगर अघ्यक्ष डॉ. केएम अरोड़ा और अन्य लोगों ने उपस्थित होकर शिवेंद्र नाथ चौबे को बधाई दी.

मृदुला पांडेय बनी कृभको की प्रतिनिधि

शहर की मृदुला पांडेय को इफको, नई दिल्ली का प्रतिनिधि चुना गया है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सहकारी समिति का प्रतिनिधि गौरव कुमार सक्सेना, पैक्स फैड, लखनऊ प्रतिनिधि के रूम में शिवेंद्र न्नाथ चौबे पीसीएफ के प्रतिनिधि के रूप में रवि पांडेय, केंद्रीय भंडार निगम प्रतिनिधि के रूप में गौरव शर्मा, जिला सहकारी बैंक प्रतिनिधि के रूप में ओमप्रकाश और रविंद्र सिंह, पीसीयू प्रतिनिधि के रूप में घनश्याम शर्मा, उत्तर प्रदेश दलहन तिलहन संघ प्रतिनिधि के रूप में चोखे लाल, और कृभको नई दिल्ली के प्रतिनिधि के रूप में घनश्याम शर्मा को चुना गया है.

दादा कांग्रेसी, पौत्र शिवेंद्र कर रहे हैं भाजपा में सियासत

रामेश्वर नाथ चौबे उर्फ मुन्ना चौबे 2000 तक की सियासत में सक्रिय रहे थे. करीब पांच बार के कांग्रेसी विधायक रामेश्वर नाथ चौबे के पौत्र और फिर बरेली जिला कांग्रेस के दो बार जिलाध्यक्ष रहे. उनके बेटे राजुल नाथ चौबे मुन्ना ने भी चुनाव लड़ा. लेकिन, विधायक नहीं बन सके. शिवेंद्र नाथ चौबे राजुल नाथ चौबे के बेटे हैं. वह वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी आंवला के संगगठनात्मक जिला उपाध्यक्ष हैं. इस बात को लेकर यह चुनाव और खास हो जाता है कि शिवेंद्र के निर्विरोध डीसीएफ चेयरमैन होने से भाजपा ने डिस्ट्रिक्ट को ऑपरेटिव फेडरेशन के चुनाव में पहली बार जीत दर्ज की है.

इमरजेंसी के दौरान भी दर्ज की थी जीत

कांग्रेस के पूर्व विधायक रामेश्वर नाथ चौबे ने 1977 में इमरजेंसी के दौरान जीत दर्ज की थी. उस वक्त लोग कांग्रेस से नफरत करने लगे थे. प्रत्याशी मतदाताओं के पास वोट मांगने भी नहीं जा रहे थे. मगर, इसके बाद भी रामेश्वर नाथ चौबे ने 1977 में जीत दर्ज की. वह निर्दलीय और कांग्रेस के टिकट पर पांच बार विधायक रहे. हालांकि, 1989 में कुंवर सर्वराज सिंह ने उन्हें हरा दिया था.

रामेश्वर नाथ चौबे और इस्लाम साबिर ने बचाया था कांग्रेस का किला

देश के साथ ही यूपी में भी कांग्रेस 1990 तक काफी मजबूत थी. मगर, वर्ष 1991 का चुनाव भाजपा ने राम मंदिर के नाम पर लड़ा. इस चुनाव में बरेली की सनहा से रामेश्वर नाथ चौबे और बरेली कैंट विधानसभा से पूर्व विधायक इस्लाम साबिर ने कांग्रेस को जीत दिलाई थी. रामेश्वर नाथ चौबे ने जनता दल के विधायक कुंवर सर्वराज सिंह को हराकर जीत दर्ज की.

हालांकि, बरेली की बाकी 7 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था और भाजपा की ही यूपी में सरकार बनी थी. वर्ष 1991 के चुनाव में बरेली की कांवर (मीरगंज) विधानसभा से सुरेंद्र प्रताप सिंह, बहेड़ी विधानसभा से हरीश गंगवार, फरीदपुर सुरक्षित विधानसभा से नंदराम, नवाबगंज विधानसभा से पूर्व मंत्री भगवत शरण गंगवार, आंवला विधानसभा से श्याम बिहारी सिंह और शहर विधानसभा सीट से डॉक्टर दिनेश जौहरी ने जीत दर्ज की थी.

वहीं दो वर्ष बाद ही यूपी के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद 1993 में फिर विधानसभा चुनाव हुए. इस चुनाव में 4 अक्टूबर 1992 को स्थापित होने वाली समाजवादी पार्टी ने बरेली की 9 सीटों में से 7 विधानसभाओं पर जीत दर्ज की थी.

रिपोर्ट- मुहम्मद साजिद, बरेली

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Sanjay Singh

लेखक के बारे में

By Sanjay Singh

working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.

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