रांची का संस्कृत महाविद्यालय चल रहा दो शिक्षकों के भरोसे, 2010 के बाद नहीं हुई नियुक्ति

Updated at : 17 Jan 2023 8:44 AM (IST)
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रांची का संस्कृत महाविद्यालय चल रहा दो शिक्षकों के भरोसे, 2010 के बाद नहीं हुई नियुक्ति

रांची में स्थित संस्कृत महाविद्यालय सिर्फ दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा है. बता दें कि यहां 2010 के बाद शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है. यहां एक शिक्षक को प्राचार्य का प्रभार दिया गया है तो दूसरे शिक्षक को साहित्य का.

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राजकीय संस्कृत महाविद्यालय रांची में स्थित है, लेकिन यह कॉलेज कहां है, इसकी कम ही लोगों को जानकारी है. इसके बारे में सिर्फ संस्कृत विषय से जुड़े लोगों को जानकारी है या यहां के शिक्षकों को. यह कॉलेज किशोरगंज में 1920 से स्थापित है और इसका संचालन विनोबा भावे विश्वविद्यालय की ओर से किया जाता है. सबसे बड़ी विडंबना है कि यहां विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए मात्र दो शिक्षक हैं. जिसमें एक शिक्षक को प्राचार्य का प्रभार दिया गया है, जबकि यहां इंटर से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई होती है.

संस्कृत और साहित्य में दो शिक्षक, बाकी विषय खाली

संस्कृत कॉलेज में साहित्य के शिक्षक डॉ राम नारायण पंडित को प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है. दूसरे शिक्षक डॉ शैलेश मिश्र संस्कृत पढ़ाते हैं. इनके अलावा गेस्ट फैकल्टी डॉ आरएस त्रिपाठी भी व्याकरण ही पढ़ाते हैं. ऐसे में यहां अन्य विषयों को पढ़ानेवाले शिक्षकों की कमी है. यहां उप शास्त्री (इंटर) और शास्त्री प्रतिष्ठा (स्नातक) की पढ़ाई होती है. जिसमें इंटर में 30 और स्नातक में लगभग 40 छात्र पढ़ते हैं. यहां साहित्य, व्याकरण, वेद और ज्योतिष के साथ हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत, इतिहास व दर्शन की पढ़ाई होती है. कॉलेज में क्लास रूम की कमी नहीं है, यहां 10 क्लास रूम और एक लाइब्रेरी है.

छोटे से काम के लिए जाना पड़ता है 100 किमी दूर

यहां के शिक्षकों की एक और समस्या है कि यह कॉलेज विनोबा भावे विवि के अंतर्गत संचालित होता है. इस कारण जब भी कोई समस्या या कोई काम होता है, तो यहां के शिक्षक या प्राचार्य को 100 किमी दूर सफर करके जाना पड़ता है. इससे इनकी समस्या बढ़ जाती है.

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2010 के बाद शिक्षकों की नहीं हुई नियुक्ति

प्रभारी प्राचार्य डॉ राम नारायण पंडित का कहना है कि यहां सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की कमी है. 2010 में कुल सात शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. जिसमें दो को देवघर, दो को चाईबासा और तीन शिक्षक को रांची के संस्कृत कॉलेज में नियुक्त किया गया था. इसमें रांची के एक शिक्षक सेवानिवृत्त हो गये. इसके बाद यहां केवल दो शिक्षक बच गये हैं. हमारे ही द्वारा क्लास का संचालन किया जाता है.

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