भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए बिहार की तर्ज पर बंगाल में भी बनेगा महागठबंधन!

Mahagathbandhan in West Bengal Election 2021: भारतीय जनता पार्टी जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल में अपनी जड़ें मजबूत कर रही है, विरोधी खेमे में हलचल मच रही है. सभी दलों के निशाने पर भाजपा ही है. भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए अब बिहार की तर्ज पर बंगाल में भी महागठबंधन की पैरवी की जा रही है.
कोलकाता (नवीन कुमार राय) : भारतीय जनता पार्टी जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल में अपनी जड़ें मजबूत कर रही है, विरोधी खेमे में हलचल मच रही है. सभी दलों के निशाने पर भाजपा ही है. भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए अब बिहार की तर्ज पर बंगाल में भी महागठबंधन की पैरवी की जा रही है.
बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने अपने धुर विरोधी कांग्रेस और वामदलों से अपील की है कि भाजपा को रोकने के लिए वे ममता बनर्जी का समर्थन करें. तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने कांग्रेस व वाम गठबंधन से यह अपील की है. भाकपा (माले) के महासचिव भाजपा विरोधी ताकतों को बिहार की तरह एकजुट होने की अपील पहले ही कर चुके हैं.
भाजपा से लड़ने के लिए इस्लामिक विचारधारा से ताल्लुक रखने वाली ताकतों को भी अपने साथ करने की कोशिश हो रही है. राज्य के संसदीय कार्य मंत्री तापस राय के मुताबिक, राजनीति में असंभव कुछ भी नहीं है. उनके अनुसार, भाजपा को किसी भी कीमत पर रोकना होगा, क्योंकि यह एक विभाजनकारी पार्टी है.
श्री राय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल कांग्रेस एवं वामदलों से अपील करती है कि इस लड़ाई में सभी लोग ममता बनर्जी का साथ दें. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस व वामपंथी मजबूत स्थिति में नहीं हैं. तृणमूल कांग्रेस के साथ रहने पर वह लोग आगे की लड़ाई लड़ सकते हैं.
तापस व सौगत रॉय से पहले भाकपा (माले) के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने भी कह रखा है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस व भाजपा में मुख्य शत्रु भाजपा है. बिहार में महागठबंधन करके उसे सीमित करने में काफी हद तक सफलता मिली है. उसमें जो गलती हुई है, उससे सीख लेते हुए यहां बेहतर परिणाम हासिल किया जा सकता है.
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि किसी भी कीमत पर हिंदुत्व को रोका जाना चाहिए, और सभी को इसके लिए एकजुट होना होगा. इसमें भाजपा विरोधी सभी ताकतों को साथ रखना होगा. उनका इशारा महागठबंधन में कट्टर इस्लामिक समूह के प्रति था, क्योंकि ओवैसी की पार्टी ने बिहार में महागठबंधन को काफी नुकसान पहुंचाया था.
पश्चिम बंगाल में एआईएमआईएम ने अब्बास सिद्दीकी के साथ मिलकर चुनाव में उतरने की रणनीति बना ली है. अगर वह लोग सफल होते हैं, तो भाजपा विरोधी तकरीबन 30 फीसदी अल्पसंख्यक वोट बैंक पर इसका असर पड़ेगा. चुनाव के लिहाज से यह भाजपा विरोधी दलों पर भारी पड़ सकता है.
माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी का कहना है कि भाजपा को रोकना उनकी प्राथमिकता है. लेकिन, पश्चिम बंगाल की जनता तृणमूल कांग्रेस को पसंद नहीं कर रही है. लिहाजा, अभी वे उनके (तृणमूल कांग्रेस के) साथ जाने के बारे में फैसला नहीं ले रहे हैं.
वाममोर्चा के अन्य घटक दल अपनी मौजूदा स्थिति को देखते हुए दबे स्वर में महागठबंधन के पक्ष में राय तो जाहिर कर रहे हैं, लेकिन खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं. वहीं, राज्य विधानसभा में विपक्षी दल के नेता अब्दुल मन्नान का कहना है कि कांग्रेस हिंदू-मुसलमान की राजनीति नहीं करती है. लिहाजा वह लोग लोगों की मांग को देखते हुए आगे बढ़ेंगे.
बंगाल की सभी पार्टियों का मानना है कि भाजपा को पश्चिम बंगाल में मजबूत करने में तृणमूल कांग्रेस का अहम योगदान रहा है. आज तृणमूल कांग्रेस को ही भाजपा से सबसे ज्यादा खतरा है. लिहाजा, उसकी मजबूरी है, भाजपा विरोधी पार्टियों के साथ जाना.
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ऐसे में भाकपा माले के नेता दीपांकर भट्टाचार्य द्वारा सभी भाजपा विरोधी राजनीतिक पार्टियों को साथ लेकर चलने पर ही भाजपा को शिकस्त दी जा सकती है, इस बात को सभी पार्टियां मान रही हैं. लिहाजा, फिलहाल चुनाव में महागठबंधन बनाने के लिए अभी से माहौल बनाने की कवायद चल रही है.
Posted By : Mithilesh Jha
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