बीरभूम हिंसा मामला : टीएमसी नेता भादू शेख की हत्या के आरोप में अब तक छह गिरफ्तार, बाकी चार की तलाश जारी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Mar 2022 10:46 AM

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बीरभूम हिंसा: भादू हत्याकांड ने गत सोमवार को साझेदारी के कारोबार के बारे में अफवाहों को हवा दे दी, लेकिन भादू को मारने का मकसद किसका था? फ़ोन पर उसे जान से मारने की धमकी किसने दी थी? इन सवालों के जवाब अभी भी अधूरे हैं.

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बीरभूम/पानागढ़ : बीरभूम जिले के रामपुरहाट बागतुई इलाके के तृणमूल नेता व बदशाल ग्राम पंचायत के उप प्रधान भादू शेख की हत्या मामले में बीरभूम जिला पुलिस ने बुधवार देर रात छापामारी अभियान चलाकर जिले के दो इलाकों से दो और नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है. बताया जाता है कि अभी तक भादू शेख हत्या मामले में जिला पुलिस ने कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. अब भी इस हत्या मामले में पुलिस फरार चार अन्य आरोपियों को तलाश रही है.

बताते चलें कि 21 मार्च की रात को तृणमूल नेता भादू शेख की हत्या मामले में 10 लोगों के खिलाफ मामला दायर कराया गया था. इस मामले में पुलिस ने पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था. बुधवार की देर रात छापेमारी अभियान के दौरान पुलिस ने दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. बीरभूम जिला पुलिस के अनुसार, जिले के माड़ग्राम से एक आरोपी तथा नलहाटी से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस ने बताया कि अभी तक इस मामले में कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इस मामले के चार आरोपी अब भी फरार हैं. उनकी तलाश की जा रही है. पुलिस ने बताया कि भादू शेख हत्या मामले में मंगलवार को 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. उनकी निशानदेही के बाद दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. जिले के माडग्राम से गिरफ्तार आरोपी का नाम शेख शफीक तथा नलहाटी से गिरफ्तार आरोपी का नाम भाषन शेख बताया गया है. इन आरोपियों को गुरुवार को रामपुरहाट महकमा अदालत में पेश किया जाएगा.

रामपुरहाट के एसडीपीओ धीमान मित्रा ने बताया कि अब तक भादू शेख हत्या मामले में हमलोगों ने कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. बाकी चार आरोपियों की तलाश चल रही है. जल्द ही वे लोग भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे. बताया जाता है कि भादू शेख ने अपने भाईयों की एक के बाद एक कर हो रही हत्या के बाद अपनी हत्या की आशंका को लेकर जिला पुलिस को अपनी सुरक्षा हेतु एक आवेदन भी किया था, लेकिन इस दिशा में उस वक्त जिला पुलिस ने भादू शेख को कोई सुरक्षा प्रदान नही किया था. मजबूरन भादू शेख अपनी सुरक्षा को लेकर निजी बॉडी गार्ड तक रखे हुये थे.

भादू को पहले से था जान का खतरा

भादू शेख को अपनी जान की इतनी फिक्र थी तौर वे अपनी हत्या को लेकर सब समय भयभीत रहते थे. आलम यह था कि भादू शेख ने अपने सोने वाले कमरे में एक भी खिड़की तक नहीं रखी थी. महल जैसे मकान में भादू शेख निजी सुरक्षा व्यवस्था के बीच घर मे रह्ते थे, लेकिन 21 मार्च की रात जब वे बोगतुई गांव के पास सड़क किनारे एक ढाबे में चाय पीने गए थे, तभी बदमाशों ने उनपर मौका देख बम मारकर हत्या कर दी थी. भादू शेख की मौके पर ही मौत हो गई.

अवैध कारोबार बना जान की आफत

भादू शेख की पत्नी ने भादू शेख की हत्या के बाद बार -बार यह कह रही थी कि उनके पति की दल के लोगों ने ही हत्या करवाई है. अवैध बालू कोयला और वसूली जैसे काले कारोबार का जाल भादू शेख ने फैला रखा था. इसके पीछे कई बड़े दल के नेताओं की भी मिली भगत थी, लेकिन दल में ही वर्चस्व की लड़ाई जारी थी. इसका खमियाजा भादू शेख को अपनी जान देकर गवानी पड़ी.

हफ्ता वसूली को लेकर झड़प

बताया जाता है कि एक ड्राइवर के रूप में अंगूर और भादू शेख की दोस्ती की शुरुआत हुई थी. बाद में, अंगूर और भादू और लालन ने संयुक्त रूप से मुर्गी पालन का कारोबार शुरू किया था. राजनीति में आने के बाद भादू शेख की प्रसिद्धि धीरे-धीरे बढ़ती गई. आरोप है कि पत्थर वाहनों से टैक्स वसूलने और डीसीआर टैक्स वसूलने के नाम पर सभी पार्टनर में कई बार हाथापाई और झड़प भी हुई थी.

जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप

राजेल और बापी भी उनके दोस्त बन गए थे. दो लोगों के जुड़ने के चलते अंगुर शेख और भादू शेख के बीच दूरियां लगातार बढ़ती गईं. अंगूर शेख की जमीन पर जबरन कब्जा करने और उसे फुटबॉल के मैदान में बदलने का आरोप भादू पर लगाया गया था. तभी से अंगूर शेख के परिवार के लोग गांव से बाहर हो गए थे. इस बीच अंगूर शेख और भादू के बीच खटास लगातार बढ़ने लगी. किसी के मारे जाने पर अंगूर और भादू के समर्थकों के बीच तोड़-फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं होती रही हैं.

पिछले साल भी हुई थी घटनाएं

पिछले साल बाबर शेख की मौत के बाद रामपुरहाट में ऐसी कई घटनाएं हुई थीं. एक के बाद एक कुछ भागीदारों की हत्या के बाद, भादू शेख का क्षेत्र में शुरू किए गए सभी वैध और अवैध व्यवसायों में व्यावहारिक रूप से एकाधिकार हो गया था. हाल ही में पंचायत चुनाव में जीत के बाद पंचायत का उप प्रधान बनने के बाद भादू की शक्ति में वृद्धि हुई थी. भादू को धमकी भी दी गई थी.

कारोबारी अफवाहों ने दी हवा

भादू हत्याकांड ने गत सोमवार को साझेदारी के कारोबार के बारे में अफवाहों को हवा दे दी, लेकिन भादू को मारने का मकसद किसका था? फ़ोन पर उसे जान से मारने की धमकी किसने दी थी? इन सवालों के जवाब अभी भी अधूरे हैं. क्या भादू की हत्या के बाद भी गांव में शांति लौटेगी? गत सोमवार की रात हुई घटना के बाद बागतुई में यह सवाल उठने लगा है मंगलवार इस घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया.

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हत्या पर राजनीति

विरोधी राजनीति करने वाले लोगों में नरसंहार की घटना के बाद बोगतुई ग्राम पहुंचे प्रदेश सीपीएम के पार्टी सचिव मोहम्मद सलीम ने साफ तौर पर मीडिया के समक्ष कहा था कि बीरभूम जिले में अवैध बालू ,कोयला,पत्थर व जबरन वसूली का कारोबार व्यापक रूप से फैला हुआ है. गोला बारूद के ढेर पर जिला बैठा हुआ है. इसमें शासक दल के तृणमूल नेता पूरी तरह से शामिल है. बोगतुई की घटना भी अवैध कारोबार को लेकर ही शुरू हुई. आपसी रंजिश के बीच आज साधारण 9 लोगों को जिंदा जलाकर मार दिया गया.

रिपोर्ट : मुकेश तिवारी

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