Bengal Election 2021 : नई नहीं है बंगाल चुनाव में पीएम और सीएम के बीच टशन, राजीव गांधी और ज्योति बसु के बीच भी हो चुका है मुकाबला
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 21 Mar 2021 9:33 AM
bengal vidhan sabha chunav news in hindi : कांग्रेस ने इस जीत के साथ ही बंगाल में वापसी की कोशिश में जुट गी, जिसके बाद विधानसभा चुनाव वाम मोर्चा के मुख्यमंत्री ज्योति बसु और राजीव गांधी के बीच एक लड़ाई की तरह हो गया. उस समय, राजीव गांधी पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार में आए और कहा कि ज्योति बसुजी उम्र दराज नेता हो गये हैं अब उन्हें इस समय सेवानिवृत्त होना चाहिए. B
नवीन रॉय : बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार मुख्य मुकाबला पीएम मोदी बनाम सीएम ममता हो गया है. बंगाल चुनाव में पीएम से सीएम का सीधा मुकाबला पहली बार नहीं है. इससे पहले, पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐसा हो चुका है. जब राज्य सरकार को हराने के लिए केंद्र सरकार सामने आ गयी है. इस मामले में पुराने लोग माकपा या वाम मोर्चा को 1987 के विधानसभा चुनावों में मिली अप्रत्याशित सफलता का जिक्र करते हैं. उस वक्त पूरा देश 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत पर शोक व्यक्त कर रहा था.
परिणामस्वरूप, कुछ दिनों के भीतर, कांग्रेस के पक्ष में लोकसभा चुनावों में सहानुभूति की हवा बहने लगी. भारी बहुमत के साथ, कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव जीता और राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने. इतना ही नहीं, उस लोकसभा चुनाव में, कांग्रेस पश्चिम बंगाल में भी सहानुभूति की हवा का लाभ उठाने में सक्षम रही और बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 16 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की.
कांग्रेस ने इस जीत के साथ ही बंगाल में वापसी की कोशिश में जुट गी, जिसके बाद विधानसभा चुनाव वाम मोर्चा के मुख्यमंत्री ज्योति बसु और राजीव गांधी के बीच एक लड़ाई की तरह हो गया. उस समय, राजीव गांधी पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार में आए और कहा कि ज्योति बसुजी उम्र दराज नेता हो गये हैं अब उन्हें इस समय सेवानिवृत्त होना चाहिए. हालांकि, यह सुनकर, ज्योति बसु ने चुनौती दी, मैं इस बार कांग्रेस में सीटों की संख्या को कम कर दूंगा और मैं राजीव को रिटायर कर दूंगा.
वाम मोर्चा सरकार ने इस चुनाव में उम्मीदवार को मैदान में उतारने में नये चेहरों पर भरोसा किया. इस चुनाव में 62 विधायकों को टिकट नहीं दिया गया. नया चेहरा लाने की कोशिश की गयी. 35 छात्र नेताओं को उम्मीदवार बनाया गया. उस वक्त वाममोर्चा की ओर से ज्योति बसु स्टार प्रचारक थे. उन्होने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि दिल्ली बंगाल को उसका हक नहीं दे रही है.
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री राजीव गांधी कांग्रेस के मुख्य प्रचारक थे. बार-बार दिल्ली से वह राज्य में चुनाव प्रचार करने आते रहे और उन्होंने ‘नया बंगाल बनाओ’ का नारा बुलंद किया. हालांकि, इस बार राजीव गांधी के मंत्रिमंडल से प्रणव मुखर्जी को हटा दिया था. उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और राज्य में समाजवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया. इस नई पार्टी ने कई केंद्रों में चुनाव लड़ा, लेकिन अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं करा पाई थी.
जब चुनाव परिणाम आया तो बंगाल में ज्योति बसु का दावा सच निकला और इस चुनाव में कांग्रेस की सीटों की संख्या पिछले चुनाव की तुलना में कम हो गयी. चुनाव में कांग्रेस को केवल 40 सीटें ही मिलीं. वाम मोर्चा भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई. ज्योति बसु फिर से मुख्यमंत्री बने. इस चुनाव में माकपा को अकेले 188 सीट मिली थी. इसके अलावा, फॉरवर्ड ब्लॉक आरएसपी और भाकपा को क्रमशः 26, 18 और 10 सीटें मिलीं थी.
कमोवेश वही राजनीति एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में देखने को मिल रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार चुनाव प्रचार में आ रहे हैं. उनके साथ उनका पूरा मंत्रीमंड़ल और भाजपा की मशीनरी मिशन बंगाल फतह में लगी है. जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अकेले ममता बनर्जी टक्कर दे रही है. लिहाजा लोगों की निगाह इस बात पर टिकी है कि ऊंट किस करवट बैठेगा
Posted By : Avinish kumar mishra
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










